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मध्यप्रदेश

हाई कोर्ट बोला- सरकार मानीटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का पालन करे

जबलपुर। हाई कोर्ट ने भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों से जुड़े मामले में केंद्र सरकार के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है। इसके अंतर्गत मानीटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है। प्रशासनिक न्यायमूर्ति शील नागू व न्यायमूर्ति अमरनाथ केशरवानी की युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को निर्धारित की है। हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व निर्देश के परिपालन में मानीटरिंग कमेटी द्वारा त्रैमासिक रिपोर्ट पेश की गई। इसमें साफ किया गया कि केंद्र व राज्य शासन द्वारा कमेटी की अनुशंसाओं का ईमानदारी से पालन नहीं किया जा रहा है। हाई कोर्ट ने रिपोर्ट को रिकार्ड पर लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दे दिए।

मानीटरिंग कमेटी गठित करने की भी व्यवस्था

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर की गई जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीडि़तों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मानीटरिंग कमेटी गठित करने की भी व्यवस्था दी गई थी। मानीटरिंग कमेटी को प्रत्येक तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट के समक्ष पेश करने व रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट द्वारा केन्द्र व राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का नियम निर्धारित किया गया था। जिसके बाद से उक्त याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई जारी है।

कमेटी की अनुशंसाओं का परिपालन न करने पर अवमानना याचिका भी

इस जनहित याचिका के विचाराधीन रहने के दौरान मानीटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का परिपालन न किए जाने के विरुद्ध अवमानना याचिका भी दायर की गई थी। जिसमें कहा गया था कि गैस त्रासदी के पीड़ितों के हेल्थ कार्ड तक नहीं बने है। अस्पतालों में अवश्यकता अनुसार उपकरण व दवाएं उपलब्ध नहीं है। बीएमएचआरसी के भर्ती नियम का समुचित निर्धारण न होने के कारण डाक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ स्थाई तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान नहीं कर रहे हैं।

कमेटी की अनुशंसाओं का पालन न करना आश्चर्यजनक

मामले की सुनवाई दौरान मानीटरिंग कमेटी की ओर से अवगत कराया गया कि अब तक पीड़ितों के डिजिटल कार्ड नहीं बने है। बीएचएमआरसी में डाक्टर व मेडिकल स्टााफ की कमी बरकरार है। प्रर्याप्त जांच, उपकरण व दवाईयाें का अभाव चिंताजनक है। इस वजह से गैस त्रासदी पीड़ितों को उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है। मानीटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का पालन न किया जाना आश्चर्यजनक है।

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