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मध्यप्रदेश

इंदौर तलाक केस में ड्रामा! पति ने मांगा तलाक, डॉक्टर पत्नी ने कोर्ट में कहा- ‘पहले हाथ का टैटू दिखाएं’; फिर खारिज हुआ केस

मध्य प्रदेश की इंदौर फैमिली कोर्ट ने एक तलाक केस को खारिज करते हुआ महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. कोर्ट ने युवक की तलाक याचिका को खारिज कर दिया है, जिसने पत्नी पर सफेद दाग (विटिलिगो) की बीमारी छिपाने और मानसिक क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी. अदालत ने पाया कि पति की ओर से लगाए गए सभी आरोप न केवल असत्य थे, बल्कि अपनी ही गलतियों को छिपाने का प्रयास भी थे. वहीं पत्नी की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ कि असल में पति ही क्रूरता का दोषी था, जिसने पत्नी को परेशान किया, उसे छोड़कर अलग रहने लगा और दूसरी महिलाओं से संबंध भी बढ़ाए.

मामला इंदौर के एक प्रमुख मोबाइल सर्विस सेंटर से जुड़े व्यापारी और उनकी डॉक्टर पत्नी से संबंधित है. दोनों ने जनवरी 2011 में आर्य समाज, भागीरथपुरा में प्रेम विवाह किया था. विवाह के बाद कुछ समय सब सामान्य रहा, लेकिन जल्द ही पत्नी को ससुरालजनों की प्रताड़ना झेलनी पड़ी. पत्नी के वकीलों कृष्ण कुमार कुन्हारे और डॉ. रूपाली राठौर ने अदालत में बताया कि परिवार के सदस्य बहू को सफेद दाग की बीमारी को लेकर अपमानित करते थे, उससे बाथरूम तक साफ करवाया जाता था और दस लाख रुपये की अवैध मांग भी की जाती थी.

पत्नी ने कोर्ट को पेश किए सबूत

इसते बाद पत्नी पति के साथ अलग किराए के मकान में रहने लगी. बावजूद इसके पति का व्यवहार नहीं बदला. वकीलों के अनुसार, वर्ष 2017 में पति व्यापार का बहाना बनाकर पत्नी और बच्चे को अकेला छोड़कर चला गया, जबकि वह इंदौर में ही दूसरी जगह रह रहा था. इस दौरान उसका अन्य महिलाओं से मेलजोल बढ़ा, जिसके फोटो पत्नी ने सबूत के रूप में अदालत में प्रस्तुत किए.

जब सुनवाई के दौरान पति से उसके हाथ पर बनी दूसरी महिला के नाम का टैटू दिखाने को कहा गया तो उसने इसे पर्सनल मैटर कहकर दिखाने से इनकार कर दिया. यह व्यवहार स्वयं में संदेह उत्पन्न करता है. वहीं पति द्वारा लगाया गया यह आरोप कि पत्नी ने विवाह से पहले सफेद दाग की बीमारी छुपाई थी, आर्य समाज विवाह के फोटोग्राफ्स से गलत साबित हो गया. तस्वीरों में पत्नी के हाथों पर सफेद दाग स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे, जिससे यह सिद्ध हुआ कि बीमारी कभी छुपाई ही नहीं गई थी.

‘पति के साथ कोई क्रूरता नहीं हुई’

पत्नी का पक्ष यह भी था कि जब उसने तलाक देने से मना किया, तो पति ने 2020 में झूठे आधारों पर तलाक की याचिका दायर की. दूसरी ओर, ससुरालवालों के खिलाफ महिला थाने में प्रताड़ना का केस दर्ज है और वे फिलहाल जमानत पर हैं. अदालत ने सभी साक्ष्यों और दलीलों का परीक्षण करते हुए स्पष्ट किया कि पत्नी ने पति के साथ कोई क्रूरता नहीं की है, बल्कि पति ही पत्नी को छोड़कर चला गया और उसके साथ दुर्व्यवहार करता रहा. न्यायालय ने यह भी कहा कि पति अपने ही दोषों का लाभ उठाकर तलाक नहीं मांग सकता. इसलिए फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका पूर्ण रूप से खारिज कर दी और पत्नी को न्याय प्रदान किया.

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