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मध्यप्रदेश

अधिकारी को पता नहीं चला अकाउंट आफीसर लेती रही दो साल तक दो गुना वेतन

जबलपुर ।   किसी के बैंक खाते में हजार रुपये भी अप्रत्याशित रूप से आ जाएं तो उसके मन में उथल-पुथल शुरू हो जाती है। लेकिन, एक अकाउंट आफीसर के खाते में लगातार दो साल तक दो गुना वेतन जमा होता रहा और उसको पता नहीं चला। इतना ही नहीं उसके अधिकारियों को भी इसका अंदाजा नहीं हो पाया। इस मामले में 40 लाख के आस-पास गड़बड़ी होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत सिहोरा की मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना) शाखा में विक्रम साहू संविदा आधार पर लेखाधिकारी के पद पर कार्यरत है। इसके खाते में दो साल तक दो गुना वेतन जमा हुआ। इसके अलावा भी इसके खाते में कुछ संदिग्ध लेन-देन हुआ। एक अनुमान के अनुसार करीब 40 लाख की गड़बड़ी की गई है। इसे लेकर जिला स्तर से जांच की जा रही है।

पांच लाख जमा कराए

फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद संबंधित अकाउंट आफीसर ने खुद को इस गड़बड़ी से अनभिज्ञ बताया, जबकि मनरेगा के मद से जारी की जाने वाली राशि का बिल इसे ही मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत की ओर अग्रेषित करना होता था। विक्रम साहू से पांच लाख रुपये शासन के खाते में वापस जमा कराए जा चुके हैं।

जनपद प्रशासन की भूमिका संदिग्ध

इस मामले में जनपद पंचायत सिहोरा की तत्कालीन सीईओ की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। क्योंकि सभी देयकों को उनके ही डिजीटल हस्ताक्षर से स्वीकृति दी जाती थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उनके सामने दो साल तक बिल प्रस्तुत किए जाते रहे और वो डिजिटली हस्ताक्षरित करके उनको आगे बढ़ाती रहीं।

कुछ खास नहीं हुआ था – सीइओ

इस मामले में सिहोरा की तत्कालीन जनपद सीईओ आशा पटले का कहना है कि मामला कुछ खास नहीं रहा। एओ से जो थोड़ा-मोड़ा आगे पीछे हुआ था, उसे उसकी वक्त उससे जमा भी करा लिया गया था। इससे आगे मुझे कुछ भी जानकारी नहीं है, जो भी कुछ जानकारी है वो जिला पंचायत के पास है।

जिला पंचायत की एओ को नोटिस

सूत्रों का कहना है मामला गंभीर प्रवृत्ति का होने के बावजूद इसे परदे में रखा जा रहा है। जिला पंचायत कार्यालय में पदस्थ मनरेगा की अकाउंट आफीसर आरती वानखेड़ को भी इसे लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनसे पूछा गया है कि दो साल तक उनके अधीनस्थ द्वारा गड़बड़ी की जाती रही और उनको जानकारी नहीं लग पाई?

हाे सकती है सेवा समाप्त

भ्रष्टाचार के इस मामले में जिला पंचायत प्रशासन की ओर से आंतरिक तौर पर कार्रवाई की जा रही है। जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में संविदा समाप्त किए जाने का प्रावधान है। इसलिए संभव है कि आने वाले दिनों उसे गुपचुप विदा कर दिया जाए। इस मामले में भले ही संबंधित एओ से कुछ राशि जमा करा ली गई है, लेकिन यह मामला षड़यंत्रपूर्वक गबन किए जाने जाने का है, इसलिए इसमें एफआइआर करा इस बात का पता लगाए जाने की भी जरूरत है कि इसमें और कौन-कौन शामिल हैं।

इनका कहना 

सिहोरा जनपद में मनरेगा की राशि नियम-विरुद्ध तरीके से एओ द्वारा अपने खाते में जमा कराने का पता चला था। उससे कुछ रिकवरी भी की जा चुकी है। मामले की जांच चल रही है, जो तथ्य सामने आएंगे- उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

-मनोज सिंह, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत

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