ब्रेकिंग
Gwalior Master Plan 2035 Controversy: बिल्डरों और अफसरों की मिलीभगत पर शासन की मुहर, टीएंडसीपी आयुक्... IMD Weather Forecast: यूपी, बिहार और राजस्थान समेत इन राज्यों में झमाझम बारिश, 70 किमी की रफ्तार से ... Rahul Gandhi on CEC: 'ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा, PM करवाएंगे इस्तीफा', CWC बैठक में राहुल गांधी ... 'मुसलमानों को निशाना बनाने की साजिश', धर्मवार आंकड़े मांगने पर भड़के ओवैसी Delhi Pollution GRAP 2026: सर्दियों से पहले CAQM का बड़ा फैसला, BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल गाड़ियो... चुनाव प्रक्रिया पर फिर उठे गंभीर सवाल: महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की चिट्ठी से मचा सियासी ... BJP State Incharges Meeting: बीजेपी मुख्यालय में 4 घंटे चली मैराथन बैठक, नितिन नबीन ने प्रभारियों को... Smriti Irani on Congress: हार की बौखलाहट में चुनाव आयोग पर हमला कर रही कांग्रेस, स्मृति ईरानी का तीख... Delhi Police Drug Bust: लेडी डॉन पार्वती के घर से सोना, नकदी और 4 संपत्तियों के कागजात जब्त; अंतरराज... Ketan Agarwal Murder Case: पुणे में रूह कंपाने वाली साजिश, 5,053 पन्नों की चार्जशीट में 'डेथ कैप मशर...
मध्यप्रदेश

जंगल के अंदर के रास्तों पर 20 किमी प्रतिघंटा से तेज वाहन दौड़ाया तो होंगे जब्त

 उमरिया। जंगल के अंदर से गुजरने वाले वाहनों के रास्ते में कभी भी जंगली जानवर आ सकते हैं जिससे वाहन की टक्कर लगने से उनकी जान जा सकती है। एेसी स्थिति में वाहन वन विभाग द्वारा जब्त कर लिए जाते हैं और वन अधिनियम और वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत कार्रवाई भी की जाती है।

इन सड़कों पर खतरा

उमरिया से होकर गुजरने वाला शहपुरा-सतना स्टेट हाईवे का लगभग 40 किलोमीटर लंबा हिस्सा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मगधी, ताला, खितौली, पतौर, पनपथा रेंज के जंगल को प्रभावित करता है। मानपुर से शहडोल तक जाने वाली प्रमुख सड़क का लगभग 15 किलोमीटर लंबा हिस्सा बांधवगढ़ के जंगल को प्रभावित करता है।

बांधवगढ़ के कल्लवाह रेंज को प्रभावित करती

चौरी से रायपुर बन्नौदा होते हुए बिरसिंहपुर पाली तक पहुंचने वाली लगभग 20 किलोमीटर लंबी सड़क बांधवगढ़ के कल्लवाह रेंज को प्रभावित करती है। एनएच 43 कटनी-चांडिल की लंबाई उमरिया में लगभग सौ किलोमीटर है जिसमें से सामान्य वन मंडल के चंदिया, उमरिया, नौरोजाबाद, पाली, घुनघुटी के लगभग 60 किलोमीटर जंगल को यह हाईवे प्रभावित करता है।

इसलिए है जरूरी

दरअसल, जंगल के अंदर तेज गति से वाहन चलाने की वजह से जंगली जानवरों को क्षति पहुंचती है। खास तौर से छोटे जानवर बंदर और हिरण भी कई बार वाहन की चपेट में आ जाते हैं। यही कारण है कि वाहनों की गति पर गंभीरता से ध्यान देने का निर्णय लिया गया है। यह निमय प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में लागू होता है अौर इस नियम का पालन सभी जगह करवाया जा रहा है।

Related Articles

Back to top button