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मध्यप्रदेश

चीता संरक्षण का प्रतीक बनी कूनो की मादा चीता ज्वाला

ग्वालियर। नामीबिया से लाकर श्योपुर (मप्र) के कूनो नेशनल पार्क में बसाई गई ज्वाला (नामीबियाई नाम – सियाया) दुनिया की पहली ऐसी मादा चीता बन गई है, जिसने दूसरे महाद्वीप पर बसने के बाद वंश वृद्धि की है। नामीबिया के चीता कंजर्वेशन फंड (सीसीएफ) ने ज्वाला को चीता संरक्षण के प्रतीक के रूप में मान्यता दी है और उसकी कांस्य प्रतिमा तैयार करवाई है। सीसीएफ की ओर से अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर यह प्रतिमा दुनियाभर में बिक्री के लिए प्रदर्शित की गई है। प्रतिमा का साइज 60 सेमी और वजन 21 किलोग्राम से ज्यादा है। इसकी शुरुआती कीमत 2577 डालर यानी दो लाख 11 हजार 210 रुपये है। सर्वाधिक बोली लगाने वाले को प्रतिमा दी जाएगी। सीसीएफ ने यह जानकारी भी दी है कि इसे इको फ्रेंडली सेल्स पार्टनर जवादी की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा। बोली लगाने के लिए अगले छह दिन का समय दिया गया है। बिड से प्राप्त होने वाली राशि चीतों के संरक्षण पर खर्च होगी। बता दें कि ज्वाला ने कूनो में चार शावकों को जन्म दिया था। इनमें तीन शावकों की मौत हो गई है, लेकिन भारत की धरती पर 70 साल बाद जन्मा एक शावक अब पूरी तरह स्वस्थ है।

दुनिया में फिर चर्चा में आया भारत का चीता प्रोजेक्ट

ज्वाला के चीता संरक्षण का प्रतीक बनने से फिर भारत का चीता प्रोजेक्ट दुनियाभर में चर्चा में है। भारत का चीता प्रोजेक्ट दुनिया में पहला ऐसा प्रयास है, जिसके तहत दूसरे महाद्वीप से लाकर चीतों को बसाया गया है। कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाकर 20 चीतों को बसाया गया। तीन शावकों सहित छह चीतों की मौत हुई तो प्रोजेक्ट के जोखिम को लेकर चिंता जताई गई थी, लेकिन सीसीएफ ने पिछले दिनों ही कूनो में चीता प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की है।

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