ब्रेकिंग
OTT Censorship: 'सतलुज' विवाद के बाद सख्त हुई सरकार, OTT फिल्मों के लिए CBFC सर्टिफिकेट होगा अनिवार्... ISRO Brain Drain: इसरो में मची खलबली, 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने दिया इस्तीफा, सरकार ने सख्त किए न... Datia By-Election: दतिया में गरजे नरोत्तम मिश्रा, प्रशासन को दी चेतावनी, बोले- 'किसी में हिम्मत नहीं... Datia By-Election: 'नरोत्तम मिश्रा बड़ी चुनौती थे, आशुतोष तिवारी कुछ नहीं', कांग्रेस प्रत्याशी घनश्य... Haldiram in London: लंदन के लीसेस्टर स्क्वायर में खुला हल्दीराम का पहला स्टोर, छोले-भटूरे खाने उमड़ी... Telangana ACB Raid: HMDA के चीफ इंजीनियर के घर छापा, 100 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति का खुलासा Telangana ACB Raid: HMDA के चीफ इंजीनियर बी. रविंदर गिरफ्तार, 9.24 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति जब्त Delhi Education Hub: दिल्ली को शिक्षा का बड़ा हब बनाने की तैयारी, CM रेखा गुप्ता ने DU के छात्रों को... Datia By-Election: जीतू पटवारी का बड़ा दावा- 'दतिया उपचुनाव 25 हजार वोटों से जीतेगी कांग्रेस' Shirdi Sai Baba Prasad: शिरडी में 700 किलो मिलावटी पेड़ा जब्त, FDA ने मारा छापा
मध्यप्रदेश

कुपोषण मामले में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार पर साधा निशाना, कह दी यह बड़ी बात

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने कुपोषण मामले में भाजपा सरकार पर निशाना साधा है उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा है कि केन्द्र सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ मध्यप्रदेश भीषण कुपोषण की चपेट में आ गया है। प्रदेश की आंगनबाड़ियों में पंजीकृत 6 वर्ष से कम उम्र के 66 लाख बच्चों में से 26 लाख यानि 40% बच्चे बौने पाये गये हैं, वहीं क़रीब 17 लाख यानि 27% बच्चों का वजन मानक औसत वजन से कम पाया गया है। केन्द्र सरकार द्वारा संचालित पोषण ट्रेकर की माह जून 24 की रिपोर्ट दर्शाती है कि मध्यप्रदेश में पिछले दो माह में ही कम वजन वाले बच्चों की संख्या में 3% की बढ़ोतरी हुई है।

मई 2024 में जहां मध्यप्रदेश की आंगनबाड़ियों में कम वजन वाले बच्चों की संख्या 24% थी, वहीं जुलाई 2024 में यह बढ़कर 27% पहुँच गई है। बढ़ते कुपोषण ने समूचे मध्यप्रदेश की आहार वितरण प्रणाली और बच्चों को पोषाहार देने के सभी दावों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाये हैं। शर्मनाक बात है कि इस इंडेक्स मे अब मध्यप्रदेश 35वें नंबर पर लुढ़क गया है। अब हमसे नीचे मात्र एक स्थान ही बचा है।

आँकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश सरकार की कथनी और करनी में व्यापक अंतर है। सभी झूठे दावों और वादों की तरह ही बच्चों को भरपेट भोजन/पोषाहार  देने का इनका दावा भी झूठा है, अफ़लातूनी है, विज्ञापनी है। मैं सरकार से माँग करता हूँ कि अपनी झूठी वाहवाही की बीमारी से बाहर निकले और नौनिहालों के पेट की तरफ़ नज़र घुमाये। यदि मध्यप्रदेश का भविष्य और घर आँगन की किलकारियाँ भूख और चीख का प्रतीक बन रही हैं, तो यह प्रदेश के लिये शर्मनाक स्थिति है।

Related Articles

Back to top button