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पंजाब

घर बेचने को मजबूर हुआ परिवार! होश उड़ा देगा पूरा मामला

स्थानीय बटाला रोड के साथ लगते लक्ष्मी विहार कॉलोनी, 88 फुट रोड में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसके बारे में पढ़ के आप हैरान रह जाओगे। उक्त मामले ने जीरो बिल के दावों की पोल खोल दी है क्योंकि मकान सिर्फ 35 गज में है और विभाग ने बिजली का बिल अढ़ाई लाख रुपए भेज दिया है।

यहां अपने परिवार के साथ रहने वाले विक्की कुमार पिछले लंबे समय से बिजली विभाग दफ्तर के चक्कर काट रहा है, क्योंकि उसके घर का बिल पावर कार्पोरेशन द्वारा अढ़ाई लाख रुपए जारी किया गया है, जो इस समय साढ़े तीन लाख पर पहुंच गया है। जिस मकान का यह बिल है वह सिर्फ 35 गज में बना हुआ है और विक्की मेहनत मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा है। 35 गज के इस मकान में तीन से चार बल्ब, एक टी.वी. चलता है।

विक्की कुमार ने बताया कि उसका रूटीन में बिल हजार के करीब आ रहा था, परंतु उस समय उसकी हैरानी का कोई ठिकाना नहीं रहा जब अढ़ाई लाख का बिल उसकी आंखों के सामने था। उन्होंने बताया कि जब वह अढ़ाई लाख का बिल लेकर बिजली दफ्तर पहुंचा तो उसका मीटर बदल दिया गया। विक्की कुमार की मुश्किलें और बढ़ गईं, जब उसका अगला बिल साढ़े तीन लाख भेज दिया गया।

विक्की कुमार के मुताबिक वह लगातार बिजली विभाग दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, पर उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही, उसे कहा जा रहा है कि यह बिल तो भरना ही पड़ेगा। अगर वह इस बिल के विरोध में केस करता है तो उसे कुल बिल का 20 फीसदी जमा करवाना पड़ेगा, जो उसकी पहुंच से बाहर है। वह 20 फीसदी रकम जमा करवाने की भी हालत में नहीं है। उसका बहुत सा खर्च बीमार माता-पिता के इलाज में लग जाता है, कोई बचत नहीं है। इस परिवार ने दुखी होकर अपना मकान बेचने लगा दिया है, पर सवाल यह है कि मकान बेच कर भी क्या लाखों का बिल यह गरीब परिवार का पीछा छोड़ेगा।

वहीं अमृतसर के रहने वाले समाज सेवी पवन शर्मा ने कहा कि परिवार के साथ धक्का किया जा रहा है। जहां कहा जा रहा है कि लोगों के घरों के बिल जीरो है, वहीं इस घर का बिल इतना ज्यादा क्यों है, यह अपने आपमें एक गरीब के साथ उसकी गुरबत का मजाक है। इस दौरान जब पॉवरकॉम के इस इलाके के एक्सियन मनोहर सिंह, एस.डी.ओ. विपन विग और जे.ई. विशाल के साथ बात करनी चाही इन्होंने कहा कि यह मामला उनके ध्यान में नहीं है। एस.डी.ओ. ने कहा कि सोमवार को वह इस मामले की विस्तार से जानकारी लेंगे और इसे डिस्प्यूट रिड्रेसल कमेटी में डलवा कर इसका समाधान करवा लेंगे।

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