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CAA विरोधी आंदोलन में रेलवे की 84 करोड़ की संपत्ति खाक, बंगाल में हुआ अधिक नुकसान

नागरिकता संशोधन एक्ट के विरोध में देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। सीएए के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन और रेलवे स्टेशन को निशाना बनाया। जगह-जगह भारतीय रेलवे की प्रॉपर्टी को जलाया गया या फिर तोड़फोड़ की गई। रेलवे को पश्चिम बंगाल में रेल परिसरों में आगजनी व हिंसा के कारण 84 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

पूर्वी रेलवे ने कोलकाता हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश टीबीएन राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति ए बनर्जी की खंडपीठ के समक्ष एक हलफनामा दायर कर दावा किया कि नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन का खामियाजा 84 करोड़ करोड़ रुपये के नुकसान के साथ उठाना पड़ा। इसमें सबसे ज्यादा ईस्टर्न रेलवे परिक्षेत्र (कोलकाता क्षेत्र) में नुकसान हुआ है। इस जोन में रेलवे सुरक्षा पुलिस (आरपीएफ) ने कुल 46 एफआईआर, राजकीय रेलवे पुलिस ने 19 एफआईआर एवं स्थानीय पुलिस ने 1 एफआईआर दर्ज कराई है।  इसके अलावा कोलकाता में ही पड़ते साउथ ईस्टर्न रेलवे के परिक्षेत्र में रेलवे सुरक्षा बल ने कुल 11 एफआईआर दर्ज करवाए गए।

इसके अलावा ट्रेनों के कैंसिल होने से भी रेलवे को बड़ा नुकसान हुआ है। जबकि इससे आम लोगों को होने वाली परेशानी का आकलन संभव नहीं है और इसे रुपयों में भी नहीं बदला जा सकता है। बता दें कि इस महीने के शुरुआत में नाराज प्रदर्शनकारियों ने पश्चिम बंगाल के विभिन्न भागों में रेलवे की कई संपत्तियों को नुकसान पहुंचा दिया। उन्होंने स्टेशन मास्टर के केबिन को आग लगाई और राज्य के मुर्शिदाबद जिले के बेलडांगा में आग लगाने से पहले टिकट काउंटर पर तोड़फोड़ की।

आरोप साबित हुआ तो मिलेगी सजा  
इंडियन रेलवे पहली बार आंदोलन के नाम पर उपद्रव करने वालों पर कठोर कार्रवाई करने जा रहा है। रेलवे इस मामले में 151 के तहत केस दर्ज कराएगा। इस एक्ट के तहत अधिकतम 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। इस मामले में दोषी ठहराए जाने और कम से कम 2 साल या अधिकतम सजा होने पर दोषी कोई चुनाव नहीं लड़ पाएगा। यही नहीं पहली बार रेलवे प्रोपर्टी को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ नुकसान की वसूली के लिए अदालत का सहारा लिया जाएगा।

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