ब्रेकिंग
Baba Sodal Mela Security Plan: 25 सितंबर को लगेगा बाबा सोढल मेला; सीसीटीवी, बम व डॉग स्क्वाड संभालें... BJP Punjab Drug Free Rally: 'पंजाब के भविष्य की दिशा तय करेगी यह रैली'; अशोक सरीन हिक्की ने 50 एकड़ ... BJP Organizational Appointments: बीजेपी ने पंजाब और चंडीगढ़ के प्रभारी-सह प्रभारी किए नियुक्त; देखें... Poonch Security Alert: पुंछ में एलओसी से सटे गांवों में मिलीं 3 लैंडमाइन; सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन... Jodhpur Chemical Factory Fire: जोधपुर में केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग के बाद ब्लास्ट; आग बुझाने में ... IIT Bombay Student Suicide: परीक्षा केंद्र का CCTV फुटेज आया सामने; साहिल वाकोडे मामले में बड़ा खुला... Bhoramdeo Sugar Factory Award: भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने को लगातार दूसरी बार मिला 'नेशनल एफिशिएंस... Jashpur News: जशपुर पुलिस की मिसाल! दिवंगत आरक्षक देव नारायण सिंह के पुत्र को मिला आरक्षक पद का नियु... Korba Crime News: जमीन विवाद में बुजुर्ग चाचा की कुल्हाड़ी मारकर हत्या; अगले ही दिन पत्थर से कुचलकर ... Balod Electricity News: बिना सूचना कट रहे पंचायत कनेक्शन; बालोद में बारिश के बीच सरपंच संघ का बड़ा प...
हरियाणा

कड़वे अनुभव रहे, अब किसी से गठबंधन नहीं… BSP के गिरते ग्राफ से निराश मायावती का बड़ा ऐलान

हरियाणा में विधानसभा चुनाव के नतीजों में निराशाजनक परिणाम के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने बड़ा फैसला लिया है. मायावती ने शुक्रवार को ऐलान किया है कि बसपा आगे के चुनावों में किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी. इसके अलावा बीजेपी, एनडीए, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन से दूरी पहले की तरह ही जारी रहेगी. मायावती ने कहा कि अब इधर-उधर में ध्यान भटकाना पार्टी के लिए अति-हानिकारक साबित हो सकते हैं.

मायावती ने एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट करते हुए कहा कि यूपी सहित दूसरे राज्यों के चुनाव में भी बीएसपी का वोट गठबंधन की पार्टी को ट्रांसफर हो जाने, लेकिन उनका वोट बीएसपी को ट्रांसफर कराने की क्षमता उनमें नहीं होने के कारण अपेक्षित नतीजे नहीं मिलने से पार्टी कैडर को निराशा व उससे होने वाले मूवमेंट की हानि को बचाना जरूरी है.

हरियाणा में खाता तक नहीं खोल पाई बीएसपी

इस बार के हरियाणा विधानसभा चुनाव में मायावती की अगुवाई वाली बीएसपी का अभय चौटाला की आईएनएलडी के साथ गठबंधन था. हरियाणा की 90 सीटों में से 37 सीटों पर बीएसपी ने अपने उम्मीदवार उतारे थे जबकि बाकी पर आईएनएलडी के कैंडिडेट थे. बड़े स्तर पर चुनाव लड़ने के बाद भी केवल आईएनएलडी का ही खाता खुला और उसके हिस्से 2 सीटें आईं. 37 सीटों पर मैदान में होने के बाद भी बसपा के हाथ एक भी सीट नहीं लगी. इससे पहले पंजाब के चुनाव में भी बीएसपी को नुकसान उठाना पड़ा था.

चुनावों को लेकर समीक्षा बैठक के बाद ऐलान

चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन को लेकर बीएसपी की आज समीक्षा बैठक हुई. इस बैठक के बाद मायावती ने आगे चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों से गठबंधन नहीं करने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि बीएसपी अलग-अलग पार्टियों और संगठनों व उनके स्वार्थी नेताओं को जोड़ने के लिए नहीं बल्कि बहुजन समाज के विभिन्न अंगों को आपसी भाईचारा व सहयोग के बल पर संगठित होकर राजनीतिक शक्ति बनाने व उनको शासक वर्ग बनाने का आंदोलन है. इसलिए अब इधर-उधर ध्यान भटकाना बहुत ज्यादा हानिकारक है.

‘कमजोर करने की चौतरफा कोशिश’

इसके साथ-साथ यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इशारों ही इशारों में कुछ क्षेत्रीय पार्टियों पर निशाना भी साधा. उन्होंने बसपा को देश की एकमात्र प्रतिष्ठित अम्बेडकरवादी पार्टी करार देते हुए कहा बीएसपी व उसके आत्मसम्मान व स्वाभिमान मूवमेंट के कारवां को हर प्रकार से कमजोर करने की चौतरफा कोशिश की जा रही है. ऐसी स्थिति में अपना उद्धार स्वयं करने योग्य व शासक वर्ग बनाने की प्रक्रिया पहले की ही तरह जारी रखनी जरूरी है.

नवंबर में महाराष्ट्र में होने वाले हैं चुनाव

मायावती के इस फैसले का असर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा. राज्य में अगले महीने विधानसभा के चुनाव है. बसपा सुप्रीमो के इस ऐलान के बाद अब यह तय हो गया है कि पार्टी महाराष्ट्र में अकेले मैदान में उतरेगी. हालांकि, चुनाव कितने सीटों पर लड़ेगी इसे लेकर अभी तक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा है कि बसपा इस बार महाराष्ट्र की सभी सीटों पर किस्मत आजमा सकती है. राज्य में ऐसी कई सीटें हैं जहां पर बसपा की पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है.

हरियाणा में खाता तक नहीं खोल पाई बीएसपी

इस बार के हरियाणा विधानसभा चुनाव में मायावती की अगुवाई वाली बीएसपी का अभय चौटाला की आईएनएलडी के साथ गठबंधन था. हरियाणा की 90 सीटों में से 37 सीटों पर बीएसपी ने अपने उम्मीदवार उतारे थे जबकि बाकी पर आईएनएलडी के कैंडिडेट थे. बड़े स्तर पर चुनाव लड़ने के बाद भी केवल आईएनएलडी का ही खाता खुला और उसके हिस्से 2 सीटें आईं. 37 सीटों पर मैदान में होने के बाद भी बसपा के हाथ एक भी सीट नहीं लगी. इससे पहले पंजाब के चुनाव में भी बीएसपी को नुकसान उठाना पड़ा था.

चुनावों को लेकर समीक्षा बैठक के बाद ऐलान

चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन को लेकर बीएसपी की आज समीक्षा बैठक हुई. इस बैठक के बाद मायावती ने आगे चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों से गठबंधन नहीं करने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि बीएसपी अलग-अलग पार्टियों और संगठनों व उनके स्वार्थी नेताओं को जोड़ने के लिए नहीं बल्कि बहुजन समाज के विभिन्न अंगों को आपसी भाईचारा व सहयोग के बल पर संगठित होकर राजनीतिक शक्ति बनाने व उनको शासक वर्ग बनाने का आंदोलन है. इसलिए अब इधर-उधर ध्यान भटकाना बहुत ज्यादा हानिकारक है.

‘कमजोर करने की चौतरफा कोशिश’

इसके साथ-साथ यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इशारों ही इशारों में कुछ क्षेत्रीय पार्टियों पर निशाना भी साधा. उन्होंने बसपा को देश की एकमात्र प्रतिष्ठित अम्बेडकरवादी पार्टी करार देते हुए कहा बीएसपी व उसके आत्मसम्मान व स्वाभिमान मूवमेंट के कारवां को हर प्रकार से कमजोर करने की चौतरफा कोशिश की जा रही है. ऐसी स्थिति में अपना उद्धार स्वयं करने योग्य व शासक वर्ग बनाने की प्रक्रिया पहले की ही तरह जारी रखनी जरूरी है.

नवंबर में महाराष्ट्र में होने वाले हैं चुनाव

मायावती के इस फैसले का असर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा. राज्य में अगले महीने विधानसभा के चुनाव है. बसपा सुप्रीमो के इस ऐलान के बाद अब यह तय हो गया है कि पार्टी महाराष्ट्र में अकेले मैदान में उतरेगी. हालांकि, चुनाव कितने सीटों पर लड़ेगी इसे लेकर अभी तक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा है कि बसपा इस बार महाराष्ट्र की सभी सीटों पर किस्मत आजमा सकती है. राज्य में ऐसी कई सीटें हैं जहां पर बसपा की पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है.

Related Articles

Back to top button