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Chandrayaan-2: ISRO ने किया नया खुलासा, आखिर चांद के चेहरे पर क्यों हैं काले दाग?

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का चंद्रयान-2 आए दिन चांद को लेकर नए-नए खुलासे कर रहा है। भले ही इसरो का विक्रम लैंडर चांद पर सही से लैंडिंग न कर पाया हो लेकिन चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चांद के चारों तरफ चक्कर लगा रहा और हर रोज नई और चौंकाने वाली तस्वीरें भेज रहा है जो चांद के कई रहस्यों से पर्दा उठा रहा है। 22 अक्तूबर को भी इसरो ने दो तस्वीरें जारी कीं। इसरो ने पहली बार चांद को दो रंगीन तस्वीरें जारी की हैं जिसमें पता चलता है कि आखिर चांद की सतह पर काले दाग क्यों हैं।

चांद के चेहरे पर काले धब्बे क्यों हैं?
चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगे डुअल फ्रिक्वेंसी सिंथेटिक एपर्चर राडार (DF-SAR) ने खुलासा किया है कि चांद के चेहरे पर नजर आने वाले काले धब्बे कुछ और नहीं बल्कि उसकी सतह पर पड़े गड्ढे (Crater) और उनकी परछाइयां हैं। इन्हीं गड्ढों और उनकी परछाइयों से ही चांद के चेहरे पर काले धब्बे से दिखाई पड़ते हैं।

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DF-SAR का काम
डुअल फ्रिक्वेंसी सिंथेटिक एपर्चर राडार (DF-SAR) ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद सतह का अध्ययन किया है। इस उपकरण से यह पता लगाया जा सकता है कि कहां गड्ढे हैं? कहां पहाड़, कहां समतल जमीन और कहां पत्थर पड़े हैं? इस उपकरण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम से कम चांद की सतह से 2 मीटर ऊंची किसी भी वस्तु की तस्वीर आराम से ले सकता है। इतना ही नहीं इसके लिए इस उपकरण से दो प्रकार की किरणें निकलती हैं। उन किरणों के सतह से टकराने और उनके वापस लौटने के आंकड़ों को जुटाकर यह पता किया जाता है कि चांद की सतह पर क्या है?

चांद की सतह पर कैसे बने ये गड्ढे?
चांद की सतह पर अक्सर दर्जनों या उससे ज्यादा की संख्या में उल्कापिंड, क्षुद्र ग्रह और धूमकेतु टकराते हैं जिससे उसकी सतह पर यह गड्ढे बने। DF-SAR ने यह भी बताया कि चांद की सतह पर बना कौन-सा गड्ढा कब बना। कौन- सा गड्ढा नया और कौन-सा पुराना इसरो ने जारी की तस्वीरों में इसकी सारी जानकारी जारी की है।

नए गड्ढे की पहचान
नए गड्ढे का रंग ज्यादा चमकदार और पीले रंग में दिख रहे हैं और उसके चारों तरफ ताजी मिट्टी और धूल दिखाई दे रही है। इन गड्ढों के अंदर का रंग चांद की सतह से चमकदार और हल्के रंग का है।

पुराना गड्ढा
गहरे रंग का चांद की सतह पर जिन गड्ढों का रंग गहरा है यानी काला, नीला और गहरा हरा है वह पुराने गड्ढे हैं। इन गड्ढों के अंदर का रंग चांद की सतह से मिलता-जुलता है।

चांद की सतह पर कितने प्रकार के गड्ढे
DF-SAR के आंकड़ों के मुताबिक चांद की सतह पर उल्कापिंड, क्षुद्र ग्रह और धूमकेतु टकराने से वर्टिकल (सीधे-गहरे गड्ढे) और ऑबलीक (परोक्ष, टेढ़े गहरे गड्ढे) बनते हैं।

वर्टिकल गड्ढे मतलब कि उल्कापिंड, क्षुद्र ग्रह और धूमकेतु जब एकदम सीधे जाकर चांद की सतह पर टकराते हैं तब उसे वर्टिकल क्रेटर या सीधा-गहरा गड्ढा कहते हैं, इनकी गहराई लगभग बराबर होती है।

ऑबलीक गड्ढे मतलब उल्कापिंड, क्षुद्र ग्रह और धूमकेतु जब चांद की सतह से सीधे न टकराकर टेढ़े-मेढ़े तरीके से टकराते हैं तब ऑबलीक क्रेटर या परोक्ष, टेढ़े गहरे गड्ढे बनते हैं। ऐसे गड्ढों की गहराई एक बराबर नहीं होती।

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