ब्रेकिंग
Supreme Court Hearing on SIR: चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) फैसलों पर टली सुप्रीम कोर्ट की... Greater Noida Robotics Park: उत्तर प्रदेश में बनेगा देश का पहला 'प्रगति' रोबोटिक्स पार्क, योगी सरकार... Delhi High Court Notice: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR पर दिल्ली HC का नोटिस, पत्... Diwali and Chhath Puja Health Tips: दिवाली और छठ की व्यस्तता में सेहत का ऐसे रखें ख्याल, थकान और तना... डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में दी डेटा प्रोटेक्शन एक्ट को चुनौती, पत्रकारिता प... Delhi Ramlila Maidan Rally: दिल्ली में 1 नवंबर को होगी इंडिया गठबंधन की महारैली, 10 लाख लोगों के जुट... Flex-Fuel Vehicles in India: केंद्र सरकार का बड़ा कदम, 100% एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को मंजूरी; नि... Jan Suraaj Digital Manager Death: प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज को बड़ा झटका, डिजिटल मैनेजर देवपा... Ujjain News: सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया सिंहस्थ 2028 की 539 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का भूमिपूजन,... Rajasthan Drought News: राजस्थान में सूखे की मार, 14 जिलों की 80 तहसीलें घोषित हुईं गंभीर और मध्यम स...
देश

असहमति को दबाना गंभीर मामला! सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका पर SC ने केंद्र सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. अदालत ने वांगचुक की नजरबंदी के खिलाफ संशोधित अर्जी पर केंद्र व अन्य से 10 दिनों में जवाब मांगा है. ये अर्जी सोनम वांगचुक की पत्नी ने दायर की थी. मामले की अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी.

संशोधित अर्जी में कहा गया है कि यह असहमति को दबाना व राजनीतिक प्रतिशोध का मामला है. अर्जी में सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनके पति की नज़रबंदी सार्वजनिक व्यवस्था या सुरक्षा की वास्तविक चिंताओं पर आधारित नहीं है. बल्कि असहमति के अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे एक सम्मानित नागरिक को चुप कराने की एक सोची-समझी कोशिश है.

याचिका में क्या-क्या कहा गया?

अपनी नज़रबंदी को चुनौती देने के लिए आधार जोड़ने की मांग वाली एक याचिका में अंगमो ने गिरफ्तारी से पहले वांगचुक के खिलाफ की गई कई कार्रवाइयों का हवाला दिया है. जिसमें उनके एनजीओ के लिए विदेशी फंडिंग प्रमाणपत्र रद्द करना भी शामिल है.

वांगचुक को सितंबर में लेह हिंसा के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था. संशोधित याचिका में कहा गया कि यह पूरी तरह से हास्यास्पद है कि लद्दाख और पूरे भारत में जमीनी स्तर पर शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण में अपने योगदान के लिए राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तीन दशकों से भी अधिक समय तक पहचाने जाने के बाद सोनम वांगचुक को अचानक निशाना बनाया गया. चुनावों से मात्र दो महीने पहले और एबीएल, केडीए और गृह मंत्रालय के बीच अंतिम दौर की बातचीत के बाद, उन्हें भूमि पट्टे रद्द करने, एफसीआरए रद्द करने, सीबीआई जांच शुरू करने और आयकर विभाग से समन भेजने के नोटिस दिए गए.

याचिका में आगे कहा गया है कि उनकी हिरासत पांच एफआईआर पर आधारित थी, जिनमें से तीन में उनके खिलाफ किसी भी आरोप का उल्लेख तक नहीं है. चौथी प्राथमिकी वांगचुक के खिलाफ है, लेकिन यह हिंसा से जुड़ी नहीं है. पांचवीं प्राथमिकी 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा से संबंधित है.

Related Articles

Back to top button