ब्रेकिंग
भारत की इकोनॉमी का इंजन बना गुजरात: राजकोट में बोले PM मोदी— 'ग्लोबल पार्टनरशिप का नया गेटवे है यह र... भारत की सड़कों पर लिखा गया इतिहास: NHAI का डबल धमाका, दो वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के साथ दुनिया में लहराया प... वाराणसी में मनरेगा आंदोलन पर 'खाकी' का प्रहार: छात्रों पर जमकर चली लाठियां, संग्राम में तब्दील हुआ प... अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर ED की बड़ी स्ट्राइक: काली कमाई के खेल का होगा पर्दाफाश, PMLA के तहत केस की तै... "देवरिया में गरजा बाबा का बुलडोजर: अवैध कब्जे पर बड़ी कार्रवाई, हटाई गई अब्दुल गनी शाह बाबा की मजार सावधान! फर्जी ऐप के मायाजाल में फंसा ITBP का जवान, ग्रेटर नोएडा में लगा 51 लाख का चूना "आतंकियों की 'आसमानी' साजिश बेनकाब: जम्मू में सेना ने पकड़ा सैटेलाइट सिग्नल, आतंकियों के हाथ लगा हाई... हाथों में चूड़ियाँ और माथे पर तिलक: इटली की गोरी पर चढ़ा शिव भक्ति का खुमार, संगम तट पर बनीं आकर्षण का... "दिल्ली बनी 'कोल्ड चैंबर': 3 डिग्री तक गिरा तापमान, जमा देने वाली ठंड से कांपी राजधानी "दरिंदगी की सारी हदें पार: पिता ने गर्लफ्रेंड का कत्ल कर उसका मांस खाया, बेटी के खुलासे से दुनिया दं...
धार्मिक

Akshaya Navami 2023: जानें क्यों आंवले के पेड़ की छांव में करते हैं भोजन, ये है देवी लक्ष्मी की पूजा का शुभ मुहूर्त

इंदौर। हिंदू धर्म में कार्तिक माह के दौरान कई महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाते हैं। इसमें कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी या आंवला नवमी मनाई जाती है। आंवला नवमी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और धार्मिक मान्यता है कि इस दिन यदि श्री हरि विष्णु की पूजा विधि-विधान से की जाती है तो भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और श्रद्धालुओं को अक्षय फल की प्राप्ति होती है।

जानें कब है अक्षय नवमी

कार्तिक नवमी के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 21 नवंबर, 2023 को सुबह 3.16 बजे शुरू हो जाएगी और इस तिथि का समापन 22 नवंबर को रात 1.09 बजे होगा। ऐसे में आंवला नवमी 21 नवंबर, मंगलवार को ही मनाई जाएगी।

आंवला नवमी को लेकर ये है पौराणिक मान्यता

पंडित चंद्रशेखर मलतारे के मुताबिक, इस दिन किए गए किसी भी दान का फल अक्षय होता है। इसका मतलब है कि इस दिन यदि कोई दान या पुण्य किया जाता है कि उसका फल कभी नष्ट नहीं होता है।

पौराणिक मान्यता है कि कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि से लेकर पूर्णिमा के दिन तक भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी आंवले के पेड़ पर निवास करते हैं। ऐसे में यदि इस दौरान आंवले के पेड़ की पूजा करने के साथ आंवले के पेड़ की छत्रछाया में रहते हैं तो जातकों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। यहीं कारण है कि आंवला नवमी पर आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न होती है।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Related Articles

Back to top button