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हिमाचल प्रदेश

दरक रहे पहाड़, जमीन पर आफत; हिमाचल में 1337 सड़कों पर रुक गई रफ्तार; इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट

हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से हाहाकार मचा हुआ है. यह सिलसिला दो सितंबर यानी मंगलवार को भी जारी रहा. लगातार हो रही बारिश के चलते भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ से मकान ढहने की घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई. साथ ही प्रदेश में चार राष्ट्रीय राजमार्गों सहित 1,337 सड़कें बाधित हो गईं. स्थानीय मौसम विभाग ने बुधवार को कांगड़ा, मंडी, सिरमौर और किन्नौर जिलों के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. जबकि, ऊना और बिलासपुर जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है.

इस बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य को आपदा प्रभावित घोषित कर दिया गया है. उन्होंने केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज प्राप्त करने की अपील की. साथ ही आपदा का शिकार हुए परिवारों के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया. उन्होंने बताया कि जिन लोगों के घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उन्हें सात लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी और यदि घर के अंदर का सामान नष्ट हो गया है तो अतिरिक्त 70,000 रुपये दिए जाएंगे. साथ ही साथ आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों को एक लाख रुपये दिए जाएगा.

मकान ढहने से महिला की मौत

लगातार हो रही बारिश के चलते सोलन जिले के समलोह गांव में सोमवार देर रात एक मकान ढह गया. इस दौरान मकान के मलबे में दबकर एक महिला की मौत हो गई. मृतक की पहचान हेमलता के रूप में हुई है. इस हादसे में मृतका के पति हीम राम, चार बच्चे और 85 वर्षीय दिव्यांग सास को मामूली चोटें आईं. प्रदेश के कुल्लू जिले से भी इसी तरह की घटना सामने आई है. जिले के ढालपुर में बारिश के बाद मकान ढहने से मलबे से एक पुरुष और एक महिला को निकाला गया. पुलिस ने बताया कि बाद में महिला की मौत हो गई.

शिमला में सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थान बंद

राजधानी शिमला में कोचिंग सेंटर और नर्सिंग संस्थानों समेत सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों को बुधवार को बंद रखने का आदेश जारी किया गया है. उपायुक्त अनुपम कश्यप ने मंगलवार शाम जारी एक आदेश में कहा कि शिमला में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्वानुमान में जिले के कई स्थानों पर भूस्खलन की प्रबल संभावना जताई है. जारी आदेश के मुताबिक, ‘शिक्षकों और प्रशासनिक कर्मियों को शैक्षणिक संस्थानों में आने से छूट दी गई है और ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जाएंगी’

भूस्खलन से कई घर क्षतिग्रस्त

मंडी शहर में पड्डल गुरुद्वारा क्षेत्र के पीछे सोमवार रात भूस्खलन होने से दो घर क्षतिग्रस्त हो गए. हालांकि, समय रहते लोगों को सुरक्षित निकाल लिये जाने के कारण किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. अधिकारियों ने बताया कि दो प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है. जबकि, आस-पास के घरों में रहने वाले लोग अपना घर खाली कर चुके हैं.

कुल्लू जिले के अन्नी इलाके में भूस्खलन के बाद एक निर्माणाधीन घर क्षतिग्रस्त हो गया. किसी के हताहत होने की खबर नहीं है क्योंकि घर को 2023 की मानसून आपदा के दौरान पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया गया था और वह खाली था. बिलासपुर जिले में नैना देवी इलाके के डडवाल गांव में दरारें पड़ने के बाद 16 परिवारों को अपने घर खाली करने को कहा गया.

लगातार हो रही आफत की बारिश के चलते मनालसू नाले में जलस्तर बढ़ जाने के कारण मनलाई के लगभग नौ गांवों का संपर्क टूट गया.

HP पुलिस में चयनित उम्मीदवारों का दस्तावेज सत्यापन स्थगित

इन आपदाओं के तलते हिमाचल प्रदेश पुलिस में आरक्षी पद के लिए चयनित उम्मीदवारों का दस्तावेज सत्यापन को स्थगित कर दिया गया है. क्योंकि भारी बारिश के कारण प्रदेश की कई सड़कें बंद है, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया है. जारी एक बयान में कहा गया है कि चार से नौ सितंबर तक होने वाला सत्यापन अभियान अब 24 से 29 सितंबर तक चलेगा.

राज्य के लगभग हर जिले में सड़कें बाधित

राज्य के मंडी में 282 सड़कें, शिमला में 255, चंबा में 239, कुल्लू में 205 और सिरमौर जिले में 140 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) 3 (मंडी-धरमपुर रोड), एनएच 305 (औट-सैंज), एनएच 5 (ओल्ड हिंदुस्तान-तिब्बत रोड), एनएच 21 (चंडीगढ़-मनाली रोड), एनएच 505 (खाब से ग्रामफू रोड) और एनएच 707 (हाटकोटी से पोंटा) अवरुद्ध हो गए हैं.

शिमला-कालका राष्ट्रीय राजमार्ग 5 सोलन जिले के सनवारा में भूस्खलन के बाद अवरुद्ध हो गया. इसके चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यह राजमार्ग हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग के नाम से भी जाना जाता है.

आंतरिक क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब है, जहां सड़कें कई दिनों से बंद हैं. सेब उत्पादक अपनी फसल को बाजारों तक भेजने में असमर्थ हैं.

अधिकारियों का कहना है कि सोमवार को शिमला-कालका रेलमार्ग पर भूस्खलन के बाद रेलगाड़ियां रद्द कर दी गईं. यहां ट्रेन सेवा पांच सितंबर तक स्थगित रहेगी.

अधिकारियों ने बताया कि चंबा जिले में फंसे लगभग 5,000 मणिमहेश तीर्थयात्रियों को वापस घर भेजने के प्रयास जारी हैं. उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 16 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है.

हर जगह हो रही बारिश

नैना देवी में सोमवार शाम 198.2 मिलीमीटर (मिमी) बारिश हुई. जबकि, मनाली में 89 मिमी, रोहड़ू में 80 मिमी, मंडी में 78.2 मिमी, धर्मशाला में 76.3 मिमी, कुकुमसेरी में 74.2 मिमी, चंबा में 72 मिमी, भुंतर में 69.7 मिमी, जोत में 61.2 मिमी, नाहन में 59.7 मिमी, बग्गी में 58.5 मिमी, केलांग और ऊना में 57-57 मिमी, नादौन में 53 मिमी और ओलिंडा में 50 मिमी बारिश हुई.

एसईओसी के आंकड़ों के अनुसार, मानसून शुरू होने के बाद से बारिश से जुड़ी घटनाओं और सड़क दुर्घटनाओं में कम से कम 340 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 41 लोग लापता हैं. एसईओसी ने बताया कि सोमवार को राज्य भर में 2180 बिजली ट्रांसफार्मर और 777 जलापूर्ति योजनाएं बाधित रहीं.

राज्य को अब तक 3158 करोड़ का नुकसान

हिमाचल प्रदेश में 20 जून को मानसून के दस्तक देने के बाद से राज्य में 95 बार अचानक बाढ़, 45 बार बादल फटने और भीषण भूस्खलन की 115 घटनाएं हुई हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस मानसून में अब तक राज्य को 3,158 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

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