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गुजरात में पीएम मोदी और राहुल गांधी, समझें कांग्रेस-बीजेपी के लिए कैसे है सियासी एपिसेंटर?

गुजरात विधानसभा चुनाव में दो साल से भी ज्यादा समय है, लेकिन सियासी तपिश अभी से ही बढ़ने लगी है. पीएम मोदी एक हफ्ते में दूसरी बार अपने गृह राज्य गुजरात के दौरे पर पहुंच रहे हैं, जहां वो अलग-अलग कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे. वहीं, शुक्रवार से कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी गुजरात दौरा शुरू हुआ है. ये सियासी इत्तेफाक ही है जो पीएम मोदी और राहुल गांधी एक समय गुजरात में होंगे. ऐसे में समझा जा सकता है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए कैसे गुजरात सियासी एपिसेंटर बन गया है?

पीएम मोदी अपने दो दिवसीय दौरे पर रवाना हो चुके हैं. दादर नगर हवाले और दमन दीव के बाद पीएम मोदी शुक्रवार शाम गुजरात पहुंचेंगे. पीएम मोदी पहले सिलवासा में नमो अस्पताल (प्रथम चरण) का उद्घाटन करेंगे. इसके बाद 2580 करोड़ रुपये से अधिक की विकास की योजनाओं का उद्घाटन व शिलांयास करेंगे. इसके बाद पीएम मोदी शाम को गुजरात पहुंचेंगे, जहां शुक्रवार-शनिवार को अलग-अलग कार्यक्रम में शामिल होंगे. इससे पहले भी 2-3 मार्च को वह वन्यजीव दिवस पर कार्यक्रमों में शामिल हुए थे. तब उन्होंने जंगल सफारी का भी आनंद लिया था. अब वो फिर से दो दिन गुजरात में रहेंगे.

पीएम मोदी का गुजरात दौरा

प्रधानमंत्री गुजारत में ‘सूरत खाद्य सुरक्षा संतृप्ति अभियान’ का आगाज करेंगे. इसके बाद सूरत में उद्योगपतियों के साथ मुलाकात करेंगे. महिला दिवस पर पीएम मोदी शनिवार को नवसारी पहुंचेंगे, जहां पर लखपति दीदियों से बातचीत करेंगे. इसमें 1.1 लाख से अधिक महिलाएं भाग लेंगी. यह कार्यक्रम पुलिसिंग के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित करेगा, क्योंकि कानून-व्यवस्था के सभी पहलुओं के साथ-साथ कार्यक्रम की व्यवस्था भी महिला पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा संचालन किया जाएगा.

महिला दिवस पर होने वाले पीएम मोदी के कार्यक्रम में करीब ढाई हजार महिला पुलिस कर्मियां संभालेगी. कार्यक्रम की जिम्मेदारी कुल 2,165 महिला कांस्टेबल, 187 महिला पीआई, 61 महिला पीएसआई, 19 महिला डिप्टी एसपी, पांच महिला डीएसपी, एक महिला आईजीपी और एक महिला एडीजीपी संभालेंगी. पीएम मोदी इन लखपति दीदियों से संवाद करेंगे.

राहुल गांधी का गुजरात दौरा

राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा व न्याय यात्रा के बाद जनसंपर्क का अपना अभियान चालू रखा है. फिर चाहें वह संसद में या अपने विभिन्न दौरों पर उनका मेल मुलाकात का कार्यक्रम करते रहे हैं. गुरुवार को जहां राहुल गांधी मुंबई के धारावी इलाके में थे तो शुक्रवार को दो दिन के गुजरात दौरे पर पहुंचे हैं. राहुल ने मुंबई में धरावी में अलग-अलग काम करने वाले लोगों से मिले. बीएससी चुनावों के मद्देनजर राहुल गांधी का यह धारावी दौरा काफी अहम समझा जा रहा है.

राहुल गांधी गुजरात दौर पर अहमदाबाद में रहकर लगातार दो दिनों तक संगठन के अलग-अलग स्तर के नेताओं से मुलाकात करेंगे. राहुल गांधी पहले गुजरात प्रदेश कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात करेंगे और उसके बाद उनकी बैठक गुजरात कांग्रेस के राजनीतिक मामलों की समिति के लोगों के साथ होनी है. इसके अलावा कांग्रेस के जिला अध्यक्षों और जिला स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा करेंगे. आखरी मुलाकात राज्य भर के ब्लॉक स्तर के पार्टी स्तर पर होगी.

शनिवार को राहुल गांधी पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे और उसी दिन वह गुजरात के पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय निकाय चुनाव के पूर्व प्रत्याशियों से भी मुलाकात करेंगे. अगले महीने होने वाले कांग्रेस अधिवेशन से पहले राहुल गांधी का संगठन के लोगों के साथ यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है. गुजरात में 8-9 अप्रैल को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक होने वाली है. इस तरह 64 साल बाद कांग्रेस की ऐसी बैठक गुजरात में होने जा रही है. इससे पहले 1961 में भावनगर, सौराष्ट्र में बैठक की गई थी.

गुजरात कैसे बना सियासी एपिसेंटर

गुजरात बीजेपी-कांग्रेस दोनों के लिए सियासत का एक बड़ा एपिसेंटर बनता दिख रहा है. 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद संसद में बतौर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन में कहा था कि न सिफ इंडिया गठबंधन सत्ता में आएगा, बल्कि आने वाले समय में कांग्रेस गुजरात भी जीत कर दिखाएगी. माना जा रहा है कि पीएम मोदी व गृह मंत्री अमित शाह का गुजरात कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है. गुजरात बीजेपी की सियासी प्रयोगशाला बन चुकी है और तीन दशक से उसका कब्जा बरकरार है.

कांग्रेस गुजरात की सत्ता से बाहर होने के बाद दोबारा से वापसी नहीं कर सकी है. कांग्रेस तमाम जतन कर चुकी है, लेकिन उसका कोई भी सियासी दांव कामयाब नहीं रहा. गुजरात में राहुल के सामने कांग्रेस को एकजुट रखने के साथ ही चुनाव के लिए पार्टी में नई जान फूंकना है. राहुल का दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अक्सर कांग्रेस नेतृत्व पर यह सवाल उठते रहते हैं कि वह राज्य को इग्नोर करता रहता है और भाजपा की लगातार सफलता की वजह यही है.

मोदी और राहुल दौरे से मायने

पीएम मोदी से लेकर राहुल गांधी तक यहां समय बिताने की रणनीति अपना रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का दौरा पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कांग्रेस तीन दशक से भी ज्यादा समय से राज्य की सत्ता से दूर है. अंगद की तरह पैर जमाए बीजेपी को काउंटर करने के लिए रणनीति पर कांग्रेस को काम करने और चुनौती देने का चैलेंज है. ऐसे में माना जा रहा है कि राहुल का यह दौरा बेजान पड़ी कांग्रेस में एक नई ऊर्जा व जोश भरेगा.

राहुल के दौरे पहले पिछले हफ्ते कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल अहमदाबाद का दौरा करके गए. माना जा रहा है कि वेणुगोपाल का यह दौरा राहुल के दौरे की तैयारियों के साथ-साथ अधिवेशन की तैयारियों का जायजा लेने से भी जुड़ा था. गुजरात कांग्रेस का मानना है कि कांग्रेस अधिवेशन के ऐलान के बाद से बीजेपी में चिंता साफ दिखाई दे रही है, क्योंकि उसके बाद से पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह राज्य के चक्कर लगने शुरू कर दिए हैं. पीएम मोदी अपने हर दौरे से सियासी एजेंडा सेट कर रहे हैं. इस बार उनकी नजर महिला वोटबैंक है, जिसके लिए महिला दिवस का दिन चुना है.

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