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मध्यप्रदेश

 अवैध खनन से छलनी हो रही नर्मदा

नर्मदा की छाती को चीर कर निकाली जा रही है रेत

भोपाल । राज्य शासन के सख्त आदेश के बाद भी रेत का अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहा है। रेत माफिया नर्मदा तटों को छलनी कर रहे हैं। ठोस कार्रवाई नहीं होने से लगातार मशीनों से यह अवैध कारोबार हो रहा है। प्रदेश के 16 जिलों को छूकर निकलने वाली नर्मदा नदी में अवैध उत्खनन की भयावहता की कहानी 4 जिले के आंकड़े ही कह देते हैं। खनिज साधन विभाग ने सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम और देवास जिले में 10 माह के दौरान अवैध उत्खनन और परिवहन के 588 प्रकरण दर्ज कर 5 करोड़ 63 लाख से अधिक राजस्व और जुर्माने की वसूली की। पोकलेन मशीनें, डंपर और बड़ी संख्या में ट्रक-ट्रेक्टर ट्रालियां भी जब्त कीं।
मप्र की लाइफ लाइन नर्मदा नदी को सरकार ने 6 साल पहले जीवित इकाई (लाइव एंटिटी) भी घोषित कर दिया लेकिन अवैध उत्खनन और प्रदूषण पर अंकुश नहीं लग पाया। नदी का संरक्षण संबंधी सभी प्रयास बौने साबित हुए। आयकर विभाग की छापामारी के दौरान अवैध रेत खनन और परिवहन का जो खुलासा हुआ उसमें इस पवित्र नदी की बदहाली बेहद चिंताजनक है। आयकर विभाग ने विभाग के मुख्यालय से जो दस्तावेज बरामद किए हैं उनसे पता चलता है कि विभाग ने नर्मदा सहित अन्य नदियों से अवैध उत्खनन और परिवहन को रेगुलर करने में करीब 3,200 करोड़ रुपए का राजस्व वसूला। इससे स्पष्ट होता है कि नदी को बड़ी-बड़ी मशीनों के जरिए लगातार छलनी किया जा रहा है जिससे उसका ईको सिस्टम ही गड़बड़ा गया है। नर्मदा नदी में हो रहे अवैध उत्खनन और परिवहन का मुद्दा मप्र विधानसभा के बजट सत्र में भी उठ चुका है।

लगातार बढ़ रहा प्रदूषण
प्रदेश में नर्मदा अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला, जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, सीहोर, रायसेन, हरदा, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी, खरगोन, झाबुआ एवं आलीराजपुर जिले को छूकर निकलती है। नर्मदा की छोटी-बड़ी कुल 41 सहायक नदियां हैं, जिनमें से 19 नदियां ऐसी हैं जो बड़ी भी हैं जिनकी लंबाई 54 किलोमीटर से अधिक है। ये सहायक नदियां ही सतपुड़ा, विन्ध्य और मैकल पर्वतों से बूंद-बूंद पानी लाकर नर्मदा को सदानीरा बनाती हैं। समय के साथ इनमें से कई नदियां अब सूखने के कगार पर हैं या फिर शहरों के आसपास नालों में तब्दील हो रही हैं। दूसरी तरफ प्रदेश के 4 दर्जन से अधिक स्थानों पर नर्मदा जल की गुणवत्ता परीक्षण की जो सैंपलिंग हो रही है उसमें भी प्रदूषण का स्तर कम होता नजर नहीं आ रहा। जीवित इकाई घोषित करते समय कहा गया था कि नर्मदा मइया के भी अधिकार होंगे उसे नुकसान पहुंचाने वाले को दंडित किया जाएगा। लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ सामने नहीं आया। उद्गम स्थल नर्मदा कुंड, कोटी तीर्थ घाट, रामघाट, पुष्कर डैम, कपिल संगम और कपिलधारा में नर्मदा जल में कॉलीफार्म बैक्टीरिया की अधिकता पाई गई है।

नदी का ईको सिस्टम प्रभावित
मप्र में नर्मदा अपने उद्गम स्थल अमरकंटक से आलीराजपुर के सोंडवा तक करीब 1,100 किलोमीटर का सफर तय करती है। इस बहाव के रास्ते में 16 जिलों की सीमा लगती है। हाल ही में सरकार ने 10 महीने के दौरान चार जिलों में हुए उत्खनन का ब्यौरा निकाला तो आंकड़े चौंकाने वाले सामने आए। अकेले सीहोर और देवास जिले में ही अवैध उत्खनन और परिवहन के 464 मामले दर्ज किए गए हैं। प्रदूषण और अवैध खनन के चलते नदी का ईको सिस्टम प्रभावित हो रहा है। कई जलचर गायब हो गए हैं। पर्यावरणविदों ने पिछले दिनों अपने सर्वे में पाया कि नर्मदापुरम, हरदा और खंडवा क्षेत्र में नदी से इंडियन टेंट प्रजाति के कछुए गायब हो गए हैं। ये कछुए नदी स्वच्छता कर्मी हैं जो कि काई और शैवाल आदि खाकर जीवित रहते हैं और पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं। नर्मदा में पाई जाने वाली मछलियों की कई प्रजाति भी कम हो गई हैं।

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