ब्रेकिंग
HCL मलाजखंड और आईआईटी कानपुर की SATHEE पहल ने मलाजखंड में आयोजित किया करियर काउंसलिंग एवं जागरूकता स... गाजियाबाद में निषाद पार्टी का कार्यक्रम, काफी संख्या में कार्यकर्ता हुए शामिल कवर्धा में फर्जी डिजिटल पेमेंट का भंडाफोड़: फर्जी रिसीविंग दिखाकर नकद राशि ऐंठने वाले गिरोह पर एक्शन Bhilai News: भिलाई सेक्टर-2 में गटर की सफाई के दौरान मिला नवजात का शव, इलाके में सनसनी; जांच में जुट... Barwani News: बिजासन घाट में शिमला मिर्च से भरे मिनी ट्रक में लगी भीषण आग, कूदकर बची ड्राइवर की जान;... लाठीचार्ज के बाद भड़के डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंट्स ने किया OPD का बहिष्कार; JDA का समर्थन MP High Court on Dacoity Act: जब प्रदेश में डकैत ही नहीं तो 45 साल पुराना एक्ट क्यों? हाईकोर्ट ने DG... भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े इंटर्न डॉक्टर: कमला पार्क में धरना जारी, मिला कांग्रेस का... रतलाम में मॉडिफाइड साइलेंसरों पर गरजा पुलिस का बुलडोजर: 108 साइलेंसर कुचले, ₹1 लाख का जुर्माना वसूला Gwalior Achaleshwar Mandir: अचलेश्वर महादेव मंदिर की दानपेटी से निकली अनोखी चिट्ठियां, भक्त बोला- 'क...
मध्यप्रदेश

मध्‍य प्रदेश के कंवला को कहा जाता है मिनी गोवा, जानिये कैसे पहुंच सकते हैं इस पर्यटन स्‍थल पर

भानपुरा। मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील में गांधीसागर बांध के किनारे बसा ग्राम कंवला चर्चाओं में हैं। गांधीसागर झील का किनारा और गांव के आस-पास का भौगोलिक स्वरूप कुछ ऐसा दृश्य बनाता है कि यह किसी भी समुद्र तट से कम नहीं लगता है।

इसके चलते ही कंवला मिनी गोवा के नाम से प्रसिद्ध हो रहा है। गांधीसागर में भरे अथाह पानी में हवा के साथ उठती लहरें हूबहू समुद्र की तरह दिखती हैं। जून में यहां लोग पहुंचना शुरू हो जाते हैं । उम्‍मीद है अभी बारिश में और भी पर्यटक यहां पहुंचेंगे।

पछुआ हवाएं चलने पर पर चंबल की ऊंची-ऊंची लहरें चट्टानों से अठखेलियां करते हुए रेत को धकेलते हुए किनारों को समुद्र तट के समान आकार देती हैं।

लगातार लहरें आने से किनारों पर रेत ने जमा होकर बीच का स्वरूप दे दिया है। यही कारण है कि यहां आने वाले पर्यटक इसे मिनी गोवा कहने लगे हैं।

दिन भर लहरें किनारों से टकराकर अपने स्वरूप का अहसास कराती हैं। शाम होते-होते हवा के साथ लहरों का जोश बढ़ जाता है। विपरीत दिशा की हवा होने पर पानी शांत रहता है और इसकी सुंदरता बढ़ जाती हैं।

चंबल की लहरों तथा पर्यटकों की आवाजाही के बीच इन दो विशाल शिलाखंडों के आसपास जीवन का तानाबाना चलता रहता है।

दिनभर अपने चूजों के लिए भोजन लाते अबाबील पक्षी भी शाम होने पर घरौंदो से निकलकर आसमान में लगातार चक्कर लगाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।

इस स्‍थानपर सूर्यास्त का दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है। एक ओर सूरज की किरणें पानी पर पड़ती हैं तो वह नजारा सुनहरा होता है वहीं, आसमान में अबाबील पक्षियों का झुंड हवा के साथ होड़ लगा रहा होता है। सूर्यास्त के साथ धीरे धीरे सबकुछ शांत हो जाता है। शिलाखंडों में आदि मानव द्वारा लाखों वर्ष पूर्व बनाए गए शैल चित्र भी हैं।

कैसे पहुंच सकते हैं कंवला

    • ग्राम कंवला मंदसौर जिला मुख्यालय से लगभग 140 किमी दूर है। मंदसौर से गरोठ-भानपुरा होकर गांधीसागर मार्ग पर स्थित ग्राम कंवला पहुंच सकते हैं।
    • उज्जैन, इंदौर से आने वाले पर्यटक ट्रेन से शामगढ़, भवानीमंडी स्टेशन पर उतरकर भानपुरा होते हुए ग्राम कंवला पहुंच सकते हैं।
    • उज्जैग, इंदौर से बस से आने वाले पर्यटक आगर, बड़ोद, डग, गरोठ होते हुए कंवला पहुंच सकते हैं।
  • भानपुरा तहसील मुख्यालय से ग्राम कंवला 8 किमी दूर है। गांव के आबादी क्षेत्र के बाद कच्चा प्राकृतिक मार्ग है जो सीधा मिनी गोवा में पहुंचाता है।

Related Articles

Back to top button