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महिला के बिना पुरुष अस्तित्व विहीन है। सृष्टि पर मानव जगत का आधार स्त्री ही है। नारी को सृजन की शक्ति मानकर समूचे विश्व में 8 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

महिला के बिना पुरुष अस्तित्व विहीन है। सृष्टि पर मानव जगत का आधार स्त्री ही है। नारी को सृजन की शक्ति मानकर समूचे विश्व में 8 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

प्रिया राठौर

 “एक पुरुष के प्रति अन्याय की कल्पना से ही सारा पुरुष-समाज उस स्त्री से प्रतिशोध लेने को उतारू हो जाता है और एक स्त्री के साथ क्रूरतम अन्याय का प्रमाण पाकर भी सब स्त्रियां उसके आकारण दंड को अधिक भारी बनाए बिना नहीं रहती| इस तरह पग-पग पर पुरुष से सहायता की याचना न करने वाली स्त्री की स्थिति कुछ विचित्र सी है| वह जितनी ही पहुंच के बाहर होती है, पुरुष उतना ही झुंझलाता है और प्राय: यह झुनझुलाहत मिथ्या अभियोगों के रूप में परिवर्तित हो जाती है|
महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता लंबे समय से मौजूद है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ही यह लोकप्रिय हो गई है। महिला सशक्तिकरण केवल समान अधिकारों की लड़ाई नहीं है। महिला सशक्तिकरण एक समाज से महिलाओं का उत्थान है जो उन्हें लगातार नीचे की ओर खींच रहा है। भारत जैसे देश में जहां देवी-देवताओं की पूजा की जाती है वहीं एक महिला को यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, उसे शिक्षा के अधिकार से वंचित कर दिया जाता है, उसकी आवाज दबा दी जाती है और घरेलू हिंसा का अगला मामला बन जाता है। भारतीय समाज तभी विकसित हो पाएगा जब वे महिलाओं पर लगातार दबाव डालना बंद कर देंगे और उन्हें अपने विचार दूसरों के साथ साझा करने देंगे। भारत में एक महिला घर के कामों और परिवार के सदस्यों की देखभाल करने तक ही सीमित है। भारत में महिला सशक्तिकरण एक समय की आवश्यकता है क्योंकि महिलाओं में उनके अधिकारों को समझने के लिए उनके बीच जागरूकता महत्वपूर्ण है।

अगर वे अपने मूल अधिकारों के प्रति जागरूक होंगी तभी महिलाएं इसके लिए लड़ सकेंगी। महिला सशक्तिकरण की दिशा में पहला कदम उनकी राय का समर्थन करने से शुरू होता है। उनका उपहास न करें या उनकी राय को दफन न करें। उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएं और उनके आत्म-सम्मान का निर्माण करें। उन्हें अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करें, मदद के लिए संसाधन प्रदान करें और उनके गुरु बनें। महिलाओं में अपने जीवन को आकार देने की नहीं बल्कि दुनिया को आकार देने की क्षमता है। महिला सशक्तिकरण के साथ शुरू करने के लिए समान अवसर और अपने निर्णय लेने का अधिकार मूल बातें हैं। मदद के लिए संसाधन प्रदान करें और उनके गुरु बनें। महिलाओं में अपने जीवन को आकार देने की नहीं बल्कि दुनिया को आकार देने की क्षमता है। महिला सशक्तिकरण के साथ शुरू करने के लिए समान अवसर और अपने निर्णय लेने का अधिकार मूल बातें हैं। मदद के लिए संसाधन प्रदान करें और उनके गुरु बनें। महिलाओं में अपने जीवन को आकार देने की नहीं बल्कि दुनिया को आकार देने की क्षमता है। महिला सशक्तिकरण के साथ शुरू करने के लिए समान अवसर और अपने निर्णय लेने का अधिकार मूल बातें हैं।
भारत का प्रत्येक पुरुष जो प्रतिदिनल कार्य करता है। नौकरी करता है उसे सरकार या कंपनियों के द्वारा सप्ताह में 1 दिन की छुट्टी सुनिश्चित ही मिल जाती है। और यह भारत के प्रत्येक पुरुष का मानव अधिकार माना जाता है।

लेकिन क्या आपने कभी अपने दिमाग के घोड़े को दौड़ाया है, मेरे कहने का मतलब है आपने कभी यह विचार किया है जो महिला प्रतिदिन 1 साल के 365 दिन लगातार काम करती है क्या उनका कोई मानव अधिकार नहीं है। क्या परिवार का यह कर्तव्य नहीं की उसे सप्ताह में एक दिन छुट्टी दे।  क्या भारतीय समाज का यह दायित्व नहीं की महिला को एक दिन की छुट्टी देकर परिवार के लोग  उपवास रखे या फिर होटल से खाना मगाये।

हमने इस बात पर कभी ध्यान ही नहीं दिया।  हमारी मानसिकता में घर का काम कोई काम नहीं है।  इस वजह से हमने इस बारे में कभी सोचने का प्रयास नहीं किया।  तो  महिला सशक्तिकरण के बारे में बाद में फैसले लेगी।  लेकिन भारतीय समाज और हमारे परिवार को महिला सशक्तिकरण के लिये अपने परिवार से ही शुरुआत करनी  चाहिये ।

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