ब्रेकिंग
Gariaband Crime News: गरियाबंद में गांजा तस्करी का अनोखा मामला, मां-बेटे को 18 किलो गांजे के साथ पुल... Thane District News: आदिवासी आश्रम स्कूल के छात्र की मौत पर आक्रोश, परिजनों और संगठनों ने किया प्रदर... Durg Police Action: ठाणे के अपार्टमेंट में चल रहा था रेड्डी अन्ना और फेयरप्ले ऐप का खेल, छत्तीसगढ़ प... Balrampur Development News: डिप्टी सीएम अरुण साव ने 157 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण और भ... Balrampur News: विजयनगर स्कूल में मधुमक्खियों के हमले से घायल 12 बच्चों के लिए 3 लाख रुपये की सहायता... Magarlod Police Action: मेघा गांव में पेट्रोल पंप और बाइक फूंकने वाला आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ में हुआ... Dhamtari Extortion Case: नहरनाका चौक पर वाहनों को रोककर पैसे लेने का मामला, खनिज अधिकारी ने दिए जांच... Bilaspur Crime News: गरबा ड्रेस पहनकर सिगरेट पीने और पिस्तौल दिखाने वाली युवतियों समेत 9 आरोपी गिरफ्... Women T20 Series Raipur: रायपुर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का रोमांच, जानिए टिकट दरें, श्रेणियां और प... Mahasamund Crime News: ऑपरेशन निश्चय के तहत महासमुंद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 2.80 करोड़ का गांजा जब्...
मध्यप्रदेश

Seoni News : मैदान पर मिट्टी की ईटों का चबूतरा बनाकर रखा जा रहा करोड़ों रुपये का धान

सिवनी। किसानों से खरीदा गया बेशकीमती करोड़ों रुपये का धान भंडारित करने जिले के गोदाम व ओपन कैप कम पड़ रहे हैं। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत मप्र वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के तकनीकी विभाग द्वारा मैदान पर मिट्टी की ईटों से चबूतरा (स्टेक) तैयार करवाकर इसमें लाखों क्विंटल धान का भंडारण किया जा रहा हैं। अधिकारियों का दावा है कि भंडारित धान का उठाव एक माह में कर लिया जाएगा। लेकिन जिले में साल 2019-20 में भंडारित करीब 8 लाख क्विंटल धान का तय समय में उठाव नहीं होने से सड़ कर खराब और बर्बाद हो चुका है। ऐसे में मिट्टी की ईटों पर भंडारित धान का उठाव एक माह में हो जाएगा, यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है। जानकारों का कहना है कि समर्थन मूल्य पर उपार्जित सरकारी धान व गेहूं के निस्तारण (उपयोग) की विस्तृत योजना नहीं होने के कारण इस तरह की स्थिति हर साल जिले में निर्मित हो रही है। इस साल लगभग 48 लाख क्विंटल धान का उपार्जन किया गया है। वहीं साल पिछले साल 2020-21 में खरीदे गए 34 लाख क्विंटल धान में से करीब 14 लाख क्विंटल धान भंडारित है, जिसका मिलिंग कर चावल तैयार होना हैं। धान मिलिंग की अंतिम तिथि 28 फरवरी निर्धारित की गई है।

धान से भरे ट्रकों की लगी लाइन : हालात यह हैं कि जनवरी माह में उपार्जन कार्य पूरा हो चुका है। 15 फरवरी बीत जाने के बाद भी भंडारण का काम पूरा नहीं हो सका है। जिले के सभी वेयर हाउस गोदाम व अस्थाई ओपन कैप धान के भंडारण से भर चुके हैं। ऐसे में उपार्जित धान को रखने के लिए ओपन कैप के पास मौजूद खली जगह व मैदान पर ईटाें का चबूतरा तैयार कर धान का भंडारण किया जा रहा है। भंडारण स्थल पर बड़ी संख्या में समितियों से धान लेकर पहुंचे ट्रक चबूतरा के तैयार होने का इंतजार रहे हैं। ऐसा ही नजारा बुधवार को कारीरात ओपन कैप में दिखाई दिया। यहां पर 42 से ज्यादा चबूतरों का निर्माण ईटों से कराया जा चुका है। मौके पर मौजूद मप्र वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन तकनीकी विभाग जबलपुर के इंजीनियर राकेश कुमार वर्मा ने नईदुनिया को बताया कि ट्रक जैसे-जैसे धान लेकर पहुंचते जा रहे हैं, वैसे-वैसे चबूतरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। एक चबूतरे के ऊपर तिरपाल बिछाकर करीब 110 से 120 मीट्रिक टन (1100 से 1200 क्विंटल) धान का भंडारण किया जा रहा है।

कहां कितनी संख्या में बन रहे चबूतरे : जिले में 5 लाख क्विंटल से ज्यादा धान का भंडारण ईट के कच्चे चबूतरा में किया जा रहा है। इसके अलावा कंक्रीट से बने अस्थाई ओपन कैप में लाखों क्विंटल धान का भंडारण कराया जा चुका है। जानकारी के मुताबिक फिलहाल गरठिया ओपन कैप में 10 हजार मीट्रिक टन के 80 चबूतरे (स्टेक) तैयार किए जा चुके हैं। देवरी नरेला में 13 हजार मीट्रिक टन, नरेला-1 में 7 हजार मीट्रिक टन, कारीरात में 10 हजार मीट्रिक टन, लखनादौन के पिपरिया जोबा में 7 हजार मीट्रिक टन, केवलारी मंडी में 7 हजार मीट्रिक टन, पलारी मंडी में 7 हजार मीट्रिक टन, सिवनी मंडी में 25 हजार मीट्रिक टन क्षमता के चबूतराें का निर्माण मिट्टी की ईटों से कराया जा रहा है।

दो लेयर में जमा रहे ईट : जबलपुर मप्र वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के तकनीकी विभाग से लघु निविदा पर बालाघाट सहित अन्य जिलों की अनेक एजेंसियों को ईट के चबूतराें को तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पर कितनी राशि खर्च की जा रही है, इसकी जानकारी निर्माण करवा रहे सब इंजीनियर के पास भी नहीं है। मैदान में लेआउट देकर ईटों को दो लेयर में जमाया जा रहा है। ताकि भंडारित धान एक माह तक सुरक्षित रखा रहे। इंजीनियर वर्मा ने बताया कि करीब 1100 से 1200 क्विंटल के धान का भंडारण के लिए चबूतरे (स्टेक) को तैयार करने में 6 हजार से ज्यादा ईट का उपयोग किया जा रहा है।

इनका कहना है : साल 2019-20 में खराब हुए आठ लाख क्विंटल धान को नीलाम करने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। ईट के चबूतरों में भंडारित धान को एक माह में उठाने संबंधी योजना फिलहाल हमारे पास नहीं है। चबूतरों में भंडारित धान मिलिंग का कार्य प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले कराया जाएगा।

– विख्यात हिंडोलिया, जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम सिवनी

Related Articles

Back to top button