ब्रेकिंग
🚨 लातूर के औसा में स्कूल में वीडियो बनाने पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर FIR दर्ज लखनऊ KGMU में MBBS इंटर्न्स की भूख हड़ताल: ₹12,000 से बढ़ाकर ₹30,000 स्टाइपेंड करने की मांग, गेट पर ... बेंगलुरु के डोड्डाबल्लापुर में बड़ी कार्रवाई: पाकिस्तान स्थित गैंग से जुड़े 28 वर्षीय AC टेक्नीशियन ... बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक: वंदे मातरम् पर देशव्यापी अभियान का ऐलान, Gen Z से जुड़ेंगे ... जयपुर में जर्जर स्कूल पर एक्शन: पुराने भवन से 50 मीटर दूर ग्रामीण के मकान में शिफ्ट हुई कक्षाएं, 16 ... संभाजीनगर ट्रिपल डेथ केस: आईफोन की जिद या कोई और वजह? DCP रत्नाकर नवले बोले- जांच पूरी होने तक अफवाह... बिहार के DMCH में अमानवीयता की हद: गार्ड ने टूटे पैर वाले लावारिस मरीज को जमीन पर घसीटा, अधीक्षक ने ... 71 की उम्र में मेगास्टार चिरंजीवी का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा, संक्रांति 2027 पर रिलीज होगी 'काका' पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद पर NIA का शिकंजा: लाहौर भेजा जाएगा समन, गैर-मौजूदगी में चलेगा ट... 'मर्द औरतों को कंट्रोल क्यों करना चाहते हैं?': राहुल गांधी ने पुणे में छात्राओं से किया सीधा संवाद, ...
उत्तरप्रदेश

खूबसूरती में हर्षा रिछारिया को टक्कर देती है ये साध्वी, अमेरिका से आकर बसी है भारत में

महाकुंभ 2025 में इन दिनों एक महिला साध्वी खूब सुर्खियां बटोर रही हैं, जिनका नाम है हर्षा रिछारिया. हर्षा एक सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर हैं. वो 2 साल से साध्वी बनी हैं. उनके गुरु आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री कैलाशानंद गिरी जी महाराज हैं और वे निरंजनी अखाड़ा से जुड़ी हुई हैं. लेकिन इसके अलावा एक और महिला साधु भी है जो खूबसूरती में हर्षा रिछारिया को कांटे की टक्कर देती हैं. इनका नाम है साध्वी भगवती सरस्वती.

साध्वी भगवती सरस्वती मूल रूप से लॉस एंजिल्स की रहने वाली हैं. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं. वह पिछले 30 सालों से परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में रह रही हैं. इन दिनों वो भी प्रयागराज के महाकुंभ में पहुंची हैं.
साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा, ‘यह सिर्फ संगम में पवित्र डुबकी लगाने का अवसर नहीं है, यह लोगों के लिए उनकी भक्ति में आस्था की डुबकी लगाने का अवसर है. यह भारतीय संस्कृति की ताकत और महानता है. यह न तो कोई रॉक कॉन्सर्ट है और न ही कोई खेल आयोजन.’

1996 में आई थीं भारत

साध्वी भगवती सरस्वती ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में फ्रैंक और सुजेन गारफील्ड के यहां जन्म लिया था. साध्वी भगवती सरस्वती साल 1996 में आई तो थीं भारत घूमने, लेकिन भारतीय शाकाहार और दर्शन से इतना प्रभावित हुईं कि महज 30 साल की उम्र में ही अपने घर-परिवार को छोड़कर संन्यास ग्रहण कर लिया और ऋषिकेश में गंगा किनारे मौजूद परमार्थ निकेतन आश्रम को अपना घर बना लिया. भगवती सरस्वती के पास मनोविज्ञान में पीएचडी की डिग्री है. वह डिवाइन शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष हैं और इस समय ऋषिकेश में रहकर ही महिला सशक्तिकरण पर काम कर रही हैं.

भारत में एक अलग की बात

साध्वी भगवती सरस्वती अपने संन्यास के पहले के जीवन के बारे में बताती हैं कि अमेरिका से वे पहली बार भारत आई थीं, तो अमेरिका और भारत के लोगों की मानसिकता में बड़ा अंतर देखने को मिला. अमेरिका में कम्प्लेंस ज्यादा हैं, वहां हर कोई सिर्फ शिकायत ही करता है, चाहे पैसों का मामला हो या हेल्थ का. लेकिन, भारत में एक अलग बात है, यहां लोग परमात्मा की कृपा पर भरोसा करते हैं. शिकायती जीवन से दूर हैं. शाकाहार यहां की सबसे खास बात है.

Related Articles

Back to top button