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Navratri Durga Ashtami: दुर्गाष्टमी आज, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कन्या पूजन महत्व

दुर्गाष्टमी के दिन छोटी कन्याओं के पूजन का विधान है. कन्याओं को मां का स्वरुप माना जाता है. इस दिन कन्याओं को घर पर बुलाकर पूजन किया जाता है. पूजन के बाद उन्हें हलवा, चना और पूरी का भोजन कराया जाता है.

आज शारदीय नवरात्र का आठवां दिन है. इसे दुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. नवरात्र के 8वें दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरुप की पूजा की जाती है. हिन्दू पंचांग के अनुसार अष्टमी 2 अक्टूबर को शाम 6:49 से शुरु होकर अगले दिन यानी 3 अक्टूबर को शाम 4:39 बजे तक रहेगी. 3 अक्टूबर को दुर्गाष्टमी में सूर्योदय हो रहा है, इसलिए दुर्गाष्टमी की पूजा भी इसी दिन होगी.

इस दिन छोटी कन्याओं के पूजन का विधान है. कन्याओं को मां का स्वरुप माना जाता है. इस दिन 9 या 11 या फिर 21 कन्याओं को घर पर बुलाकर पूजन किया जाता है. पूजन के साथ ही उन्हें हलवा, चना और पूरी का भोजन कराया जाता है. इसके बाद इन्हें घर से विदा करते समय उपहार स्वरुप पैसे या कोई चीज दी जाती है. सनातन संस्कृति में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. यह लोगों में मातृ शक्ति के सम्मान की भावना को बढ़ाता है.

मां महागौरी को माता दुर्गा का सबसे शांत स्वरुप माना जाता है. मां महागौरी को बहुत आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है. पूजन के दौरान मां को प्रसन्न करने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष रुप से किया जाता है. इस दिन विशेष मंत्रों का उच्चारण किया जाता है.

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

इसके साथ ही मां दुर्गा के मंत्र का भी जाप किया जाता है.

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

जिन लोगों के घरों में अष्टमी मनाई जाती हैं, उन लोग का नवरात्र व्रत आज संपन्न हो जाएगा. हालांकि जो लोग नवमी मनाते हैं, उनका व्रत कल नवमी की पूजा के साथ संपन्न हो जाएगा.

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की होती है पूजा

●  माता शैलपुत्री – पहले नवरात्र में माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है. माता शैलपुत्री को मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है. मां शैलपुत्री चंद्रमा की दशा को नियंत्रित करती हैं. माता शैलपुत्री की पूजा से चंद्रमा का दोष समाप्त हो जाता है.

● माता ब्रह्मचारिणी – नवरात्र के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. माता ब्रह्मचारिणी को मां दुर्गा का दूसरा  स्वरूप माना जाता है. माता ब्रह्मचारिणी की पूजा से मंगल दोष दूर होते हैं.

● माता चंद्रघंटा – नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. माता चंद्रघंटा शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं. उनके पूजन से शुक्र ग्रह के दोष दूर होते हैं.

● माता कूष्मांडा – नवरात्र क चौथे दिन माता कूष्मांडा की पूजा की जाती है. माता कूष्मांडा मां दुर्गा का चौथा स्वरूप है, माता का यह स्वरूप सूर्य की दशा को नियंत्रित करता है, कूष्मांडा माता के पूजन से सूर्य के कुप्रभावों से रक्षा होती है.

● मां स्कंदमाता – नवरात्र के पांचवे दिन मां दुर्गा के 5वें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है. माता का यह स्वरूप बुध ग्रह को नियंत्रित करता है. स्कंदमाता के पूजन से बुध ग्रह के दोष दूर हो जाते हैं.

● माता कात्यायनी – नवरात्र के छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा होती है. मां का यह स्वरूप बृहस्पति की दशा को नियंत्रित करता है. कात्यायनी माता के पूजन से बृहस्पति का दोष दूर हो जाता है.

●माता कालरात्रि – नवरात्र के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा होती है. मां दुर्गा का यह स्वरूप शनि की दशा को नियंत्रित करता है.  मां कालरात्रि की पूजा से शनि के दोष दूर हो जाता है.

● माता महागौरी – नवरात्र के आठवें दिन माता महागौरी की पूजा की जाती है. मां दुर्गा का यह रूप राहु की दशा को नियंत्रित करता है. माता महागौरी के पूजन से राहु दोष दूर हो जाते हैं.

● माता सिद्धिदात्री – नवरात्र के 9वें दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा होती है. माता का यह स्वरूप केतु की दशा को नियंत्रित करता है. सिद्धिदात्री माता के पूजन से केतु दोष दूर हो जाता है.

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