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मध्यप्रदेश

गबन के मामले में 12 साल बाद सरपंच-सचिव को 5-5 साल का कारावास

सिवनी। भ्रष्टाचार के मामले में सरपंच और सचिव के 12 साल बाद जेल की सजा हुई है। सिवनी की जिला अदालत के विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने ग्राम पंचायत हथनापुर के निर्माण कार्यो में दो लाख रुपये से अधिक राशि गबन के मामले में दोषी तत्कालीन सरपंच चंद्रकांत सनोड़िया, सचिव अजय पाठक को 5-5 साल कारावास की सजा से दंडित किया है।

2011 में पेश किया गया था परिवाद

प्रकरण में 7 अप्रैल 2011 को गांव के प्रताम सिंह सनोड़िया ने विशेष न्यायालय में विभिन्न कार्यो में शासकीय राशि का गबन करने का परिवाद पेश किया था। इस पर संज्ञान लेकर न्यायालय के आदेश पर सरपंच-सचिव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) डी, 13(2) व भादंवि की धारा 409, 120 बी में प्रकरण दर्ज किया गया था। 2 अगस्त को दिए गए फैसले में दोषियों पर 20-20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।

शासकीय कार्यों में पद का दुरुपयोग कर गबन का आरोप

अभियोजन कार्यालय के मीडिया सेल प्रभारी प्रदीप कुमार भौरे ने बताया कि 12 साल पहले प्रस्तुत परिवाद में ग्राम पंचायत हथनापुर के तत्कालीन सरपंच चंद्रकांत पुत्र रामकुमार सनोड़िया (30), अजय पुत्र स्व. भगवत प्रसाद पाठक पर प्रार्थी ने शासकीय कार्यो में पद का दुरुपयोग कर गबन करने के आरोप लगाए थे। न्यायालय के आदेश पर कराई गई जांच में विभिन्न शासकीय योजनाओं में अनियमिता व षड्यंत्रपूर्वक पद का दुरुपयोग कर शासकीय राशि का गबन करना पाया गया। प्रथम दृष्ट्या 211985 रुपये का दुरुपयोग कर शासन को आर्थिक क्षति पहुचाई गई थी। इस पर प्रकरण प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश खालीद मोहतरम अहमद के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

न्यायालय ने दिया यह तर्क

शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक नवलकिशोर सिंह ने गवाहों व सबूतों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। तर्क दिया कि आरोपितों ने शासकीय राशि का गबन किया गया है इससे समाज में भ्रष्टाचार जैसे बुराई को बढ़ावा मिलेगा। आरोपिताें को अधिक से अधिक दंड से दंडित करने की प्रार्थना की गई। न्यायालय ने सबूतों, गवाहों व तर्कों से सहमत होकर भ्रष्टाचार के दोषी तत्कालीन सरपंच चंद्रकांत सनोडिया, सचिव अजय पाठक को धारा 120 बी भादंवि में पांच साल सश्रम कारावास, 10 हजार रुपये का जुर्माना, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी), 13(2) में पांच साल सश्रम कारावास, 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

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