ब्रेकिंग
Rahul Gandhi Indore Visit: राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का वेन्यू तय, ₹10.50 लाख के कि... IRCTC Booking Record: IRCTC ने रचा इतिहास, एक दिन में बुक हुए 20 लाख से ज्यादा रेल टिकट; टूटा पुराना... Beyond Weapons: रूस की तकनीक सिर्फ मिसाइलों तक सीमित नहीं, परमाणु टॉरपीडो से लेकर सैटेलाइट नेटवर्क म... Haiwaan Opening Day: 18 साल बाद साथ आए अक्षय कुमार और सैफ अली खान, बॉक्स ऑफिस पर 5 करोड़ भी नहीं जुट... West Bengal Child Marriage: बारात लेकर पहुंचा था दूल्हा, ऐन वक्त पर पहुंची पुलिस ने मंडप से किया गिर... Raebareli Accident News: रायबरेली में लेंटर डालते समय टूटी सपोर्टिंग पटरी, ऊंचाई से गिरे 6 मजदूर; मच... Tirupati Accident News: तिरुपति में मोबाइल निकालने कुएं में उतरे 2 युवकों की दर्दनाक मौत, जहरीली गैस... Raebareli Swine Flu News: रायबरेली में स्वाइन फ्लू का कहर, मरीजों की संख्या बढ़कर हुई 16; लखनऊ रेफर ... Kanpur Maharajpur Murder: अवैध संबंधों में बाधक बने नाबालिग बेटे का गला घोंटा, पोल खुली तो प्रेमी ने... हिरासत में मारपीट पुलिस की ड्यूटी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी पुलिसकर्मियों को राहत देने से किय...
गुजरात

सूरत में निर्विरोध चुने जाने के खिलाफ गुजरात HC में 2 याचिकाएं, BJP सांसद मुकेश दलाल को समन

गुजरात हाई कोर्ट ने सूरत लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद मुकेश दलाल को उनकी निर्विरोध जीत को चुनौती देने वाली 2 याचिकाओं पर समन जारी किया है. जस्टिस जेसी दोशी की कोर्ट ने दलाल को समन जारी करते हुए 9 अगस्त तक जवाब देने को कहा है. यह मामला पिछले दिनों 25 जुलाई को सुनवाई के लिए आया था. याचिकाकर्ताओं के वकील पीएस चंपानेरी ने आज रविवार को इस मामले की जानकारी दी.

कांग्रेस के प्रत्याशी नीलेश कुंभानी का नामांकन खारिज होने और अन्य उम्मीदवारों के दौड़ से हट जाने के बाद, 22 अप्रैल को नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख पर मुकेश दलाल को विजेता घोषित कर दिया गया था. सूरत सीट के अलावा गुजरात की शेष 25 लोकसभा सीटों पर आम चुनाव के तीसरे चरण में 7 मई को वोटिंग कराई गई थी. सूरत समेत गुजरात में बीजेपी ने 25 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि कांग्रेस के खाते में महज एक सीट आई थी.

सूरत से 4 वोटर्स ने दायर की याचिका

याचिकाकर्ताओं की ओर से नीलेश कुंभानी के नामांकन को खारिज करने के सूरत के जिलाधिकारी और रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले की वैधता को चुनौती दी गई. सूरत संसदीय क्षेत्र के 4 वोटर्स की ओर से दाखिल 2 याचिकाएं, जो कांग्रेस के कार्यकर्ता भी हैं, नामांकन फॉर्म की जांच से संबंधित जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 36 के प्रावधानों के तहत कुंभानी के फॉर्म को खारिज करने के रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले पर सवाल उठाती हैं.

याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि कुंभानी के 3 प्रस्तावकों ने, जिन्होंने बाद में उनके नामांकन पत्रों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, डिप्टी कलेक्टर के समक्ष एक आवेदन में घोषणा की थी कि वे उनके नामांकन फॉर्म पर प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर करेंगे. उन्होंने उसी निर्वाचन क्षेत्र के वोटर्स घोषित करने वाले प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते समय ऐसा किया था, जो प्रस्तावकों के लिए एक पूर्व शर्त होता है.

याचिका में याचिकाकर्ता ने दिए तर्क

इसके अलावा, हस्ताक्षरों का सत्यापन करना कलेक्टर का काम नहीं होता है, उन्होंने इस बात पर भी जोर देते हुए तर्क दिया कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और इस वजह से किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवारों के लिए उसके पास प्रस्तावकों की कोई कमी नहीं है.

पिछले 12 सालों में बतौर निर्विरोध लोकसभा चुनाव जीतने वाले दलाल पहले उम्मीदवार बन गए थे. 4 जून को मतगणना से पहले यह निर्विरोध परिणाम बीजेपी के पक्ष में आया था. जिला कलेक्टर और चुनाव अधिकारी सौरभ पारधी ने 22 अप्रैल को अंतिम समय में उम्मीदवारों के नामांकन वापस लेने की वजह से दलाल को विजयी होने का प्रमाण पत्र सौंप दिया गया.

कांग्रेस के प्रत्याशी नीलेश कुंभानी का नामांकन उनके प्रस्तावकों के हस्ताक्षरों में विसंगतियों के आधार पर खारिज कर दिया गया था, जिन्होंने हलफनामा दायर कर दावा किया था कि उन्होंने पेपर पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. उनके डमी उम्मीदवार सुरेश पडसाला का नामांकन भी इसी कारण से अमान्य घोषित कर दिया गया.

Related Articles

Back to top button