ब्रेकिंग
Haryana PGT Seniority List Revised: हरियाणा में दिव्यांग श्रेणी के 19 पीजीटी शिक्षकों की वरिष्ठता सू... Haryana Road Safety Initiative: हरियाणा में सड़क किनारे खड़े अनुपयोगी बिजली खंभों को हटाने का अभियान... HPSC HCS Final Result 2026: हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी, अभिषेक सरोहा ने किया टॉ... बेटी से छेड़खानी करने वाले का हाथ काटने वाले को 2 लाख का इनाम देंगे सांसद पप्पू यादव Kasganj Crime News: कासगंज में डेढ़ माह के मासूम बच्चे की खरीद-फरोख्त का खुलासा, मां समेत पांच आरोपी... Shiva Sharma Murder Case: लखनऊ में शिवा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे कर सकती है सरेंडर, पुल... कुरुक्षेत्र के पास जम्मू-कश्मीर जा रही बस पर पथराव, सीएम उमर अब्दुल्ला ने जताई नाराजगी साधारण परिवार की बेटी से कैसे अंडरवर्ल्ड और माफिया के संपर्क में आई श्रद्धा दुबे? जानिए पूरी क्राइम ... आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग, जगन ने नायडू सरकार पर लगाया ‘जंगल राज’ का आरोप ग्वालियर सड़क हादसे पर सीएम मोहन यादव का कड़ा एक्शन, सीएसपी हटाए गए और 3 थाना प्रभारियों समेत 8 पुलि...
बिहार

झूठी कहानी, झूठा गवाह! डॉक्टर को फंसाने के मामले में बिहार पुलिस पर गिरी गाज, IG ने लिया बड़ा एक्शन, कई पुलिसकर्मी नपे

भागलपुर जिले में पुलिस विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है. पटना के एक डॉक्टर को झूठे गवाहों और फर्जी बयानों के आधार पर फंसाने की कोशिश करने वाले पुलिस अधिकारियों पर अब कार्रवाई हुई है. रेंज आईजी की जांच में दोषी पाए जाने पर दो इंस्पेक्टर और दो दरोगा के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की गई है.

पटना के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने रेंज आईजी को लिखित शिकायत दी थी कि भागलपुर पुलिस ने उन्हें झूठे केस में फंसाने की कोशिश की. उनका आरोप था कि जांच अधिकारी और थाना स्तर के कुछ पुलिसकर्मियों ने जानबूझकर गलत रिपोर्ट दर्ज की और फर्जी गवाहों के बयान के आधार पर मामला आगे बढ़ाया.

जांच में हुए बड़े खुलासे

मामले की गंभीरता को देखते हुए रेंज आईजी ने एक स्वतंत्र जांच टीम बनाई. जांच में पुख्ता सबूत मिले कि गवाहों के बयान मनगढ़ंत तरीके से तैयार किए गए थे. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पुलिस अधिकारियों ने व्यक्तिगत लाभ या दबाव में आकर गलत कार्रवाई की थी.

जांच पूरी होने के बाद रेंज आईजी ने दो इंस्पेक्टर और दो दरोगा को दोषी पाया. उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है. सूत्रों के मुताबिक, इन अधिकारियों पर निलंबन और सेवा अभिलेख में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने का आदेश जारी किया गया है. जिन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी उनमें तत्कालीन विधि व्यवस्था अंचल इंस्पेक्टर शांता सुमन और जोग्सर थानाध्यक्ष कृष्णनंदन कुमार सिंह शामिल हैं.

पुलिस विभाग में मचा हड़कंप

इस कार्रवाई के बाद भागलपुर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है. वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ निर्देश दिया है कि अगर कोई पुलिसकर्मी कानून की सीमा लांघेगा या किसी निर्दोष को फंसाने की कोशिश करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. रेंज आईजी ने बयान जारी कर कहा कि पुलिस का काम न्याय दिलाना है, किसी को परेशान करना नहीं. जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की गलती दोबारा न हो.

क्या था पूरा मामला?

पटना के इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान के वरीय चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नवल किशोर सिंह ने 21 दिसंबर 2024 को कहलगांव के शंकर पाल समेत 1520 लोगों के खिलाफ जोग्सर थाने में केस दर्ज कराया था. उनका आरोप था कि इन लोगों ने उनके मकान की दीवार तोड़ी, जमीन में जबरन प्रवेश किया, सफाई की और पुरानी खिड़की उखाड़ दी.

पुलिस ने जांच के बाद इस मामले को असत्य श्रेणी में डालते हुए भूमि विवाद बताकर फ़ाइनल रिपोर्ट लगा दी थी. रिपोर्ट में दो गवाहों के बयान बिल्कुल एक जैसे थे. जब रेंज आईजी विवेक कुमार ने समीक्षा की तो इन गवाहों के बयानों में ही पुलिस अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत का खुलासा हो गया. जांच में मिली विसंगतियों को पक्षपातपूर्ण कार्रवाई मानते हुए चारों अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया और विभागीय कार्रवाई शुरू की गई.

Related Articles

Back to top button