ब्रेकिंग
IPS Vishwas Nangre Patil: 26/11 के हीरो और नागपुर के नए पुलिस आयुक्त; जानिए कौन हैं पाटिल और क्यों च... Agra-Lucknow Expressway Accident: स्लीपर बस और ट्रेलर की टक्कर में 2 की मौत; 2 दर्जन से अधिक यात्री ... Etah Moharram Accident: एटा में मोहर्रम जुलूस के दौरान बड़ा हादसा; हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से य... Ayodhya Ram Mandir Case: दान पात्र चोरी मामले में 8 गिरफ्तार; विपक्षी पार्टियों ने ट्रस्ट पर लगाए गं... Indore High Court Order: धार के इमामबाड़े में मोहर्रम कार्यक्रमों पर कोर्ट का बड़ा फैसला; 1 जुलाई तक ... Chhindwara Ration News: सरकारी दुकानों से 3 महीने से गायब है शक्कर; पीले कार्डधारक चाय के लिए मोहताज MP Teacher Transfer News: तकनीकी खामियों के कारण कई शिक्षक नहीं कर पाए आवेदन; आयु सीमा बढ़ाने की उठी ... Guna POCSO Court Verdict: नाबालिग छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म में कराटे कोचों को आजीवन कारावास; गुरु-... Indore Health News: संजीवनी क्लिनिक में हेल्थ एटीएम बदहाल; किट और ऑपरेटर के अभाव में ठप पड़ी स्वास्थ्... Gwalior High Court Order: लापता युवती की तलाश के लिए हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; UIDAI को आधार संबंधी जान...
मध्यप्रदेश

यात्रीगण कृपया ध्यान दें… इंदौर-दाहोद परियोजना 900 केस में अटकी है

धार। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर की रेल कनेक्टिविटी आज भी ‘डेड एंड’ पर अटकी हुई है। वर्षों पहले शुरू की गई इंदौर-दाहोद रेल परियोजना, जो महाराष्ट्र को मध्यप्रदेश होते हुए गुजरात से जोड़ेगी, 70 प्रतिशत काम पूरा हो जाने के बाद भी न्यायालयीन विवादों में उलझी है। करीब 204 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन से इंदौर से मुंबई की दूरी कम होगी और मुंबई, गुजरात व मध्य प्रदेश को एक नया रेल मार्ग भी मिलेगा।

परियोजना का सबसे बड़ा रोड़ा जमीन अधिग्रहण और मुआवजा विवाद है। पीथमपुर से लेकर तिरला तक ही लगभग 900 प्रकरण न्यायालयों में लंबित हैं। इतनी संख्या में प्रकरण लंबित होने से रेल परियोजना की रफ्तार कई जगह रुक गई है। किसानों और जमीन मालिकों की आपत्तियां राजस्व न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी हैं। इन विवादों के चलते कई स्थानों पर निर्माण कार्य रुक गया है।

यह परियोजना मध्य प्रदेश के साथ-साथ गुजरात और महाराष्ट्र के लिए भी महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश को इस परियोजना के पूरा होने का दोहरा लाभ यह है कि डेड एंड पर मौजूद इंदौर को सीधे गुजरात के लिए नए रास्ते से कनेक्टिविटि मिल जाएगी। पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के कंटेनर भी बडौदरा होते हुए मुंबई तक जल्दी पहुंच सकेंगे।

इससे उद्योगों को अपनी सामग्री भेजने के लिए तेज और सस्ता परिवहन माध्यम तो मिलेगा ही सड़क मार्ग पर निर्भरता कम होने से परिवहन लागत भी कम हो जाएगी। इस मार्ग से इंदौर से मुंबई की दूरी भी 55 किमी कम हो जाएगी। वर्तमान में इंदौर से मुंबई का सफर करने के लिए 830 किलोमीटर की दूरी तय करना होती है जो रतलाम के रास्ते होती है।

समय सीमा में नहीं हो पाएगा ट्रायल

रेलवे ने पीथमपुर से धार तक का ट्रायल दिसंबर 2025 तक करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन लगातार चल रहे विवाद और अब वर्षा के कारण भी काम प्रभावित है। जमीन की बढ़ती कीमतें, मुआवजे को लेकर असहमति और न्याय की अपेक्षाएं यही तीन बड़े कारण हैं जिनसे यह महत्वाकांक्षी परियोजना अटक गई है। ऐसे में रेलवे को ट्रायल की समय सीमा बढ़ाना पड़ेगी।

जमीन की कीमत और मुआवजे का विवाद

  • राजस्व विभाग की गाइडलाइन के अनुसार पीथमपुर-सागौर में प्रति हेक्टेयर जमीन की कीमत लाखों में है, जबकि उसी क्षेत्र में एक बीघा जमीन एक करोड़ रुपये तक में बिक रही है।
  • सरकारी दर और बाजार दर के अंतर को लेकर किसान नाखुश हैं और न्यायालय का सहारा ले रहे हैं।
  • न्यायालयीन प्रकरण, जिला राजस्व न्यायालय, आयुक्त (आर्बिट्रेशन) हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक लंबित हैं।

मुआवजा तय करने का पैमाना

अधिग्रहित क्षेत्र की जमीन की रजिस्ट्री की तीन साल की दरें देखी जाती हैं। इन तीन सालों में हुई सबसे अधिकतम दर को आधार मानकर मुआवजा तय होता है। अधिवक्ता सुनील रघुवंशी ने बताया कि किसानों की मांग है कि जिस तरह सरकार ने पीथमपुर क्षेत्र में लाजिस्टिक हब के लिए गाइडलाइन में बदलाव किया था, वैसे ही प्रयास इस मामले में भी जरूरी हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता विशाल बाहेती के अनुसार भू-अर्जन रेलवे अधिनियम के तहत किया जाता है। इसके लिए मार्केट रेट के हिसाब से मुआवजा देना होगा। मुआवजे का भुगतान करने के बाद ही जमीन अधिग्रहित की जा सकती है। इसके बाद ही कब्जा लेने की प्रक्रिया होगी। चूंकि यह मामला जनहित से जुड़ा है, इसलिए कानूनन रेलवे को जमीन अधिग्रहित करने का अधिकार है।

इंदौर–दाहोद रेल परियोजना

  • कुल लंबाई (दूरी) : लगभग 204 किलोमीटर
  • परियोजना : वर्ष 2008-09 में स्वीकृत
  • प्रारंभिक अनुमानित लागत : करीब 640 करोड़ रुपये
  • लागत (2025 तक) : बढ़कर लगभग 2,200 करोड़ से अधिक पहुंच गई है।

Related Articles

Back to top button