ब्रेकिंग
Barwani News: बड़वानी के प्रसिद्ध मां मोटी माता मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़, 200 साल पुरानी स्वयं... Legal Notice: दशहरे पर रावण दहन की परंपरा पर उठे सवाल, क्या अश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को हुआ था वध? Digvijay Singh Padayatra: 20 अक्टूबर से उज्जैन से शुरू होगी 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा', अयोध्या त... Damoh Dog Bite News: दमोह में पागल कुत्तों का आतंक, एक ही वार्ड में डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों को बनाय... Shivpuri News: कंकाल की प्रतिमा और अजब रहस्यों से जुड़ा बलारी माता मंदिर, नवरात्रि में उमड़ती है भार... Jagdalpur Adawal School: दिव्यांग छात्रों ने किया चक्काजाम और प्रदर्शन, समाज कल्याण विभाग के आश्वासन... PMGSY Plastic Roads: कोरबा में प्लास्टिक कचरे से डामर की सड़कें बनाने की तैयारी, स्वसहायता समूहों को... Raipur to Bilaspur Bus Fare: छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ की मांग पर बस किराया महंगा, नई दरें 13 अक्टूबर... Bishrampur Chakkajam: सुबह 6 से रात 10 बजे तक नो-एंट्री लागू करने की मांग, प्रशासनिक आश्वासन के बाद ... Kanker News Today: वनांचल क्षेत्रों में जंगली जानवरों के खतरे और तकनीकी खामियों के बीच पटवारियों का ...
धार्मिक

Basant Panchami 2024 Date: इस साल कब मनाई जाएगी बसंत पंचमी, नोट करें तिथि, मुहूर्त व पूजा विधि

इंदौर। हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। यह पर्व देवी सरस्वती को समर्पित है। माना जाता है कि इस दिन माता सरस्वती का जन्म हुआ था। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन मां सरस्वती की आराधना करने से देवी लक्ष्मी और मां काली भी प्रसन्न होती हैं।

कब है बसंत पंचमी 2024?

पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 13 फरवरी को दोपहर 02.41 बजे से शुरू होगी। अगले दिन दोपहर 12.09 बजे तक रहेगी। उदया तिथि 14 जनवरी को है। इस लिए बसंत पंचमी का त्योहार 14 फरवरी को मनाया जाएगा।

बसंत पंचमी 2024 पूजा का शुभ मुहूर्त

बसंत पंचमी 2024 पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07.01 बजे से दोपहर 12.35 बजे तक रहेगा। पूजा के लिए 5 घंटे 35 मिनट का समय है।

बसंत पंचमी 2024 पूजा विधि

बसंत पंचमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद पीले या सफेद रंग के कपड़े रहनें। फिर सरस्वती पूजा का संकल्प लें। पूजा घर पर देवी सरस्वती की मूर्ति या फोटो स्थापित करें। माता को गंगा जल से स्नान कराएं। इसके बाद पीले पुष्प, अक्षत, सफेद चंदन, धूप, दीप आदि अर्पित करें। इस दिन पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए।

सरस्वती वंदना और मंत्र के साथ पूजा करनी चाहिए। आप चाहें तो सरस्वती कवच का पाठ कर सकते हैं। ओम श्री सरस्वत्यै नमः मंत्र का जाप करते हुए हवन करें। फिर अंत में माता सरस्वती की आरती करनी चाहिए।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Related Articles

Back to top button