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मध्यप्रदेश

ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में नवाचार करने वालों को केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने किया सम्मानित

इंदौर। इंदौर में आयोजित 26वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कांफ्रेंस के दूसरे दिन देश भर के अलग-अलग शहरों में ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में नवाचार करने वालों को सम्मानित किया गया। केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री जितेन्द्र सिंह ई-गवर्नेंस क्षेत्र में बेहतर करने वाले 48 लोगों व संस्थानों को पुरस्कृत किया।

केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयाेजित ई-गवर्नेंस कांफ्रेंस में भोपाल स्मार्ट सिटी से स्काडा सिस्टम को रजत पुरस्कार प्राप्त हुआ। सम्मानित होने वालों में मोर रायपुर की टीम, फ़िरोज़ाबाद उत्तर प्रदेश के कोल्ड स्टोरेज, झारखंड की सिंहभूमि, रायपुर के क्रॉप डॉक्टर एप तैयार करने वाली एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी सहित कई संस्थान व लोग शामिल रहे।
आयोजन में मध्य प्रदेश से भोपाल स्मार्ट सिटी व प्रदेश के नगरीय नियोजन व विकास विभाग के सचिव राजीव रंजन सिन्हा व भोपाल स्मार्ट सिटी कंपनी के एक्जिक्युटिव इंजीनियर आशीष श्रीवास्तव को उनके द्वारा ई-गर्वनेंस के लिए किए गए कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा एक साल पहले तैयार किए नेशनल आटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एनएएफआइएस) को केंद्र सरकार द्वारा गोल्ड श्रेणी में पुरस्कृत किया गया।

जितने ज्यादा डिजिटल एप्लीकेशन होंगे उतना ज्यादा बढ़ेगा आधार का उपयोग

इस कांफ्रेंस के पहले दिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के पूर्व सीईओ राम सेवक शर्मा ने बताया कि आधार एक डिजिटल पहचान है, यह बिना किसी योग्यता के आपकी पहचान को बताता है। जितने ज्यादा डिजिटल एप्लीकेशन विकसित होंगे और उतना ज्यादा ज्यादा आधार का उपयोग होगा। आधार एक नंबर है यह कोई कार्ड नहीं है। कई लोग कहते है कि आधार से जालसाजी हो गई। आधार के पत्र पर स्पष्ट लिखा है। आधार एक पहचान पत्र है यह किसी की नागरिकता नहीं। आपको अपनी पहचान आनलाइल प्रमाणिकरण के माध्यम से देना होगी।

उन्होंने बताया कि दुर्भाग्य से आधार की ज्यादा बदनामी की गई। जनता को दिए जाने वाले राशन वाले सिस्टम में जब आधार लागू हुआ तो जितने फर्जी राशन कार्ड थे वो खत्म हो गए। इसके कारण पोर्टेब्लिटी का फायदा मिला और किसी बिहार का आदमी दिल्ली में रहकर भी अपने आधार के माध्यम से राशन प्राप्त कर सकता है। जो लोग गोल्ड लोन देते है उन्हें आधार को लागू करना चाहिए। इससे चोरी का सोना बेचने वालों पर रोक लगेगी।

पासपोर्ट बनाने के लिए अलग बायोमेट्रिक लिया जाता है जबकि आधार के माध्यम से व्यक्ति का पहचान प्रमाणीकरण किया जाना चाहिए। आयुष्मान भारत के डिजिटल मिशन को डेढ़ से दो साल हुआ है। यह धीरे-धीरे बढ़ यह है जल्द ही बेहतर होगा। इसकी खामियों का भी सुधार होगा।

तकनीक के कारण इन बदलावों से हुई सहूलियत

-आईआईटी मद्रास व आईआईटी बाम्बे द्वारा भाषिणी प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के माध्यम से ऐसा साफ्टवेयर तैयार किया है जिसका अलग-अलग भाषाओं यहां तक क्षेत्रीय भाषाओं को बोलने वाले लोग भी इस्तेमाल कर सकते है। ऐसे में किसी भाषा के अनुवाद की समस्या खत्म हो जाएगी।

– यदि आपका पेन कार्ड आधार से लिंक है तो आप ई-हस्ताक्षर के माध्यम से आप खुद ही अपना रिटर्न जमा कर सकते हैं। ऐसे में आपके रिटर्न के दस्तावेज बेंगलुरु भेजे जाने की भी जरुर नहीं होगी। यह ई- हस्ताक्षर की शक्ति है।

– 6 बिलियन दस्तावेज डिजिटल लाकर में जमा है, ऐसे में लोगों को अपन अपने पास कागज के दस्तावेज रखने की जरुरत नहीं।

– डिजिटल क्रांति के कारण ही पकौड़े का ठेला लगाने वाले को यदि 2 हजार रुपये का लोन चाहिए तो उसे भी आसानी से लोन के रुप में यह राशि मिल रही है।

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