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मोदी की अगुवाई में अंतर्राष्ट्रीय फलक पर भारतीय संस्कृति की धमक

डॉ.रजनीश कुमार झा
किसी भी राष्ट्र के विकास के एजेंडे में संस्कृति की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हमारा भारत एक देश के रूप में अपनी संस्कृति की बहुलता का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति एवं परंपरा को ध्यान में रखते हुए भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी हमेशा भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने एवं भारत की वैश्विक छवि को बदलने के लिए सफल प्रयास करते रहे हैं। इसके लिए बकायदा 5 स्तंभ को आधार बनाया गया है। ये 5 स्तंभ हैं सम्मान, संवाद, समृद्धि, सुरक्षा और संस्कृति एवं सभ्यता। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के विद्वान जोसेफ नाई के मुताबिक मोदी भारत की वैश्विक पहुँच में बदलाव के वाहक बने हैं। भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को आगे बढ़ाने में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि पीएम मोदी के आह्वान के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 11 दिसंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित करना रहा। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हर साल मिलने वाली शानदार प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि योग को भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में काफी लोकप्रियता हासिल हुई है। लगभग सभी देशों के लोगों के बीच में योग काफी लोकप्रिय हुआ है।
भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने में मोदी सरकार ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने और बढ़ावा देने के लिए अपने संस्थागत तंत्र को पुनर्जीवित किया है। 2014 से मोदी सरकार के अंतर्गत सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आई. सी. सी. आर.) को और मजबूत किया है। 37 देशों में फैले अपने सांस्कृतिक केंद्रों के माध्यम से ICCR ने भारत और विदेशों में सांस्कृतिक समारोहों के आयोजन में अहम भूमिका निभाई है। इतना ही नहीं विदेशों में इंडियन स्टडीज चेयर्स की स्थापना, विदेशी छात्रों/अध्ययनरत छात्रों को भारत में अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति, फेलोशिप प्रदान करना और ऐसी अन्य कई सारी गतिविधियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार जारी है।
विश्व भर में भारतीय संस्कृति के प्रचार हेतु 2015 में अंतर्राष्ट्रीय रामायण महोत्सव भी शुरू किया है. पीएम मोदी ने भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ाने हेतु एक और महत्वपूर्ण कदम 2014 में उठाया। इसके अंतर्गत आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी विभाग को मंत्रालय बना दिया गया जिसको ‘आयुष विभाग’ के नाम से जाना जाता था। तब से आयुष मंत्रालय, आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए नीति निर्माण, विकास और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का कार्य कर रहा है।
इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता कि पीएम मोदी भारतीय संस्कृति के प्रचार के माध्यम से भारत के हित को आगे बढ़ाने में सफल रहे हैं। यह राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर पीएम मोदी के राजनीतिक कौशल को दर्शाता रहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह दिखा दिया कि अगर दूरदर्शिता हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं है।
जाहिर है कि हमारी पहचान ही हमारी संस्कृति से है। पीएम हमेशा से अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने की कोशिश में लगे हैं। पिछले 7 साल के दौरान कई मंदिरों के पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार का काम शुरू किया। 1000 साल के विदेशी आक्रांताओं के शासन में जो सभ्यता का संघर्ष चला, जो ज्यादतियां हुईं और इन सबके बीच भारत के इन पवित्र मंदिरों ने आस्था और धर्म को बचाए रखने और उसके फिर से उत्थान में बड़ी भूमिका निभायी है। इसलिए पीएम बनते ही श्री नरेन्द्र मोदी उनके पुनरोद्धार में लग गए। सनातन धर्म, सभ्यता और सांस्कृतिक परंपरा को पूरी दुनिया में फिर से स्थापित करने का काम पीएम मोदी ने किया है।
साल 2019 में पीएम मोदी की सरकार ने अबू धाबी में भगवान श्रीकृष्ण श्रीनाथजी के पुनर्निर्माण के लिए 4.2 मिलियन डॉलर देने का ऐलान किया। इसके साथ ही 2018 में पीएम मोदी ने अबू धाबी में बनने वाले पहले हिंदू मंदिर की आधारशिला रखी थी।
हम और आप कह सकते हैं कि लंबे अर्से बाद एक ऐसा नेता भारत के हृदय से उभरा है जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों को लेकर बहुत स्पष्ट है और उन्हें खुले तौर पर प्रदर्शित भी करता है। यहां हम एक ऐसा राजनेता देखते हैं जो अपनी पारंपरिक भारतीय पोशाक में दिखाई देने के साथ हिंदी में भाषण देने से भी संकोच नहीं करता, चाहे भारत में हो या विदेश में। यह नेता तमिलनाडु के परिधान वेष्ठी (धोती) में भी उतना ही सहज है जितना पूर्वोत्तर की टोपी या फिर नौकरशाहों के ‘बंद गला’ में, जिसने हमारी राजनीति और कूटनीति का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व किया है।
पीएम मोदी ने ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में कई भाषाओं में खुद को अभिव्यक्त करके भारत की भाषाई विविधता दिखाई। भारत की अभिव्यक्ति का यही वह उच्चारण है जो हमें बताता है कि श्री नरेन्द्र मोदी का गर्व खुद को श्रेष्ठ महसूस करने को लेकर नहीं है, बल्कि यह स्वयं में सहज होने से उपजता है। यह बात भारतीय लोगों तक भी पहुंच गई है और वे अपनी सांस्कृतिक भिन्नता को लेकर हीनता का अनुभव नहीं करते।
विदेशी नेताओं को नई दिल्ली के अपने दायरों से बाहर निकालकर अहमदाबाद, वाराणसी, चंडीगढ़ या मामल्लपुरम जैसी जगहों पर ले जाकर श्री नरेन्द्र मोदी ने दिखाया है कि यह नया भारत दरअसल पुराने और नए दोनों के साथ सहज है और अपने सभ्यतागत मूल्यों और विश्वासों से संचालित है।
जापान के पूर्व पीएम के साथ गंगा को अर्पित भावांजलि हो, चीनी राष्ट्रपति शी. जिनपिंग के साथ अहमदाबाद का दौरा रहा हो या फिर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दौरा रहा हो। पीएम ने हर जगह अपनी संस्कृति को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। पीएम मोदी की ये ताकत है। मौजूदा दौर में उनके शब्द दुनिया भर में फैले उन करोड़ों लोगों के विश्वास का प्रतिनिधित्व करते हैं जो इस भावना को साझा करते हैं। चाहे केदारनाथ की एक गुफा में बैठकर शिव का ध्यान करना हो या उन्मुक्त ढंग से भारतीय धर्मग्रंथों से विचार उद्धृत करना हो। मोदी एक ऐसी सभ्यतागत पहचान को जागृत करने का प्रतीक हैं जिसे जबरन नींद में धकेल दिया गया था। चाहे ढाका में ढाकेश्वरी मंदिर के दर्शन करना हो या काठमांडू में भगवान पशुपतिनाथ के या फिर अबू धाबी में पहले मंदिर का उद्घाटन करना। भारत का अपनी जड़ों से जुड़ना अब उत्साह से लबरेज है। इन सबके अलावा अमेरिका में दिवाली की छुट्टी को लेकर वहां की संसद में Diwali Day Act. लाना साबित करता है कि हमारी धमक अंतर्राष्ट्रीय फलक पर किस तरह से जम चुकी है।
ना केवल अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बल्कि भारत में भी मोदी जी के नेतृत्व में मंत्रालय भारत के विभिन्न भागों में समय-समय पर राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का आयोजन करती है जो भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का मौका उपलब्घ कराता है। आजादी का अमृत महोत्सव भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है। अमृत महोत्सव के दौरान अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, सुरक्षित करने और उसे कायम रखने के लिए नए सिरे से गर्व की अनुभूति हो रही है। मोदी जी के नेतृत्व में भारत में बहुत सारे काम हुए हैं मसलन:
अयोध्या का राम मंदिर
काशी विश्वनाथ कॉरीडोर
केदारनाथ धाम का पुननिर्माण
चार धाम परियोजना
कश्मीर में मंदिरों का पुनरोद्धार
नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण
इंडिया गेट पर सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा
इन सबके अलावा
मूर्तियों को विदेशों से वापस लाना
पीएम मोदी सरकार मूर्तियों को विदेशों से वापस लाने के मोर्चे पर भी काफी अव्वल साबित हुई है। श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले 1947 से 2014 तक सिर्फ 13 मूर्तियों को विदेश से वापस लाया गया था। जबकि पिछले 7 साल में 67 मूर्तियों को वापस लाया गया है। अभी अमेरिका में 157 पुरानी मूर्तियां और अन्य चीजें हैं, उनको भी पहचान करके वापस भारत लाया जा रहा है। अभी हाल ही में कनाडा से 100 वर्ष पूर्व चोरी हुई मां अन्‍नपूर्णा की मूर्ति को भारत लाना एक अहम पड़ाव रहा है।
आजादी के अमृत महोत्सव का आयोजन:
आजादी के अमृत महोत्सव को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 12 मार्च 2021 महात्मा गांधी दांडी यात्रा शुरुआत दिवस से शुरू किया। आजादी के अमृत महोत्सव को शुरू करने का महत्व भारत की आजादी को 75 वर्ष पूर्ण होना है जिसके 75 सप्ताह पहले ही अमृत महोत्सव शुरू किया गया। केंद्र सरकार ने अब इस महोत्सव को 2023 तक आगे बढ़ाने का फैसला भी कर लिया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव का अर्थ आजादी की ऊर्जा का अमृत है। यानी स्वतंत्रता सेनानियों की स्वाधीनता का अमृत। आजादी का अमृत महोत्सव मतलब नए विचारों का अमृत। नए संकल्पों का अमृत और आत्मनिर्भरता का अमृत है।
एक भारत श्रेष्ठ भारत:
“एक भारत श्रेष्ठ भारत”, एक ऐसी नयी और प्रभावशाली योजना है जो भारत सरकार द्वारा शुरू की गयी हैं। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर 2015, सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म दिवस) पर इस नयी पहल को शुरू करने की घोषणा की थी। इस योजना का उद्देश्य मौजूदा सांस्कृतिक संबंधों के माध्यम से देश के विभिन्न भागों में एकता को बढ़ावा देना हैं। इसका उद्देश्य उन भारतीयों के बीच भी सम्बंधों को सुधारना है जो पूरे देश में अलग-अलग भागों में रह रहे हैं। ये पहल लोगों को लोगों से जोड़ेगी जो वास्तव में भारत में एकता को बढ़ायेगी।
राम वन गमन पथ का निर्माण:
अयोध्या से वन गमन को चले भगवान श्रीराम के पग जहां-जहां पड़े थे, अब वहां राम वन गमन पथ बनाया जाएगा। राम वन गम पथ बनाने की तैयारी पूरी हो गई है। छह चरणों में 177 किलोमीटर का फोरलेन राम वन गमन पथ का निर्माण किया जाना है। इस पर 4319 करोड़ रुपये की लागत आएगी। 2015 में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने रामायण सर्किट विकसित करने का एलान किया था।
बुद्धा सर्किट:
केंद्र सरकार बौद्ध सर्किट परियोजना पर फोकस बढ़ा रही है, 2016 में बौद्ध सर्किट परियोजना की घोषणा की गई थी। इसके बाद कई स्कीम्स के तहत परियोजना के लिए 343 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे, जिसमें से 278 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं। पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन योजना के तहत, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश में कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। ये परियोजनाएं कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं, जिनमें से अधिकांश को 2022-23 की समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य है।
आदि महोत्सव का आयोजन:
प्रधानमंत्री आदिवासियों के उत्थान और उनकी संस्कृति को जीवित रखने की दिशा में भी संकल्पित हैं। यही वजह है कि उनकी सरकार ने 2017 में आदि महोत्सव की शुरुआत की और ये एक सफल कार्यक्रम साबित हुआ और अब हर साल इसका आयोजन होता है। यह भारत में आदिवासी समुदायों की समृद्ध संस्कृति से लोगों को परिचित कराने का एक सार्थक प्रयास है। 2021 का संस्करण भारत की विभिन्न जनजातियों की विविध विरासतों को उनकी कला, हस्तशिल्प, प्राकृतिक उत्पाद और व्यंजनों के सम्मिश्रण के माध्यम से प्रदर्शित रहा।
कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि लंबे अर्से बाद हम तमाम भारतीयों के लिए ऐसा क्षण आया है जिसके लिए बहुत लंबा इंतजार करना पड़ा है। हम और आप ये भी कह सकते हैं कि मोदी जी के नेतृत्व में अब अपना इंडिया भारत की तरफ लौट रहा है। जो भारत कहीं खो गया था, उसे पीएम मोदी वापस ला रहे हैं।

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