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गोल्ड मार्केट में बड़ा उतार-चढ़ाव: रिकॉर्ड ऊंचाई से गिरा सोना, क्या ₹1 लाख के आंकड़े को तोड़कर नीचे जाएगी कीमत?

त्योहारों का मौसम खत्म होते ही सोने की कीमतों में जो आग लगी हुई थी, वह अब ठंडी पड़ती दिख रही है. जो सोना कुछ दिनों पहले तक आसमान छू रहा था और नए रिकॉर्ड बना रहा था, वह अचानक से सस्ता होने लगा है. रिकॉर्ड ऊंचाई से गिरकर सोने का भाव 1.21 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ गया है, जबकि कुछ समय पहले यह 1.32 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया था. इस भारी गिरावट ने बाजार में हलचल मचा दी है. जिन लोगों ने ऊंची कीमतों पर खरीदारी की, वे थोड़े परेशान हैं, वहीं जो लोग शादी-ब्याह के सीजन के लिए खरीदारी का इंतजार कर रहे थे, उनके मन में उम्मीद जगी है.

बाजार में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि क्या यह गिरावट जारी रहेगी? क्या सोने का भाव एक बार फिर 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ सकता है? यह समझना जरूरी है कि यह गिरावट सिर्फ एक छोटा-मोटा ‘करेक्शन’ है या फिर लंबी मंदी की शुरुआत.

त्योहारों के बाद क्यों ‘सस्ता’ हुआ सोना?

सोने की कीमतों में आई इस तेज गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं. इस महीने की शुरुआत में सोने ने जब अपना सर्वकालिक उच्च स्तर छुआ, तो निवेशकों को मुनाफा कमाने का एक बड़ा मौका दिख गया.

सबसे पहला और बड़ा कारण है ‘मुनाफावसूली’ (Profit Booking). जिन निवेशकों ने कम दामों पर सोना खरीदकर रखा था, उन्होंने कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर देखते ही बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू कर दी. जब बाजार में अचानक बिक्री का दबाव बढ़ता है, तो कीमतें स्वाभाविक रूप से नीचे आती हैं.

दूसरा बड़ा कारण है डॉलर की मजबूती. अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है. सोने और डॉलर के बीच अक्सर उलटा रिश्ता देखा जाता है. जब डॉलर मजबूत होता है, तो दुनिया के अन्य देशों के लिए डॉलर में खरीदा जाने वाला सोना महंगा हो जाता है, जिससे उसकी मांग घट जाती है. निवेशक भी अपना पैसा सोने जैसे ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित निवेश) से निकालकर मजबूत होते डॉलर में लगाना पसंद करते हैं.

तीसरा कारण है मांग में कमी. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, त्योहारों (जैसे धनतेरस और दिवाली) के दौरान जो खरीदारी का जबरदस्त माहौल था, वह अब सामान्य हो गया है. त्योहारी मांग खत्म होने से भी कीमतों पर दबाव बना है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार का बड़ा खेल

यह गिरावट सिर्फ भारतीय बाजारों तक सीमित नहीं है, इसका असली असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिख रहा है. कुछ ही दिन पहले, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ‘स्पॉट गोल्ड’ का भाव 4,381.21 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया था. लेकिन वहां से इसमें 6% से ज्यादा की भारी गिरावट आई और यह 4,100 डॉलर प्रति औंस के भी नीचे फिसल गया.

विशेषज्ञों का कहना है कि यह 2013 के बाद सोने में आई सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट में से एक है. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी बड़ी उथल-पुथल होती है, तो उसका सीधा असर भारत में सोने की कीमतों पर पड़ता है. भारत में 1.32 लाख से 1.21 लाख रुपये तक का सफर इसी वैश्विक गिरावट का नतीजा है. अस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के सीईओ दर्शन देसाई के अनुसार, इस गिरावट ने सोने की नौ हफ्तों से चली आ रही लगातार तेजी पर भी ब्रेक लगा दिया है.

क्या यह गिरावट है या खरीदारी का मौका?

अब सबसे अहम सवाल पर आते हैं कि आगे क्या होगा? क्या सोने का भाव 1 लाख रुपये से नीचे जाएगा? ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट एक ‘टेक्निकल करेक्शन’ है. जब कोई चीज बहुत तेजी से और बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो उसमें थोड़ी गिरावट आना स्वाभाविक है. यह बाजार को स्थिर करने का एक तरीका है.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेशकों का ध्यान अभी सोने से हटकर दूसरी जगहों पर भी जा रहा है. अमेरिका-भारत के बीच व्यापार समझौते और अमेरिका-चीन के बीच बातचीत की सकारात्मक खबरों ने बाजार का ‘रिस्क’ लेने का मिजाज बढ़ा दिया है. यानी निवेशक अब सोने जैसे सुरक्षित निवेश की जगह शेयर बाजार जैसे ‘रिस्क’ वाले निवेशों की ओर देख रहे हैं, जिससे सोने पर दबाव बढ़ा है.

हालांकि, इस गिरावट के लंबे समय तक टिकने की संभावना कम है. आईबीजेए की उपाध्यक्ष अक्षा कम्बोज का कहना है कि शॉर्ट-टर्म में खरीदारी भले ही धीमी हो, लेकिन लॉन्ग-टर्म यानी लंबी अवधि के निवेशक आज भी सोने को ही सबसे सुरक्षित दांव मान रहे हैं.

शादी का सीजन फिर बढ़ा सकता है चमक

कीमतों में इस गिरावट के बीच एक बड़ा फैक्टर है जो सोने के भाव को फिर से ऊपर की ओर धकेल सकता है, और वह है भारत में शादियों का सीजन. त्योहारों के बाद अब शादियों का सीजन शुरू होने वाला है, जिसमें भारत में बड़े पैमाने पर सोने और गहनों की खरीदारी होती है.

जैसे ही शादी-ब्याह की यह मांग बाजार में आएगी, कीमतों को एक मजबूत सहारा मिल सकता है. इसलिए, एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट खरीदारों के लिए एक मौका हो सकती है, क्योंकि शादी के सीजन की मांग के चलते कीमतों में फिर से उछाल आने की पूरी संभावना है. ऐसे में, सोने का भाव 1 लाख रुपये के नीचे जाने की अटकलें फिलहाल दूर की कौड़ी लगती हैं. यह गिरावट एक अस्थायी पड़ाव हो सकती है, न कि लंबी मंदी की शुरुआत.

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