ब्रेकिंग
दिव्यांग विवाह समारोह में व्हील चेयर पर दुल्हन, दूल्हे के साथ लिए फेरे…भावुक हुए लोग पिथौरागढ़ में लैंडस्लाइड से बंद हुई सुरंग… अंदर फंस गए 19 मजदूर, अब तक 8 को बचाया केंद्र सरकार राज्य के सभी 60,000 करोड़ रुपये के फंड जारी करे : भगवंत मान ने प्रधानमंत्री से की अपील बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 14936 लोगों को सुरक्षित निकाला गया : हरदीप सिंह मुंडियां पीएम मोदी ने किया हैदराबाद लिबरेशन डे का जिक्र, बताए निजाम और रजाकरों के अत्याचार महाराष्ट्र मराठा आरक्षण: कल से पानी भी छोड़ देंगे मनोज जरांगे पाटिल, समर्थकों से बोले- किसी से रेनको... दिल्ली: ‘साबुन, ऑल आउट, स्प्रे…’ फैक्ट्री में बन रहे थे नकली प्रोडक्ट, इन्हें मिला था सप्लाई का जिम्... लखनऊ: धमाके से आधा मकान तबाह, हर तरफ धुआं और लपटें…जिंदा जल गया फैक्ट्री मालिक आलम का परिवार; बेहटा ... दो ब्रेन सर्जरी के बाद भी सद्गुरु ने बाइक से पूरी की कैलाश यात्रा, 18 हजार फीट ऊंचाई तक गए, बताई योग... ओडिशा में 1,396 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी ने पोर्श, बीएमडब्ल्यू और आभूषण जब्त किए
मध्यप्रदेश

मानसिक बीमार युवती को शेल्टर होम में शिफ्ट करने से पुलिस का इन्कार

पुलिस ने कहा – हमारे पास कोई व्यवस्था नहीं…..

कलेक्टर, संबंधित डीसीपी और उप संचालक, सामाजिक न्याय भोपाल दो सप्ताह में दें जवाब

भोपाल   शहर में शारीरिक व मानसिक रूप से बीमार, नाबालिग और महिलाओं को रखने के लिये कोई शेल्टर होम नहीं है। ऐसे में इनके साथ कभी भी कोई भी हादसा हो सकता है। इस बात को लेकर समाजसेवियों की चिंता बढ़ रही है। दरअसल, भोपाल शहर के छोला थानाक्षेत्र में बीते रविवार को मानसिक व शारीरिक रूप से बीमार एक युवती घूमती हुई मिली थी। लोगों ने छोला थानाक्षेत्र पुलिस से संपर्क किया, तो उन्होंने युवती को शेल्टर होम में शिफ्ट कराने से मना कर दिया। उनका कहना था कि उनके यहां पहले से एक मानसिक विक्षिप्त महिला है। फिलहाल युवती को हमीदिया अस्पताल में भेजा गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। इस मामले में शहर के एक प्रबुद्ध नागरिक ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की है। उन्होंने बताया कि वे बीते रविवार को छोला थाना रोड से गुजर रहे थे, इस दौरान वहां कुछ लोग मानसिक व शारीरिक दिव्यांग एक युवती को छेड़ रहे थे। उन्होंने युवती से बातचीत करने की कोशिश की, तो उसकी भाषा समझ में नहीं आई। मामले में छोला पुलिस थाना प्रभारी से मदद चाही गई, तो उनका कहना था कि वह रोज ही इसी तरह घूमती है। इसे कहां रखवाएं, पता नहीं ? युवती को लेकर जब वे महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन संचालित गौरवी (सखी केन्द्र) वन स्टाॅप क्राइसिस सेंटर गए, तो उन्होंने भी इस युवती को सेंटर में रखने में असमर्थता जता दी।
मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय सदस्य श्री सरबजीत सिंह ने कलेक्टर, संबंधित क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) तथा उप संचालक, सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग, जिला भोपाल से दो सप्ताह में तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है। प्रतिवेदन में आयोग ने यह जानकारी भी चाही है कि क्या मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को रखने की व्यवस्था भोपाल में उपलब्ध है ? यदि हां, तो फिर समाचार में प्रकाशित मामले में मानसिक व शारीरिक रूप से बीमार युवती के पुर्नवास की व्यवस्था क्यों नहीं हो पाई ?

Related Articles

Back to top button