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छत्तीसगढ़

अबूझमाड़ में अब गोलियों की जगह गूंजेगी विकास की किलकारी, सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने की कवायद शुरू

नारायणपुर: अबूझमाड़ जो कभी नक्सल प्रभावित इलाका हुआ करता था उसकी पहचान अब तेजी से बदल रही है. अबूझमाड़ से अब बम और गोलियां की आवाज आना तकरीबन बंद हो चुका है. जिन इलाकों में दशकों से विकास का कोई काम नहीं हुआ है वहां पर अब विकास के काम शुरू होने जा रहे हैं. नारायणपुर कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई ने पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे कई गांवों का दौरा किया है. कलेक्टर ने कहा कि जो गांव दशकों से विकास से दूर रहे हैं वहां पर विकास का काम अब तेजी से होगा. कलेक्टर ने कहा कि नक्सलियों की मौजूदगी के चलते विकास का काम सालों से ठप पड़ा रहा. फोर्स के मूवमेंट और लगातार खुल रहे पुलिस कैंपों की मदद से नक्सलवाद खत्म होने की कगार पर है.

नक्सल प्रभावित गांवों का दौरा

24 नवंबर को कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई ने नक्सल प्रभावित कई गांवों का दौरा किया. कलेक्टर के साथ जिला प्रशासन के अधिकारी भी दौरे पर मौजूद रहे. कलेक्टर ने खुद गांव वालों से बातचीत कर इलाके के विकास पर चर्चा की. कलेक्टर ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि जल्द ही उनके इलाके में तमाम वो सुविधाएं मिलेंगी जिसके वो हकदार हैं. नक्सली समस्या के चलते अबूझमाड़ में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क तीनों पर सालों से काम नहीं हुआ है. जिला प्रशासन के सामने अब चुनौती है कि वो इन बुनियादी सुविधाओं को गांव गांव तक पहुंचाए.

25 नवंबर को 28 माओवादियों ने किया सरेंडर

अबूझमाड़ में हिंसा का रास्ता छोड़ बड़ी संख्या में माओवादी समाज की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं. मंगलवार को भी 28 हार्डकोर माओवादियों ने हथियार छोड़ संविधान पर भरोसा जताया है. हथियार छोड़ने वाले सभी माओवादियों को पौधा भेंट किया गया. सरेंडर माओवादियों ने भी प्रण लिया कि वो अब देश और समाज हित में काम कर आगे का जीवन बिताएंगे. बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने भरोसा जताया है कि जल्द ही अबूझमाड़ से माओवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा.

जन सुरक्षा और सुविधा कैंप की स्थापना

नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ में तेजी से जन सुरक्षा और सुविधा कैंप की स्थापना की जा रही है. इन कैंपों के जरिए इलाके में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क का काम तेजी से किया जा रहा है. जिन इलाकों में कभी मोबाइल काम नहीं करता था वहां अब लोग मोबाइल पर इंटरनेट चला रहे हैं. कैंपों के बनने से आम लोगों में भी सुरक्षा की भावना बढ़ी है. स्थानीय ग्रामीण जो कभी माओवादियों की वजह से जवानों से दूर रहते थे अब उनके करीब आ रहे हैं.

नियद नेल्लानार योजना

नियद नेल्लानार योजना के तहत नक्सल प्रभावित इलाकों में कैंप स्थापित कर 5 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल नेटवर्क, सड़क और पुल-पुलिया, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं. ग्रामीणों को जब सुविधाएं मिलने लगी तो वो जवानों से घुलने मिलने लगे. नक्सली विचारधारा का प्रचार प्रसार भी थमा.

जानिए क्या है नियद नेल्लानार योजना

दरअसल, नियद नेल्लानार योजना छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से साल 2024 में शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है. इस योजना का उद्देश्य नक्सल प्रभावित जिलों के गांवों में शासन की योजनाओं को जनता तक पहुंचाना और बुनियादी सुविधाएं बढ़ाना है. इस योजना का हिंदी नाम “आपका अपना गांव” है, जो एक किलोमीटर के दायरे में गांवों को आवश्यक सुविधाओं और लाभों से जोड़ने पर केंद्रित होता है.

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