ब्रेकिंग
Health Minister Irfan Ansari: झारखंड के चार जिलों में खुलेंगे नए मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य मंत्री ने क... Jharkhand CM News: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निभाई पारंपरिक रस्में, नेमरा गांव में माता की स्मृति म... BIT Mesra Success Story: 400 रुपये हफ्ते से शुरू हुआ सफर, सफाईकर्मी मां की बेटी आरती ने इंजीनियरिंग ... Ranchi City SP Paras Rana: संवेदनशील इलाकों में ड्रोन से निगरानी, पुलिस ने लोगों से की अफवाहों से दू... Jharkhand Politics: प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करेंगे नितिन नबीन, अमर बाउरी बोले- संगठन को... Mungeli Road Accident: तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले के भाई समेत 3 लोगों ... Jagdalpur News: बस्तर में बाढ़ पीड़ितों का फूटा गुस्सा, मुआवजे की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट का किया घे... Chhattisgarh Wildlife News: धमतरी और सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में तेंदुए का हमला, ग्रामीणों में ... Surajpur News: गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के गेट पर नवजात की मौत, लापरवाही पर डॉक्टर और एएनएम... Sukma News: पुलिस परिवार की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की अनोखी पहल, 'सेवा पथ एक पहल' के तहत सिलाई ...
देश

पीजी मेडिकल एडमिशन में नहीं मिलेगा डोमिसाइल के आधार पर आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल कोर्स के पीजी एडमिशन के लिए निवास (डोमिसाइल) आधारित आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया है. सर्वोच्च अदालत ने इसे तुरंत खत्म करने का आदेश दिया है. कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मेडिकल कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएशन के एडमिशन में डोमिसाइल आधारित आरक्षण नहीं दे पाएंगे.

जस्टिस हृषिकेश रॉय , जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा है कि इस तरह का आरक्षण संविधान के अनुच्छेद-14 का सीधा-सीधा उल्लंघन है. हालांकि, कोर्ट ने कहा है कि जो फैसला हम दे रहे हैं, वो अब नए सिरे से लागू होगा. यानी पुराने एडमिशन पर इस फैसला का प्रभाव नहीं पड़ेगा.

मेडिकल-पीजी में एडमिशन का मामला क्या है?

दरअसल, चंडीगढ़ की एक मेडिकल कॉलेज ने पीजी में एडमिशन देने के लिए डोमिसाइल आरक्षण को भी आधार बनाया, जिसको लेकर तन्वी बहल कोर्ट पहुंच गई. इस केस को तन्वी बहल वर्सेज श्रेय गोयल नाम से भी जाना जाता है.

2019 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने इस केस की सुनवाई की थी, उस वक्त हल नहीं निकल पाया था, जिसके बाद केस को तीन जजों की बेंच में भेज दिया गया था.

याचिकाकर्ता का कहना था कि भारत में रह रहे लोगों को उच्च शिक्षा में निवास के आधार पर आरक्षण कैसे मिल सकता है? 5 साल की लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने अब इस पर अपना फैसला सुनाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या-क्या कहा है?

फैसला सुनाते हुए जस्टिस सुधांशु धुलिया ने कहा कि हम सभी भारत के निवासी हैं. सभी लोगों का निवास एक ही है. प्रांत और राज्य निवास का आधार नहीं है. भारत के सभी निवासियों को देश में कहीं भी निवास चुनने और देश में कहीं भी व्यापार और व्यवसाय करने का अधिकार है.

कोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा- संविधान हमें भारत भर के शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश चुनने का अधिकार भी देता है. मेडिकल कॉलेजों सहित शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ किसी विशेष राज्य में रहने वालों को केवल MBBS कोर्स में एक निश्चित डिग्री तक ही दिया जा सकता है.

कोर्ट के मुताबिक उच्च शिक्षा में निवास आधारित आरक्षण का लाभ देना संविधान का सीधा उल्लंघन है.

Related Articles

Back to top button