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मध्यप्रदेश

मध्‍य प्रदेश में फिर शुरू हो सकता है बारिश का सिलसिला, इन चार संभागों में तेज बौछारों की संभावना

भोपाल। झारखंड के पास कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। मानसून द्रोणिका भी मध्य प्रदेश से होकर गुजर रही है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इन दो मौसम प्रणालियों के असर से शुक्रवार से पूरे प्रदेश में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

इस दौरान शहडोल, जबलपुर, नर्मदापुरम, इंदौर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा भी हो सकती है। उधर, गुरुवार को सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक नर्मदापुरम में 54, बैतूल में 37, शिवपुरी एवं भोपाल में 17, सिवनी में चार, पचमढ़ी में दो, मलाजखंड में एक मिलीमीटर वर्षा हुई।

मौसम विज्ञान केंद्र के मौसम विज्ञानी एसएन साहू ने बताया कि उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी एवं उससे लगे ओडिशा के तट पर बना कम दबाव का क्षेत्र अब दक्षिण-पूर्वी झारखंड के पास पहुंच गया है।

मानसून द्रोणिका जैसलमेर, उदयपुर, टीकमगढ़, सीधी, रांची, दीघा से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि झारखंड के पास बना कम दबाव का क्षेत्र बिहार की तरफ बढ़ रहा है। मानसून द्रोणिका भी मप्र से होकर गुजर रही है।

वातावरण में नमी आने के कारण मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां फिर बढ़ने लगी हैं। शुक्रवार को जबलपुर, नर्मदापुरम, शहडोल, इंदौर संभाग के जिलों में अनेक स्थानों पर वर्षा होगी। इस दौरान कहीं-कहीं भारी वर्षा भी हो सकती है। शेष संभागों के जिलों में भी गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं।

सामान्य से एक प्रतिशत कम वर्षाबता दें कि इस सीजन में एक जून से लेकर गुरुवार सुबह साढ़े आठ बजे तक मध्य प्रदेश में कुल 910.2 मिमी. वर्षा हुई है, जो सामान्य वर्षा (922.6 मिमी.) की तुलना में एक प्रतिशत कम है।

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