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मध्यप्रदेश

पहले बाटा कंबल, फिर पुलिस की लाठी के दम पर कर रहा भू-अर्जन, ग्रामीणों ने सड़क पर किया प्रदर्शन

सिंगरौली। जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लंगा डोल थाना क्षेत्र के गांव अमरई खोह में इन दिनों उत्खनन के लिए भू अर्जन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। जिसमें भू अर्जन की नीतियों का खुलासा किए बिना ही आदिवासी किसानों के भूमियों का नापी पैमाइश की जा रही है, जिसमें ग्रामीणों में आक्रोश की भावनाएं सड़कों पर प्रदर्शित हो रही हैं।
दरअसल सिंगरौली जिले के लंगा ढोल थाना क्षेत्र स्थित अमरोई खोह सहित 8 गांव आमडाड, अमराई खोह, बांसी बेरदह, बेलवार, घिरौली, झलारी, फाट पानी, सिर्सवाह को अदानी द्वारा कोल ब्लॉक के लिए अधिग्रहण किया जा रहा है। लेकिन अमरैल खोह के आदिवासी किसानों का आरोप है कि कंपनी द्वारा भू अधिग्रहण नियमों को ताक पर रखकर उनके जमीन की नाती की जा रही। उन्हें अभी तक जमीन के एवज में मुआवजा और मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी नहीं दी गई है। पूछने और विरोध करने पर संबंधित थाने के अधिकारियों द्वारा उन पर एफ आई आर दर्ज करा दिया जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी और जिला प्रशासन के अधिकारियों से कई बार भूमि अधिग्रहण नियम के तहत अधिग्रहित करने की अपील भी की गई। लेकिन इसके बावजूद भी जिला प्रशासन के अधिकारी और कंपनी के लोग एक भी बार उन्हें r&r पॉलिसी की जानकारी नहीं दी है। इसके बावजूद उनके घर और जमीन की नापी कर रहे हैं। इसी को लेकर ग्रामीण किसान आज सड़कों पर बैठकर दिन भर प्रदर्शन करते रहे।
किसानों का कहना है कि हमारे पास कृषि एवं महुआ फूल, तेंदूपत्ता के अलावा अन्य कोई संसाधन नहीं है। अगर कंपनी भूमि का अर्जुन करती है तो हमें स्थाई रूप से जीविकोपार्जन हेतु नौकरी पुनर्वास की व्यवस्था भूमि चिकित्सा स्वास्थ्य व शिक्षा की व्यवस्था मिलनी चाहिए। यहां तक कि पड़ोस के गांव में कंपनी द्वारा कोल उत्खनन का कार्य प्रारंभ ही कर दिया गया है, जिसमें ग्रामीणों को ना ही सही ढंग से मुआवजा मिल पाया है ना ही पुनर्वास की सुविधाएं। ऐसी परिस्थिति में हम लोग संशय में है कि कहीं कंपनी के ठगी का शिकार न हो जाएं।
हालांकि एसडीएम विकास सिंह का कहना है कि धारा 12 लगा दी गई है और अब नियमतः किसानों के जमीन और घर की नापी की जा सकती है। वहीं किसानों को जिला प्रशासन के मंशा को लेकर कई सवाल भी खड़े कर रहे हैं।

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