ब्रेकिंग
बंगाल में भर्ती घोटालों की जांच तेज: सीएम शुभेंदु अधिकारी ने भ्रष्ट अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की दी... भोपाल: स्मार्ट मीटर ग्राहकों को मिली 5 करोड़ की बड़ी राहत, 'टाइम ऑफ डे' टैरिफ से घटे बिजली बिल Gyan Bharatam Mission: दतिया राजपरिवार की 525 दुर्लभ पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण, ऐप पर डेटा अपल... Ladli Behna Yojana: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जारी की लाडली बहनों की 36वीं किस्त, नरसिंहपुर में ब... Bhopal Railway News: पुणे और बिलासपुर मंडल में काम से भोपाल की कई ट्रेनें प्रभावित, देखें निरस्त ट्र... Dhar News: मार्शल आर्ट प्रशिक्षक बलवंत सिंह देवड़ा को मिली सिर कलम करने की धमकी, पुलिस जांच में जुटी Seoni News: सिवनी में लोकायुक्त का दोहरा प्रहार, एएसआई और लिपिक रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार TVK Government: तमिलनाडु में 'थलपति' विजय की सरकार सुरक्षित, कांग्रेस और AIADMK बागियों ने दिया साथ Sonia Gandhi Health Update: सोनिया गांधी मेदांता अस्पताल में भर्ती, रूटीन चेकअप के बाद वापस दिल्ली ल... West Bengal News: सुवेंदु अधिकारी ने चुनी भवानीपुर सीट, नंदीग्राम छोड़ेंगे; विधानसभा में ली विधायक प...
धार्मिक

श्राद्ध में कौवे ने नहीं लगाया भोग तो क्या करें? जानें पंचबलि भोग का महत्व और सही तरीका

 हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है. इस दौरान अपने पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं. शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि श्राद्ध का भोजन सबसे पहले कौवे को अर्पित करना चाहिए, क्योंकि कौवा पितरों का दूत माना गया है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि श्राद्ध वाले दिन घर के आंगन या छत पर कौवे दिखाई नहीं देते. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कौवा न मिलें, या कौवे भोजन ग्रहण नहीं करें तो पितरों का भोजन किसे अर्पित किया जाए?

कौवा भोग न लगाएं तो क्या करें?

अगर श्राद्ध के दिन आप कौवे को भोजन ग्रहण न करा पाएं तो आप कौवे के हिस्से का भोजन गाय या कुत्ते या चींटी को खिला सकते हैं. गाय में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है और कुत्ते को यम का प्रतीक माना गया है. इसलिए गाय या कुत्ते को भोजन कराने से पितरों तक आपका भोग पहुंच जाता है. इसके अलावा, आप कौवे के हिस्से का भोजन किसी जलकुंड, नदी, या तालाब में मछलियों को भी डाल सकते हैं.

पंचबलि का महत्व और सही तरीका

श्राद्ध में पंचबलि भोग का बहुत बड़ा महत्व है. क्योंकि पितरों का भोजन गाय, कुत्ते, कौवे, चींटी और देवताओं को खिलाया जाता है, इसे पंचबलि भोग कहते हैं. यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है. ऐसी मान्यता है कि इन पांचों को भोजन कराने से पितरों को भोजन प्राप्त होता है और वे तृप्त होते हैं. लेकिन इन सभी में कौवे का स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.

पंचबलि भोग निकालते समय इन बातों का ध्यान रखें?

पंचबलि के लिए भोजन: पंचबलि के लिए सबसे पहले एक पत्ते पर भोजन रखें. यह भोजन वही होना चाहिए जो आपने श्राद्ध के लिए बनाया है.

सही क्रम: पंचबलि हमेशा एक विशेष क्रम में निकाली जाती है.

गौ बलि: सबसे पहले एक पत्ते पर भोजन रखकर गाय को खिलाएं.

श्वान बलि: इसके बाद दूसरे पत्ते पर भोजन रखकर कुत्ते को खिलाएं.

काक बलि: तीसरे पत्ते पर भोजन रखकर कौवे के er67 निकालें.

अगर कौवा न मिले तो उसके हिस्से का भोजन गाय या कुत्ते को खिलाएं.

देव बलि: चौथे पत्ते पर भोजन देवताओं के लिए रखें. इसे जल में प्रवाहित किया जाता है.

पिपीलिका बलि: आखिरी में, पांचवें पत्ते पर भोजन चींटियों के लिए जमीन पर रखें.

इन पांचों जीवों को भोजन कराने से न केवल पितरों का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि आपके द्वारा किए गए तर्पण और श्राद्ध को भी पूर्णता मिलती है. यह माना जाता है कि इन जीवों के माध्यम से ही पितरों तक हमारा भोग और श्रद्धा पहुंचती है.

Related Articles

Back to top button