ब्रेकिंग
🚨 लातूर के औसा में स्कूल में वीडियो बनाने पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर FIR दर्ज लखनऊ KGMU में MBBS इंटर्न्स की भूख हड़ताल: ₹12,000 से बढ़ाकर ₹30,000 स्टाइपेंड करने की मांग, गेट पर ... बेंगलुरु के डोड्डाबल्लापुर में बड़ी कार्रवाई: पाकिस्तान स्थित गैंग से जुड़े 28 वर्षीय AC टेक्नीशियन ... बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक: वंदे मातरम् पर देशव्यापी अभियान का ऐलान, Gen Z से जुड़ेंगे ... जयपुर में जर्जर स्कूल पर एक्शन: पुराने भवन से 50 मीटर दूर ग्रामीण के मकान में शिफ्ट हुई कक्षाएं, 16 ... संभाजीनगर ट्रिपल डेथ केस: आईफोन की जिद या कोई और वजह? DCP रत्नाकर नवले बोले- जांच पूरी होने तक अफवाह... बिहार के DMCH में अमानवीयता की हद: गार्ड ने टूटे पैर वाले लावारिस मरीज को जमीन पर घसीटा, अधीक्षक ने ... 71 की उम्र में मेगास्टार चिरंजीवी का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा, संक्रांति 2027 पर रिलीज होगी 'काका' पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद पर NIA का शिकंजा: लाहौर भेजा जाएगा समन, गैर-मौजूदगी में चलेगा ट... 'मर्द औरतों को कंट्रोल क्यों करना चाहते हैं?': राहुल गांधी ने पुणे में छात्राओं से किया सीधा संवाद, ...
धार्मिक

जानें क्या होती है प्राण प्रतिष्ठा, हिंदू धर्म में क्यों है इसका विशेष महत्व

इंदौर। सनातन धर्म में जब भी देवी या देवता की मूर्ति घर या मंदिर में स्थापित की जाती है तो पूरे विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में भी राम लला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 22 जनवरी 2024 को हैं और इसके लिए सभी धार्मिक अनुष्ठान 16 जनवरी से ही शुरू हो जाएंगे। ऐसे में लोगों में मन में यह जिज्ञासा हो सकती है कि आखिर प्राण प्रतिष्ठा का धार्मिक महत्व क्या है और यह क्यों किया जाता है। यहां प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं पंडित प्रभु दयाल दीक्षित।

जानें क्यों की जाती है प्राण प्रतिष्ठा

घर या मंदिर में जब भी किसी देवी या देवता की मूर्ति स्थापित की जाती है तो मूर्ति को जीवित करने के अनुष्ठान को ही प्राण प्रतिष्ठा कहा जाता है। सनातन धर्म में प्राण प्रतिष्ठा की परंपरा सांस्कृतिक मान्यता से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यता है कि पूजा-आराधना वास्तव में मूर्ति की नहीं, बल्कि उसमें निहित दिव्य शक्ति और चेतना की होती है।

प्राण प्रतिष्ठा मतलब ईश्वरत्व की स्थापना

पंडित प्रभु दयाल दीक्षित के मुताबिक, किसी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करने से तात्पर्य उसमें ईश्वरत्व को स्थापित करने से है। जब भी किसी प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा की जाती है तो मंत्रों का जाप करने के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठान होते हैं।

घर में कभी नहीं रखते पत्थर की प्रतिमा

सनातन धर्म में यह भी मान्यता है कि घर में कभी भी पत्थर की प्रतिमा स्थापित नहीं की जाती है क्योंकि पत्थर की मूर्ति की रोज पूजा की जाती है। पंडित प्रभु दयाल दीक्षित के मुताबिक, देव प्रतिमा की स्थापना हमेशा मंत्रोच्चार के साथ ही करना चाहिए।

ऐसे की जाती है मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा

  • सबसे पहले देव प्रतिमा को पवित्र नदियों के जल से स्नान कराएं।
  • मूर्ति को साफ मुलायम कपड़े से पोंछ लें।
  • प्रतिमा को सुंदर वस्त्र धारण कराएं और स्वच्छ जगह पर विराजित करें।
  • भगवान की प्रतिमा पर चंदन का लेप आदि लगाने के बाद फूलों से सिंगार करें।
  • बीज मंत्रों का पाठ कर प्राण प्रतिष्ठा करें।
  • आखिर में देव स्तुति, आरती के बाद प्रसाद वितरण करें।

इन मंत्रों का करें जाप

ॐ मानो जूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमं

तनोत्वरिष्टं यज्ञ गुम समिमं दधातु विश्वेदेवास इह मदयन्ता मोम्प्रतिष्ठ ||

अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणाः क्षरन्तु च अस्यै

देवत्व मर्चायै माम् हेति च कश्चन ||

ॐ श्रीमन्महागणाधिपतये नमः सुप्रतिष्ठितो भव

प्रसन्नो भव, वरदा भव ||

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Related Articles

Back to top button