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प. बंगाल में वर्चस्व की लड़ाई और बढ़ती हिंसा, लगने वाला है राष्ट्रपति शासन?

नई दिल्ली:  प. बंगाल मे वर्चस्व की लड़ाई के चलते हिंसा थमने का नाम ही नहीं ले रही है। लोकसभा चुनाव (Loksabha election) के समय से बंगाल में बीजेपी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच टकराव बढ़ता चला गया। आरोप – प्रत्यारोप के साथ बंगाल में ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने के बाद हिंसा (Violence) ने भयावह रूप लिया। आज केंद्र में बीजेपी की सरकार बन चुकी है, लेकिन बंगाल में बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। 8 जून को बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले के भांगीपाड़ा में 5 लोगों की मौत हो गई। टीएमसी ने इसके लिए बीजेपी के कार्यकर्ताओं को दोषी ठहराया है। शनिवार रात और रविवार सुबह भी बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं में झड़प हुई।

गृह मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी
इन सबको देखते हुए गृह मंत्रालय ने एक एडवाइजरी जारी की, जिसमें कहा गया कि केंद्र बंगाल की स्थिति पर चिंतित है। वहां एक हफ्ते से जारी हिंसा को देखते हुए लगता है कि राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह विफल हो गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (mamta banerjee) ने बंगाल में चल रही हिंसा का आरोप बीजेपी पर लगाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी बंगाल को गुजरात बनाना चाहती है।

काला दिवस मनाने की घोषणा
बंगाल में बढ़ती हिंसा को देखते हुए बीजेपी ने बंगाल में काला दिवस मनाने की घोषणा की। लोकसभा चुनाव के प्रत्येक चरण के मतदान के समय भी बंगाल से लगातार हिंसा की खबरें आती रही। लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान से पहले अमित शाह के रोड शो के दौरान बंगाल में बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच जमकर हिंसा हुई। इस दौरान ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ती भी तोड़ी गई, जिसका आरोप दोनों ही पार्टीयों ने एक दूसरे पर लगाया।

चुनाव आयोग को करना पड़ा आर्टिकल 324 का प्रयोग
बंगाल में इस प्रकार की हिंसा को देखते हुए चुनाव आयोग ने पहली बार आर्टिकल 324 का प्रयोग करते हुए एक दिन पहले ही बंगाल में चुनाव प्रचार बंद करने के निर्देश दे दिए। इसके बाद ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी पक्षपात करने का आरोप लगाया।

नहीं रुकी हिंसा तो लग सकता है राष्ट्रपति शासन 
ममता बनर्जी की लाख कोशिशों के बाद भी बीजेपी ने बंगाल में 18 सीटें जीती और प्रचंड बहुमत से जीत हासिल कर केंद्र की सत्ता संभाली। बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह गृह मंत्री का पदभार संभाल चुके हैं। साथ ही बंगाल के हालात को देखते हुए एडवाईजरी भी जारी की गई है। बंगाल के हालात अगर इसी प्रकार बने रहे तो यहां कभी भी राष्ट्रपति शासन लग सकता है। देखना ये होगा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बंगला में अपनी कम होती साख को बचाने के लिए क्या कुछ करती है और बीजेपी उनको रोकने के लिए क्या प्रयास करती है। फिलहाल बंगाल के हालात को देखते हुए लगता है कि बीजेपी बंगाल में अपना वर्चस्व स्थापित करने में कामयाब हो जाएगी।

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