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मध्यप्रदेश

एडीआर का खुलासा: ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और विंध्य में मतदाता को लुभाने की ठेकेदारी

ग्वालियर। मप्र विधानसभा चुनाव-2023 में इस बार बड़े पैमाने पर काले धन की खपत हो रही है। इस बार चुनाव में कई हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। जिन विधानसभा सीटों पर पिछली बार 70 प्रतिशत से कम वोटिंग हुई थीं, ऐसे ग्वालियर, चंबल, बुंदेलखंड और विंध्य विधानसभाओं में मतदाता जागरूकता अभियान में सामने आया कि उम्मीदवार मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए तमाम तरह के प्रलोभन और लालच दे रहे हैं। इसके लिए प्रत्याशियों ने बाकायदा ठेकेदारों को जिम्मेदारी सौंपी है, जो पंचायत में जाकर सरपंचों और प्रभावशाली लोगों को अपने पक्ष में करने के उपाय कर रहे हैं ताकि पूरे गांव का वोट उनके पक्ष में पड़े। 2018 के चुनाव विश्लेषण के आधार पर यह भी सामने आया कि राजनीति में अपराधीकरण भी बढ़ रहा है। 94 में से 55 आपराधिक मामले घोषित करने वाले विधायकों ने साफ छवि वाले प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ जीत दर्ज की। गुरुवार को एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) के कॉर्डिनेटर संजय सिंह ने विश्लेषण रिपोर्ट के जरिए यह खुलासा करते हुए जानकारी साझा की।

डॉ. सिंह ने बताया कि मप्र इलेक्शन वाच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म ने मप्र विधानसभा चुनाव 2018 में 230 निर्वाचन क्षेत्रों के वोट शेयर का विश्लेषण किया। विधानसभा चुनाव 2018 में 120 राजनीतिक दलों और निर्दलीयों ने चुनाव लड़ा, जिसमें पांच राष्ट्रीय दल, 6 राज्य दल और 109 गैर मान्यता प्राप्त दल शामिल थे। इसकी तुलना में विधानसभा चुनाव 2013 में 66 राजनीतिक दलों ने चुनाव लड़ा था, इसमें 6 राष्ट्रीय दल, 9 राज्य दल और 51 गैर मान्यता प्राप्त दल शामिल थे। यह दर्शाता है कि 2013 से 2018 में चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक दलों की संख्या में 82 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 75.5 रहा जबकि विधानसभा चुनाव 2013 में मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 72.5 था।

2018: 74 करोड़पति विधायक 50 प्रतिशत व अधिक वोट शेयर से जीते

2018 में विधायकों ने कुल मतदान के 46.6 प्रतिशत की औसत से जीत हासिल की, 2013 के चुनाव में विधायकों ने कुल मतदान के 47.3 प्रतिशत की औसत से जीत हासिल की थी। 83 विधायकों ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में मतदान किए गए कुल वोटों में से 50 प्रतिशत और इससे अधिक वोटों से जीत हासिल की। भाजपा के 109 में से 71 विधायकों ने कुल मतदान के 50 प्रतिशत से कम मतदान पर जीत हासिल की। कांग्रेस के 114 में से 69 विधायकों, बसपा के दो, सपा का एक विधायक और निर्दलीय के चार विधायकों ने कुल मतदान के पचास प्रतिशत से कम मतदान पर जीत हासिल की। 187 में से 74 करोड़पति विधायकों ने पचास प्रतिशत और इससे अधिक वोट शेयर के साथ जीत हासिल की।

फैक्ट फाइल: यह भी पढ़िए

  • 10 विधायकों ने 1000 से कम मतों के अंतर से जीत हासिल की।
  • 5 विधायकों ने 30 प्रतिशत से अधिक अंतर के साथ जीत हासिल की।
  • 55 आपराधिक मामले घोषित करने वाले विधायकों में 10 विधायकों ने 20 प्रतिशत से अधिक अंतर से जीत हासिल की।
  • ग्वालियर की डबरा विधानसभा से कांग्रेस की इमरती देवी ने 38 प्रतिशत के अंतर से जीत हासिल की।
  • साफ छवि वाले 50 विधायकों ने आपराधिक मामले घोषित करने वाले उपविजेताओं पर जीत हासिल की, इनमें आठ ने 20 प्रतिशत से अधिक अंतर से जीत हासिल की।
  • 187 करोड़पति विधायकों में 35 गैर करोड़पति से जीते
  • 187 में से 35 करोड़पति विधायकों ने गैर करोड़पति उपविजेताओं के खिलाफ जीत हासिल की। इनमें पांच ऐसे रहे जिनका जीत का अंतर 20 प्रतिशत से अधिक रहा। 30 गैर करोड़पति विधायकों ने करोड़पति उपविजेताओं के खिलाफ जीत दर्ज की।

रक्षा सिरोनिया की हुई थी 62 प्रतिशत वोट शेयर के साथ जीत

-230 विधायकों में 21 महिला हैं, दो महिला विधायक कलावती भूरिया कांग्रेस और रामबाई गोविंद सिंह बसपा ने चालीस प्रतिशत से कम वोट शेयर के साथ जीत हासिल की। निर्वाचन क्षेत्र भांडेर से कांग्रेस की रक्षा सिरोनिया ने सबसे ज्यादा 62 प्रतिशत वोट शेयर के साथ जीत हासिल की। पुन: निर्वाचित 86 विधायकों में से कोई भी अपने निर्वाचन क्षेत्र में 20 प्रतिशत से कम वोट शेयर के साथ नहीं जीता। 27 विधायकों ने 50 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर के साथ जीत हासिल की

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