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मध्यप्रदेश

विज्ञान भवन पर छह साल पहले खर्च किए थे डेढ़ करोड़, विश्वविद्यालय फिर कराएगा निर्माण

 इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के तक्षशिला परिसर में स्थित 53 साल पुराना विज्ञान भवन जर्जर हो चुका है। शुक्रवार को भवन में लगने वाली गणित अध्ययनशाला की छत का प्लास्टर गिर पड़ा। विश्वविद्यालय महीनेभर के भीतर इसकी मरम्मत कराएगा।

ऐसा पहली बार नहीं होगा, बल्कि इससे पहले भी विश्वविद्यालय दो बार डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। 2017 में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) से आए अनुदान से भवन का मेंटेनेंस किया गया। उस दौरान करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए। काम खत्म होने के बाद रूसा भोपाल कार्यालय से दल आया था, जो निर्माण कार्यों को लेकर संतुष्ट नहीं था। बावजूद इसके विश्वविद्यालय ने कंस्ट्रक्शन कंपनी को भुगतान कर दिया था।

विज्ञान भवन में फिजिक्स, गणित, लैग्वेंज व स्टेटेटिक्स व दीनदयाल उपाध्याय केंद्र संचालित होते हैं। यहां पढ़ने वालों की संख्या करीब 800 छात्र-छात्राएं हैं। एक दशक में दो विभाग यहां से शिफ्ट हो चुके हैं, जिसमें पत्रकारिता और सामाजिक विज्ञान विभाग हैं। भवन का निर्माण 1971 में किया गया। 2006 के बाद 2017 में भवन का कायाकल्प किया गया है। आखिर बार तत्कालीन कुलपति डा. नरेंद्र धाकड़ के कार्याकाल में करवाया है।

2014 में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) ने निर्माण, अकादमिक और शोध उपकरण खरीदने के लिए 10 करोड़ का अनुदान दिया था। इसमें विज्ञान भवन, सेंट्रल लाइब्रेरी में दो करोड़ रुपये से रिनोवेशन किया गया था। 2016-17 में दोनों ही भवन जर्जर हो चुके। इन्हें व्यवस्थित करने के लिए अधिकारियों ने निर्माण के लिए मिली राशि 75 फीसद खर्च कर दी। इसमें रंगरोगन, प्लास्टर और भवन के सामने प्लाई लगाई। रिनोवेशन के नाम पर बिल्डिंग में कई बदलाव किए गए। ये काम विश्वविद्यालय के यांत्रिकी विभाग ने करवाए थे। बाकायदा निर्माण एजेंसी को काम सौंपा गया था, जो बरसों से विश्वविद्यालय की भवनों के मरम्मत और निर्माण कार्य करती आ रही थी।

निर्माण कार्य पूरा करने के बाद शेष राशि जारी करने के लिए रूसा ने दल को निरीक्षण करने भेजा, जिसमें उच्च शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी भी मौजूद थे। दल ने निर्माण कार्यों का जायजा लिया, मगर अधिकारियों को काम पसंद नहीं आया। असंतुष्ट अधिकारियों ने घटिया निर्माण को लेकर काफी नाराजगी जताई। उस दौरान यांत्रिकी के अधिकारियों की जमकर फटकार भी लगाई थी। बाद में रूसा की रिपोर्ट में भी घटिया निर्माण का उल्लेख किया गया था।

अधिकारियों के मुताबिक, कंस्ट्रक्शन कार्य तय मानकों पर नहीं किया गया है। साथ ही गुणवत्ता भी उतनी नहीं है, जितनी राशि लगाई गई है। रूसा की कमेटी ने अपनी नाराजगी विश्वविद्यालय के अधिकारियों को भी जाहिर की। सूत्रों के मुताबिक, जिस कंपनी से काम करवाया गया है, उसमें कुछ अधिकारियों की हिस्सेदारी बताई जा रही थी।

तत्कालीन कुलपति डा. नरेंद्र धाकड़ ने 2018 में विश्वविद्यालय के भवनों का आडिट भी करवाया। यह काम एसजीएसआइटीएस को सौंपा गया था। उसने भी अपनी रिपोर्ट में विज्ञान भवन का जिक्र किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ भवन को रिनोवेशन करने पर जोर दिया, जबकि कुछ बिल्डिंग को तोड़कर दोबारा नए सिरे से बनाने की सलाह दी। इसमें विज्ञान भवन को भी शामिल किया गया।

भवन पुराने होने से पहले भी रखरखाव किया गया है। वैसे अभी जिस हिस्से का प्लास्टर गिरा है, उसकी मरम्मत करवाई जाएगी। यह काम महीनेभर में पूरा किया जाएगा। हालांकि पूरे भवन के रिनोवेशन को लेकर भी विचार किया जा रहा है। – अजय वर्मा, रजिस्ट्रार, डीएवीवी

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