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बिल्डर पर बड़ी स्ट्राइक: ADEL लैंडमार्क्स की 585 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच, 1000 करोड़ के फ्रॉड में ED का एक्शन

अपना घर खरीदने का सपना हर आम आदमी देखता है. इसके लिए वह अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी लगा देता है, लेकिन जब सालों के इंतजार के बाद भी उसे घर न मिले, तो यह सपना एक बुरे डरावने ख्वाब में बदल जाता है. कुछ ऐसा ही हुआ है ADEL Landmarks (पूर्व में Era Landmarks) के हजारों ग्राहकों के साथ. करीब 19 साल के लंबे इंतजार और धोखाधड़ी के आरोपों के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई की है. ED ने कंपनी और उसके प्रमोटर्स पर शिकंजा कसते हुए ₹585 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति को अपने कब्जे में ले लिया है.

₹585 करोड़ की संपत्तियां अटैच

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुरुग्राम ज़ोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में कार्रवाई करते हुए ADEL Landmarks Ltd. और इसके प्रमोटर्स हेम सिंह भराना व सुमित भराना के खिलाफ सख्त कदम उठाया है. ED ने 9 जनवरी 2026 को एक प्रोविजनल ऑर्डर जारी किया, जिसके तहत कंपनी की ₹585.46 करोड़ की अचल संपत्तियों को अस्थाई रूप से अटैच (कुर्क) कर दिया गया है.

हैरानी की बात यह है कि जब्त की गई संपत्तियों में करीब 340 एकड़ में फैली जमीनें शामिल हैं. ये जमीनें हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, बहादुरगढ़ और उत्तर प्रदेश के मेरठ व गाजियाबाद जैसे प्रमुख शहरों में स्थित हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक, ये संपत्तियां कंपनी और उसकी सब्सिडियरी कंपनियों के नाम पर रजिस्टर्ड थीं, जिन्हें अब PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत जब्त किया गया है.

1000 करोड़ का बड़ा खेल

इस पूरे मामले की जड़ें काफी गहरी हैं. ED ने अपनी जांच 74 अलग-अलग FIR और चार्जशीट के आधार पर शुरू की थी, जो हरियाणा पुलिस, दिल्ली पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज की गई थीं. जांच में सामने आया कि कंपनी ने 2006 से 2012 के बीच एनसीआर में कई लुभावने हाउसिंग प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए थे.

आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति की गंभीरता समझ आती है. कंपनी ने Cosmocourt, Cosmocity, Skyville, Redwood Residency और Era Green World जैसे 8 प्रोजेक्ट्स में 4,771 ग्राहकों से बुकिंग के नाम पर करीब ₹1,075 करोड़ वसूले. वादा किया गया था कि समय पर फ्लैट और यूनिट्स की डिलीवरी दी जाएगी. लेकिन हकीकत यह रही कि 12 से 19 साल बीत जाने के बावजूद ये प्रोजेक्ट्स अधूरे पड़े हैं और खरीदारों के हाथ खाली हैं.

घर बनाने की बजाय खरीदी जमीन

ED की तफ्तीश में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि ग्राहकों से लिया गया पैसा प्रोजेक्ट्स में लगाया ही नहीं गया. जांच एजेंसी का आरोप है कि प्रमोटर्स ने होमबायर्स की गाढ़ी कमाई को ग्रुप की दूसरी कंपनियों में डायवर्ट कर दिया. इस पैसे का इस्तेमाल कथित तौर पर दूसरी जगहों पर जमीन खरीदने और निजी फायदों के लिए किया गया, जबकि जिस प्रोजेक्ट के लिए पैसा लिया गया था, वह अधूरा ही रह गया.

इतना ही नहीं, कंपनी ने कई बार ग्राहकों को बिना बताए प्रोजेक्ट के प्लान और नक्शे तक बदल दिए. मूल रूप से जो सुविधाएं और जमीन का क्षेत्रफल (Area) बताया गया था, उसे बाद में घटा दिया गया. जब परेशान खरीदारों ने अपना पैसा वापस (रिफंड) मांगा, तो उन्हें चेक थमा दिए गए, जिनमें से कई चेक बैंक में बाउंस हो गए.

चुपके से बैंकों में गिरवी रखी जमीन

धोखाधड़ी का सिलसिला यहीं नहीं रुका. जांच में यह भी पता चला है कि प्रमोटर्स ने इन प्रोजेक्ट्स की जमीन को बैंकों के पास गिरवी रखकर करोड़ों का लोन भी उठा लिया. यह सब कुछ उन ग्राहकों की जानकारी के बिना किया गया, जिन्होंने उन जमीनों पर बनने वाले फ्लैट्स के लिए पहले ही पैसे दे रखे थे. फिलहाल, ED की जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि डायवर्ट किया गया पैसा और कहां-कहां छिपाया गया है.

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