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छत्तीसगढ़

SIR प्रक्रिया काफी जटिल, देश में पहली बार मतदाताओं को देना पड़ रहा प्रमाण: टीएस सिंहदेव

सूरजपुर: जिला कांग्रेस कमेटी ने गुरुवार को एक दिवसीय बीएलए (बूथ लेवल ऐजेंट) प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया. इस कार्यक्रम में पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव भी पहुंचे. टीएस ने विशेष गहन पुनरीक्षण(SIR) को लेकर कार्यकर्ताओं से चर्चा की और जानकारी साझा किया.

“SIR अनावश्यक और जटिल प्रक्रिया”: टीएस सिंहदेव ने SIR की प्रकिया को काफी जटिल बताया. पूर्व मंत्री ने कहा “एसआईआर प्रक्रिया आसान नहीं है. सभी को दो दो पासपोर्ट फोटो खिंचानी पड़ेगी. 10 रुपये का अतिरिक्त भार लोगों पर डाल दिया है. बिजली बिल पहले से बढ़ा हुआ है. सूरजपुर में कितने फोटो ग्राफर है जो लगभग 5 लाख लोगों का इतनी जल्दी फोटो खींच सकेंगे. गांव गांव के लोग कैसे इतनी जल्दी फोटो खिंचवा पाएंगे. इसके बाद फॉर्म भरने की प्रक्रिया, दस्तावेज लगाना भी कठिन है. अनावश्यक और जटिल प्रक्रिया कर दी गई है.”

“अपना प्रमाण देने भटक रहा मतदाता”: सिंहदेव ने कहा कि देश के प्रजातांत्रिक इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि मतदाता को खुद अपना प्रमाण देना पड़ रहा है जबकि ये काम चुनाव आयोग का है. वे घर घर जाए और लोगों का नाम लिखे. कहीं कोई गलत लगता है कि उसका नाम मतदाता सूची से हटाएं. बात विदेश की हो रही है तो यहां कौन विदेशी है. गांव के लोग, एक एक मतदाता को फोटो कॉपी कर लगाना है.

सिंहदेव ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के विपरीत केंद्र सरकार ने बहुमत के आधार पर ऐसा नियम बना दिया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की जगह प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत एक केंद्रीय मंत्री को समिति में डाल दिया. जिसकी सत्ता होगी, उसी के अनुसार नियुक्ति होगी.

एसआईआर (SIR) का शेड्यूल:

4 नवंबर से 4 दिसंबर: डोर टू डोर वेरिफिकेशन

9 दिसंबर: मसौदा सूची होगी जारी

9 दिसंबर से 8 जनवरी: दावे और आपत्तियां दर्ज कर सकेंगे

9 दिसंबर से 31 जनवरी: दस्तावेजों और दावों की जांच कर अंतिम निर्णय

7 फरवरी: अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी

SIR वाले राज्यों में विस चुनाव कब: चुनाव आयोग ने 12 राज्यों में SIR का ऐलान किया है. इन राज्यों में अगले 3 साल में विधानसभा चुनाव होने हैं. तमिलनाडु, पं. बंगाल, केरल, पुडुचेरी में 2026 में चुनाव होने हैं. वहीं उत्तर प्रदेश, गुजरात और गोवा में 2027 में चुनाव होने हैं. छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में 2028 में चुनाव होने हैं.

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