इन 5 वजहो से कॉग्रेस पार्टी में शामिल नही हुए प्रशांत किशोर 

प्रशांत किशोर को कौन नही जानता। देश की लगभग सभी बड़ी राजनैतिक पॉर्टियों के साथ काम कर चुके प्रशांत किशार की पहचान एक चुनावी रणनीतिकार के रूप में है। पिछले कुछ दिनो से देश भर के राजनीतिक गलियारो में ये चर्चा हो रही है कि प्रशांत किशोर चुनाव के मैदान में लगातार परास्त हो रही कॉग्रेस पार्टी को दोबारा से जीत के रास्ते पर ले जाने के लिए देश की इस सबसे पुरानी पार्टी के साथ जुड़ने वाले है। ऐसा माना जा रहा था कि प्रशांत किशोर की कॉग्रेस पार्टी के साथ डील एकदम पक्की हो गई है। लेकिन प्रशांत किशोर और कॉग्रेस पार्टी के बीच हुई लगातार मीटिंग्स के बाद जो खबर सामने आ रही है उसके अनुसार प्रशांत किशोर ने कॉग्रेस पार्टी में शामिल होने से इन्कार कर दिया है।प्रशांत किशोर ने एक ट्वीट के माध्यम से ये कन्फर्म कर दिया है कि वो भविष्य में कॉग्रेस पार्टी के साथ काम नही करने वाले है। ऐसा माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर ने कॉगेस पार्टी को रिवाइव करने के लिए पार्टी के नेताओ को जो रोडमैप दिया था, उसको लेकर उनमे और पार्टी के नेताओ के बीच सहमति नही है। इस लेख में हम आपको वो 5 वजहो बताने वाले है जो प्रशांत और कॉग्रेस पार्टी के बीच होने वाले इस गठबंधन के रास्ते का रोड़ा बन गई।
1. पार्टी के फैसलो के ऊपर फुल कट्रोल चाहते थे प्रशांत किशोर
कॉग्रेस पार्टी को कैसे दोबारा से जिन्दा करना है इसको लेकर प्रशात किशोर ने एक पूरा खाका तैयार किया है। वो पार्टी के अंदर एक बहुत बडा बदलाव करना चाहते थे। इसके इसके वो ये भी चाहते है कि वो पार्टी की चुनावी रणनीति को पूरी तरह से कट्रोल करे। प्रशांत किशोर ने कॉग्रेस पार्टी को ये सुझाव भी दिया था कि पार्टी का अध्यक्ष चेंज करे। इसके साथ उन्होने अपनी राय रखते हुए ये भी कहा था कि पार्टी अध्यक्ष और पार्टी का पीएम उम्मीदवार, दोनो अलग अलग हो। वो चाहते है कि पार्टी को अपने हिसाब से बदलने के लिए उन्हे फ्री हैंड दिया जाये। लेकिन पार्टी के कई बडे नेताओ ने उन्हे ये सब करने से साफ इन्कार कर दिया। वो नही चाहते थे कि वो प्रशांत किशोर के फैसलो के अनुसार काम करे ।
2.गठबन्धन से बाहर हो कॉग्रेस पार्टी
अपने सबसे बुरे समय से गुजर रही कॉग्रेस पार्टी कई राज्यो में दूसरी पार्टियो के साथ गठबन्धन करके चुनाव लड़ चुकी है। लेकिन प्रशांत किशोर ने कॉग्रेस पार्टी के सामने ये शर्त रख दी थी कि वो बिहार, जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र में अपने पुराने गठबन्धन के साथियों को छोड़ने की सलाह दे। प्रशांत किशोर ये चाहते थे कि कॉग्रेस पार्टी एकदम नये सिरे से अपनी चुनावी रणनीति बनाये। लेकिन इस सलाह को कॉग्रेस पार्टी के बड़े नेताओ ने मानने से इन्कार कर दिया।
3. प्रियका गांधी बने कॉग्रेस की अध्यक्ष
प्रशांत किशोर चाहते थे कि कॉग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद को प्रियंका गांधी के हवाले कर दिया जाये। ये पद पिछले कई दिनों खाली है और सोनिया गांधी कॉग्रेस पार्टी की कार्यवाहक अध्यक्ष है। प्रशांत किशोर चाहते थे कि कॉग्रेस पार्टी बहुत जल्द इस बात की घोषणा करे कि प्रियंका गाधी को पार्टी का आधिकारिक अध्यक्ष बना दिया गया है। लेकिन प्रशांत किशोर की इस सलाह को भी पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया।
4.370 लोकसभा सीटो पर फोकस
प्रशांत किशोर ने कॉग्रेस पार्टी के अंदर जान डालने के लिए एक बेहतरीन खाका तैयार किया था। उन्होने कॉग्रेस पार्टी के नेताओ के सामने अपनी बात रखते हुए कहा था कि पाटी को लगभग 370 लोकसभा सीटों पर फोकस करते हुए अपनी चुनावी रणनीति बनानी होगी। उन्होने कॉग्रेस पार्टी के नेताओ से ये भी कहा था कि उन्हे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडू में गठबन्धन के साथ चुनाव के मैदान में उतरना होगा। लेकिन प्रशांत किशोर की ये सलाह कॉग्रेस पार्टी को बिल्कुल भी पसन्द नही आई और उन्होने प्रशांत किशोर के इस आइडिये को सिरे से नकार दिया।
इशात जैदी एक लेखक है। इन्होने पत्रकारिता की पढाई की है। इशात जैदी पिछले कई सालों से पत्रकारिता कर रहे है। पत्रकारिता के अलावा इनकी साहित्य में भी गहरी रूचि है।






