ब्रेकिंग
Punjab High Court Notice to Govt: डीए/डीआर भुगतान में विफलता पर मुख्य सचिव तलब; तरुण चुग का मान सरका... Jalandhar BJP News: जालंधर में भाजपा बस्ती बावा खेल मंडल की नई टीम घोषित; मिशन 2027 को लेकर कार्यकर्... Punjab UDISE Survey 2026-27: यूडाइस सर्वे के काम में देरी पर शिक्षा विभाग सख्त; 30 सितंबर तक अल्टीमे... Punjab Crime News: गुरदासपुर केंद्रीय जेल में कैदियों में भिड़ंत; सायरन बजते ही इलाके में हड़कंप, 2 ... Jashpur Wildlife News: जशपुर में खेत के पास मिला नर दंतैल हाथी का शव; दुलदुला वन परिक्षेत्र में मची ... Jashpur Crime Action: जशपुर में गुंडागर्दी पर बड़ा एक्शन! हवाई फायर कर मोबाइल लूटने वाले BRCC की सेव... Baloda Bazar Ganesh Visarjan: बलौदा बाजार में गणेश विसर्जन से पहले पुलिस का फ्लैग मार्च; उपद्रवियों ... Chhattisgarh Infrastructure News: कवर्धा शहर को जाम से मिलेगी मुक्ति; ₹54 करोड़ की 4-लेन फोरलेन परिय... EC Voter List SIR Row: दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति पर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान; कांग्रेस बोली- 'ज... FJCCI Demand Ranchi: उद्घाटन के 3 साल बाद भी बंद पड़ा रांची ट्रांसपोर्ट नगर! FJCCI ने परिवहन सचिव रा...
धार्मिक

प्रदोष व्रत पर शिव-पार्वती की इस विधि से करें पूजा, घर में बनी रहेगी खुशहाली!

आषाढ़ का महीना इस साल कई संयोग लेकर आया है. बुध प्रदोष व्रत के साथ-साथ मासिक शिवरात्रि इसी महीने में है. तीन जुलाई को प्रदोष व्रत और चार जुलाई को मासिक शिवरात्रि पड़ने से एक खास संयोग का निर्माण हुआ है. प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. हर महीने

हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत के दौरान भगवान भोलेनाथ की विधि विधान से पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि प्रदोष का व्रत रखने से जीवन में सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है. इसके साथ साथ ही घर में सुख शांति आती है. जो लोग प्रदोष व्रत को विधि विधान से करते हैं उनके ऊपर भगवान भोलेनाथ की कृपा हमेशा बनी रहती है.

पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 3 जुलाई को सुबह 07 बजकर 10 मिनट से शुरू होगी और 4 जुलाई को सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर खत्म होगी. प्रदोष काल के समय शिव पूजा होती है. इसलिए प्रदोष व्रत 3 जुलाई को रखा जाएगा. प्रदोष काल समय शाम 07 बजकर 23 मिनट से 09 बजकर 24 मिनट तक रहेगा.

ऐसे करें पूजा

  • प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें.
  • इसके बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लें.
  • सबसे पहले मंदिर जाकर या फिर घर पर शिवलिंग की पूजा करें.
  • शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, गंगाजल, पंचामृत चढ़ाने के साथ बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल, फल, गन्ना, आदि चढ़ाने के साथ भोग लगाएं और घी का दीपक जलाएं.
  • प्रदोष काल में शिव जी की पूजा आरंभ करें.
  • सबसे पहले एक लकड़ी की चौकी यानी वेदी में साफ वस्त्र बिछाकर शिव जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
  • भगवान को जल चढ़ाने के साथ फूल, माला, सफेद चंदन, अक्षत, बेलपत्र आदि चढ़ाने के साथ भोग लगाएं.
  • इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाकर शिव मंत्र, शिव चालीसा, प्रदोष व्रत कथा, मंत्र करके अंत में आरती कर लें.
  • फिर भूल चूक के लिए माफी मांगे. दिनभर व्रत रखने के बाद पारण के मुहूर्त पर व्रत खोलें.

प्रदोष व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दौरान श्रद्धा अनुसार, अन्न, धन और वस्त्र का दान करने से जातक का जीवन खुशहाल रहता है और घर में खुशियों का आगमन होता है. इस दिन पूजा के दौरान काल भैरव तांडव स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. इससे जीवन में व्याप्त समस्त प्रकार के दुख और संताप से मुक्ति मिलती है. साथ ही घर में खुशियों का आगमन होता है.

Related Articles

Back to top button