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मध्यप्रदेश

 प्रभारी प्रिंसिपल के भरोसे चल रहे कॉलेज

भोपाल । मप्र में सरकार उच्च शिक्षा को बेहतर बनाना चाहती है, लेकिन आलम यह है कि प्रदेश के अधिकांश कॉलेज प्रभारी प्रिंसिपल के भरोसे चल रहे हैं। यही नहीं कॉलेजों में प्रिंसिपल की कमी के साथ ही टीचिंग स्टाफ के पद भी बड़ी संख्या में खाली हैं। कॉलेजों में अतिथि विद्वानों से पीरियड लगवाए जा रहे हैं। लेकिन परमानेंट फैकल्टी न होने की वजह से विभिन्न प्रोजक्ट और ग्रांट मिलने में कॉलेजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदेश में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) लागू होने के बाद अब भी सरकारी कॉलेजों में टीचिंग स्टाफ के बड़ी संख्या में पद खाली हैं। हालात यह हैं कि 96 फीसदी यूजी और 84 फीसदी पीजी कॉलेजों में प्रिंसिपल नहीं हैं। यहां किसी सीनियर प्रोफेसर को प्रभारी बनाकर काम चलाया जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 20 साल से ज्यादा समय से प्रोफेसर्स के प्रमोशन नहीं हुए। इस कारण प्रिंसिपल के पद रिक्त होते गए।
प्रभारी प्रिंसिपल ऑफिशियल कामों में व्यस्त
जानकारी के अनुसार सरकारी पीजी कॉलेजों में प्रिंसिपल के 98 पद है। लेकिन इनमें से 83 पद खाली हैं। केवल 15 पर ही प्रिंसिपल हैं। शेष सभी जगह इंचार्ज प्रिंसिपल हैं। इसी तरह यूजी कॉलेजों में 418 में से 402 पद खाली हैं। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जो सीनियर प्रोफेसर इंचार्ज प्रिंसिपल बना दिए जाते हैं वे ऑफिशियल कामों में व्यस्त रहते हैं और क्लास नहीं ले पाते। इस वजह से इंचार्ज प्रिंसिपल बनते ही एक प्रोफेसर जरूर कम हो जाता है। इसी के साथ कॉलेजों में अब भी तीन हजार प्रोफेसर की कमी है। दो साल पहले असिस्टेंट प्रोफेसर के पद भरे गए थे। लेकिन अब भी ढाई हजार से ज्यादा पद रिक्त हैं जबकि प्रोफेसर के 670 पद खाली हैं।
योग के शिक्षक नहीं
शिक्षकों की कमी से छात्रों को सबसे ज्यादा समस्या योग में हो रही है। योग को फाउंडेशन कोर्स का हिस्सा बनाया गया है। इसके तहत 4.96 लाख छात्रों को योग पढ़ रहे हैं। योग एवं ध्यान को पढ़ाने वाले शिक्षक ही कॉलेजों में उपलब्ध नहीं हैं। प्रेक्टिकल नॉलेज के लिए छात्रों के सामने यह समस्या खड़ी है कि इसे पढ़ाएगा कौन? इसके सामने आने के बाद स्पोट्र्स टीचर को यह जिम्मेदारी दी गई है। अधिकांश सरकारी कॉलेजों में विशेषज्ञ शिक्षक नहीं हैं।
सरकारी कॉलेजों की स्थिति
प्रदेश में पीजी प्रिंसिपल के 98 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 15 पद भरे हुए हैं जबकि 83 पद खाली हैं। इसी तरह यूजी प्रिंसिपल के 418 पदों में से 402 पद खाली हैं। प्रोफेसर के 850 पदों में से 670 पद खाली हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर के 9062 पद में से 2562 पद खाली हैं। लायब्रेरियन के 487 में 200 पद खाली हैं। स्पोट्र्स आफिसर के 447 पदाों में से 196 और रजिस्ट्रार के 45 में से 42 पद खाली हैं।

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