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स्कूल और घरों में भी सेफ नहीं बच्चे, केरल में थम नहीं रहा मासूमों का यौन शोषण

केरल में बाल यौन शोषण को लेकर एक रिपोर्ट आई है, जो कि परेशान करने वाली है. इससे पता चलता है कि केरल में बच्चे स्कूल और घरों में सुरक्षित नहीं हैं. यहां बच्चों के यौन शोषण के मामले बढ़ रहे हैं. ये रिपोर्ट केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने हाल ही में जारी की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 21 प्रतिशत मामले ऐसे हैं, जिनमें बच्चे घरों में यौन शोषण का शिकार हुए हैं. 4 फीसदी मामलों में बच्चे स्कूल में शिकार हुए. पॉक्सो एक्ट में दर्ज 4 हजार 663 मामलों की जांच में पाया गया है कि इसमें से 988 घटनाएं बाल गृहों में हुईं.

रिपोर्ट के मुताबिक, 725 मामले में ऐसे हैं, जिनमें आरोपियों ने अपने घर में बच्चों को शिकार बनाया. कुल मामलों का ये 15 प्रतिशत हैं. 935 मामलों में पब्लिक प्लेस पर बच्चों का यौन शोषण हुआ है. 173 मामलों में बच्चों को स्कूलों में शिकार बनाया गया. 139 मामले वाहनों में, 146 मामले अन्य स्थानों पर और यौन शोषण के 166 मामले सुनसान जगहों पर हुए.

73 मामलों में धार्मिक स्थानों पर बच्चों के साथ दरिंदगी

इतना ही नहीं 60 मामलों में बच्चों को होटल, 72 मामले में दोस्त के घरों और 73 मामलों में धार्मिक स्थानों पर बच्चों के साथ दरिंदगी हुई. 16 मामले अस्पतालों और 8 प्रतिशत मामले बाल देखभाल संस्थानों में दर्ज किए गए हैं. 791 मामलों में अपराध के बारे में जानकारी नहीं मिली है. राज्य में पिछले साल पॉक्सो के तहत 4 हजार 663 मामले दर्ज किए गए. तिरुवनंतपुरम जिले में सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए. पथनमथिट्टा जिले में सबसे कम मामले दर्ज हुए.

2021 में दर्ज किए गए थे 3 हजार 322 मामले

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पॉक्सो एक्ट में दर्ज 4 हजार 663 मामलों में बच्चों की संख्या 4 हजार 701 थी. ये बताता है कि कई मामलों में एक से अधिक पीड़ित थे.ये आंकड़े बच्चों को पॉक्सो और बच्चों के अनुकूल प्रक्रियाओं के बारे में जागरूक करने और आत्मरक्षा संबंधी प्रशिक्षण देने की जरूरत है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में राज्य में 3 हजार 322 और 2022 में 4 हजार 583 मामले दर्ज किए गए. 2019 में यह आंकड़ा 3 हजार 616 और 2020 में 3 हजार 30 था.

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