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जानें क्या है 14 मुखी रुद्राक्ष का महत्व, शनि की साढ़े साती से परेशान हैं तो करें ये उपाय

इंदौर। भारतीय ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को एक प्रभावकारी ग्रह माना गया है। पौराणिक मान्यता है कि शनिदेव हर व्यक्ति को उसके कर्म के अनुसार ही फल देते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की साढ़े साती चल रही है तो उसे 14 मुखी रुद्राक्ष जरूर धारण करना चाहिए। पंडित चंद्रशेखर मलतारे के मुताबिक, रुद्राक्ष धारण करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

14 मुखी रुद्राक्ष का महत्व

चौदह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने वाले व्यक्ति पर भगवान शिव का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है। 14 मुखी रुद्राक्ष का संबंध हनुमान जी से भी माना जाता है। इसे धारण करने से व्यक्ति के जीवन में कभी संकट नहीं आता है। चौदह मुखी रुद्राक्ष पक्षाघात की अवस्था में जरूर धारण करना चाहिए। इससे बीमारी से जल्द मुक्ति मिलती है।

साढ़े साती या शनि दोष के उपाय

  • साढ़े साती के दौरान ग्रह शनि को प्रसन्न करने के लिए हर शनिवार को शनिदेव की पूजा करना चाहिए।
  • यदि साढ़े साती चल रही है तो जातक को नीलम जैसे रत्न को जरूर धारण करना चाहिए।
  • यदि रोज हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं तो भी शनि की साढ़े साती का प्रभाव कम होता है।
  • शनि ग्रह मंत्र को 80,000 बार जाप करना चाहिए। इस पाठ का करीब 40 दिन में पूरा करना चाहिए।
  • शनि देव के प्रभाव को कम करने के लिए दाहिने हाथ की मध्य उंगली में लोहे की अंगूठी पहनें। अंगूठी घोड़े की नाल से बनी होनी चाहिए, इसका प्रभाव अधिक होता है।

रोज करें इन मंत्रों का पाठ

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए रोज “शिव पञ्चाक्षरी” और महामृत्युंजय मंत्र का भी पाठ करना चाहिए। इसके अलावा शनिवार को गरीबों और जरूरतमंद लोगों को भोजन और वस्त्र का दिन करना चाहिए। काला चना, सरसों का तेल, लोहे का सामान, काले कपड़े, जैसी चीजों के दान करने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं। हर शनिवार तिल के तेल को शनिदेव पर चढ़ाना चाहिए और रोज “शनि स्तोत्र” या “शनि कवच” का पाठ करना चाहिए।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

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