ब्रेकिंग
धार्मिक यात्रा का दुखद अंत: भोपाल के पास खूनी संघर्ष, ट्रैक्टर से टकराई पिकअप; 5 श्रद्धालुओं ने मौके... सड़क पर शव रख किन्नरों का बवाल: सागर में मर्डर या सुसाइड? जबरन गोमांस खिलाने के आरोपों ने बढ़ाई पुलि... केरल में खेल जगत को लगा सदमा: SAI हॉस्टल में मिली दो महिला खिलाड़ियों की लाश, सुसाइड या साजिश? जांच ... संवैधानिक संकट या सियासी साज़िश? रांची में ED बनाम पुलिस; बाबूलाल मरांडी बोले— 'नहीं सहेंगे बंगाल जै... नोएडा-ग्रेटर नोएडा के 'लापता' वोटर्स पर एक्शन: 1.76 लाख लोगों को नोटिस भेजेगा प्रशासन, पेशी के बाद ह... BMC इलेक्शन 2026: मतदान केंद्र पर फिल्मी सितारों की कतार, सुनील शेट्टी के 'खास मैसेज' ने युवाओं में ... काव्या मारन का मास्टरस्ट्रोक: जिस खिलाड़ी पर लगाया दांव, उसने पहले ही मैच में टीम को बना दिया चैंपिय... ईरान का ट्रंप को खौफनाक अल्टीमेटम: सरकारी टीवी पर जारी किया 'डेथ वारंट', लिखा— इस बार गोली सीधे पार ... RBI का बड़ा मास्टरस्ट्रोक: भारतीय बैंकिंग को मिलेगी नई ऊर्जा, युवाओं के लिए खुलेंगे करियर के हजारों ... Google Gemini हुआ पहले से ज्यादा ‘स्मार्ट’, ऐप में जुड़ा Personal Intelligence फीचर
मध्यप्रदेश

जया किशोरी बोलीं, लड़का सुधरा हो तो ही विवाह करें, बेटी का जीवन न बिगाड़ें

 नागदा ।   जब कोई माता-पिता अपने बेटा-बेटी का विवाह करते हैं तो वह देखते हैं कि उनकी पुत्री समझदार हो गई है तो उसका विवाह कर देना चाहिए। जब उनका ही कोई पुत्र अपने मार्ग से भटक गया हो या गैर जिम्मेदार हो तो वही माता-पिता की सोच होती है कि इसका विवाह करवा देना चाहिए। यह बात हिंदू सनातन जागृति मंच के तत्वावधान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन जया किशोरी ने कही। उन्होंने कथा में श्रीकृष्ण जन्म के पश्चात, बाल लीला व प्रसंगों की कथा के बाद कंस वध एवं रासलीला, गोपी लीला, उद्धव संवाद एवं श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का वृत्तांत सुनाया।

विवाह हमेशा सोच-समझकर करना चाहिए

जया किशोरी ने बताया कि अगर लड़का नहीं सुधरा तो आप कन्या का भी जीवन खराब कर देंगे। जब तक युवक एवं युवती दोनों ही समझदार नहीं हो तो उन्हें परस्पर विवाह नहीं करना चाहिए, क्योंकि विवाह एक दिन का बंधन नहीं, अपितु जीवन के 30 से 40 वर्ष किसी व्यक्ति विशेष के साथ निर्वाह करना है। इसलिए विवाह हमेशा सोच समझकर ही करना चाहिए। अगर आपका जीवनसाथी समझदार होगा तो आप कभी अकेला महसूस नहीं करोगे। कथा के अंत में महाआरती का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं व पुरुष उपस्थित थे।

Related Articles

Back to top button