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धार्मिक

मकर राशि वालों पर चल रही साढ़े साती, शनिदेव के प्रकोप से बचना है तो रोज जरूर करें ये उपाय

भारतीय ज्योतिष में शनिदेव को न्याय का देवता माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, शनिदेव न्याय के देवता हैं और जातक को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। ज्योतिष गणनाओं के मुताबिक, फिलहाल मकर राशि में साढ़े साती का अंतिम चरण चल रहा है। पंचांग के अनुसार, शनिदेव 4 नवंबर तक वक्री चाल चलेंगे। शनि के मार्गी होने पर राशिचक्र की सभी राशियों पर मिलाजुला असर हो सकता है। मकर राशि के जातकों को 29 मार्च, 2025 तक साढ़े साती के प्रभाव से मुक्ति मिलेगी। पंडित प्रभु दयाल दीक्षित के मुताबिक, साढ़े साती के दौरान किसी भी जातक को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में साढ़े साती के दुष्प्रभावों से बचने के लिए कुछ उपाय जरूर करना चाहिए।

पीपल के पेड़ को जल अर्पित करें

मकर राशि के स्वामी न्याय के देवता शनिदेव हैं। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए रोज शनिदेव का आराधना करना चाहिए। इसके अलावा तांबे के पात्र में काले तिल मिलाकर पीपल के पेड़ को जल अर्पित करना चाहिए। रोज शनि चालीसा का पाठ करने से भी साढ़े साती का प्रभाव कम होता है।

शनिवार को करें इन चीजों का दान

शनिवार के दिन दान करने से भी साढ़े साती का प्रभाव कम होता है। साढ़े साती के बुरे प्रभाव से बचाव के लिए शनिवार को लोहे के पात्र में सरसों का तेल भरकर किसी गरीब को दान करना चाहिए। इसके अलावा किसी निर्धन व्यक्ति को जूते भी दान कर सकते हैं। शनिदेव को पूजा के समय नीले रंग के पुष्प अर्पित करना चाहिए।

मंगलवार को करें हनुमान चालीसा का पाठ

मंगलवार को हनुमान मंदिर जाकर बजरंगबली की आराधना करना चाहिए। रोज हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी शनिदेव का प्रकोप कम होता है। साढ़े साती का असर कम होने लगता है। जातक के जीवन में आने वाली विपत्तियां कम हो जाती है। इसके अलावा सोमवार को भगवान शिव की आराधना करना चाहिए और काले तिल, शहद, सुगंध और बेलपत्र मिलकर भगवान शिव का अभिषेक करें।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

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