सुधार के नाम पर बदली डीपीआर तो बन गई खामियों की इमारत
ग्वालियर। चौतरफा बदनामी झेल रहे हजार बिस्तर अस्पताल की डीपीआर(डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में सुधार के नाम पर कई अहम बदलाव किए गए। यही बदलाव आज परेशानी का कारण बन रहे हैं, क्योंकि सुधार क्या हुआ यह तो किसी को नहीं पता, लेकिन अस्पताल की डीपीआर में हुए बदलाव परेशानी का सबब बन रहे हैं। हर दिन उजागर हो रहीं खामियां हजार बिस्तर अस्पताल की बदनामी का कारण बन रही हैं। डीपीआर में हुए बदलाव के क्या कारण रहे और जब बदलाव हुआ तो उसमें जेएएच व जीआर मेडिकल कालेज प्रबंधन की राय क्यों नहीं ली गई, यह सवाल खड़े हो रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर पूर्व डीन का कहना है कि डीपीआर में पहले जेएएच व हजार बिस्तर अस्पताल को लिंक करने का प्राविधान था और मुख्य द्वार भी जेएएच की ओर बनाया जाना था, लेकिन यह सब कब बदला गया किसी को पता नहीं चला। हालात यह हैं कि 400 करोड़ के अस्पताल में अंडरग्राउंड पार्किंग तक नहीं दी गई। इतनी खामियां उजागर होने के बाद भी शासन-प्रशासन मौन है।
2018 में हुआ था डीपीआर में सुधार
जीआर मेडिकल कालेज प्रबंधन का कहना है कि वर्ष 2018 में डीपीआर में सुधार के नाम पर डीन, अधीक्षक सभी को भोपाल बुलाया गया था। बैठक एसीएस राधेश्याम जुलानिया ने ली थी, जिसमें पीआइयू के अफसर भी शामिल हुए थे। डीपीआर में सुधार किया गया, लेकिन देखने में आया कि सुधार के नाम पर कई ऐसे परिवर्तन हुए जो आज परेशानी बन गए हैं। दोनों परिसर को एक करने या लिंक करने का विकल्प ही गायब हो गया। मुख्य गेट हाकी अकादमी के सामने कर दिया गया, अंडरग्राउंड पार्किंग नहीं दी गई।
इन खामियों के लिए कौन जिम्मेदार
-दोनों अस्पताल परिसर अलग-अलग किए, जिससे मरीज परेशान हो रहे हैं।
-जेएएच व हजार बिस्तर अस्पताल के परिसर एक या लिंक नहीं किया गया।
-मुख्य गेट जेएएच की ओर न बनाकर हाकी स्टेडियम के सामने बनाया गया।
-जनरल वार्ड में कूलर के लिए स्थान व बिजली के प्वाइंट नहीं लगाए गए।
-दीवारों में दरारें व सीलन आने लगी।
-पाइपलान फूटने लगी।
-सीवेज चोक की समस्या आ रही।
-सीढ़ियां और लिफ्ट पास-पास नहीं बनाए गए।
-अंडरग्राउंड पार्किंग नहीं बनाई। अस्पताल में वाहन पार्किंग के लिए जगह नहीं।
इनका कहना है
डीपीआर में हजार बिस्तर अस्पताल का मुख्यद्वार जेएएच की ओर बनाया जाना था, अंडरग्राउंड पार्किंग बनाए जाने का प्राविधान था, दोनों परिसर एक करने की बात याद नहीं है पर बाद में डीपीआर में सुधार के नाम पर यह बदल दिया गया। कूलर व एसी के प्वाइंट के के लिए पीआइयू के अफसरों को समय-समय पर बोला गया, लेकिन उनका जवाब था कि जो डीपीआर में होगा उसी के अनुसार बनेगा। डीपीआर की मांग की तो वह अस्पताल निर्माण के दौरान उपलब्ध नहीं कराई गई।
– डा़ देवेन्द्र कुशवाह, नोडल अधिकारी, योजना विकास शाखा जीआरएमसी






