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सत्र खत्म, बहस जारी! लोकसभा में 111% और राज्यसभा में 121% उत्पादकता, फिर भी विपक्ष ने कहा- ‘जनता के सवाल अब भी अधूरे’

संसद का शीतकालीन सत्र खत्म हो गया है. इस सत्र में वंदे मातरम पर डिबेट और वीबी-जी राम जी बिल पर जमकर घमासान देखने को मिला. ये बिल संसद से पास हो गया है. सत्र खत्म होने के बाद कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कई मुद्दों पर सरकार को जमकर घेरा. शीतकालीन सत्र को प्रदूषणकालीन सत्र करार दिया. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सत्र को प्रोडक्टिव बताया. आइए जानते हैं कि दोनों नेताओं ने क्या-क्या कहा.

  1. जयराम रमेश ने कहा, संसद का शीतकालीन सत्र अभी समाप्त हुआ है. ये सबसे छोटा सिर्फ 15 दिन का सत्र था. हर साल शीतकालीन सत्र 21 से 28 दिन तक चलता है. इस बार सिर्फ 15 दिन के लिए बुलाया गया. इसकी शुरुआत 1 दिसंबर को हुई और आज 19 को खत्म हुआ. 30 नवंबर को राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हुई जो सिर्फ औपचारिकता होती है. उसमें विपक्ष की ओर से क्या मुद्दे हम उठाना चाहता हैं उसका जिक्र करते हैं.
  2. उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से कहा गया कि 14 विधेयक पेश होंगे जिसमें 2 औपचारिकता हैं. कुल मिलाकर 12 विधेयक की जानकारी हमें दी गई थी लेकिन उसमें 5 आए ही नहीं. जब विधेयक आने ही नहीं थे तो जानकारी क्यों दी? मैंने राजनाथ सिंह से कहा था कि हमारा अनुभव ये रहा है कि हर सत्र के समाप्त होने से पहले ब्रह्मोस मिसाइल निकालते हैं, इस बार क्या निकालेंगे? तब वो हंसे थे.
  3. जैसा मैंने संकेत दिया था वैसा ही हुआ और एक विधेयक जो पारित हुआ हंगामे के बीच, वो आखिरी 2 दिन में पेश किया गया. 2 विधेयक की मांग की थी कि इन्हें कमेटी में भेजा जाए, ये हमारी उपलब्धि है कि वो अब भेजे जाएंगे. इस सत्र की शुरुआत हुई और सरकार के ओर से जो वक्ता बोले, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर से शुरू हुआ. वंदे मातरम की पूरी डिबेट जवाहरलाल नेहरू को बदनाम करना और उनका अपमान करना के लिए थी. रवीन्द्रनाथ टैगोर का अपमान हुआ.
  4. जयराम रमेश ने कहा, ये शीतकालीन सत्र नहीं बल्कि प्रदूषणकालीन सत्र था. कल सरकार के ओर से जवाब दिया गया कि प्रदूषण और फेंफड़ों की क्षति का कोई कनेक्शन ही नहीं है. ये सरकार सारे तथ्यों को नाकार रही है, ये किस दुनिया में रहते हैं. कई रिपोर्ट्स में ये आया है कि प्रदूषण का असर लंग्स डिजीज पर भी है और मृत्युदर पर भी है.
  5. उन्होंने कहा, राहुल गांधी ने चर्चा की मांग की थी ताकि हम लोग कुछ सुझाव दे सकें. कल दोपहर अचानक लोकसभा में स्थगन की घोषणा की. जबकि हम लोकसभा और राज्यसभा में बहस के लिए तैयार थे, ये जानकारी हमने सरकार को दी थी. प्रियंका गांधी के नाम पर डिस्कशन भी आया था. हमें लग रहा था कि इस पर चर्चा होगी क्योंकि प्रदूषण की स्थिति बद से बदतर है. कल अचानक घोषणा होती है कि शीतकालीन सत्र अनिश्चितकालीन स्थगित किया जाता है.
  6. उन्होंने कहा, सरकार की ओर से दिखावा है कि हम बहस चाहते थे लेकिन कांग्रेस नहीं चाहती थी. ये पूरी तरह झूठ है. हम लोग चर्चा चाहते थे. हमने सुझाव की बात कही. सरकार प्रदूषण पर चर्चा से भाग रही है. जो सरकार लिखित में तीसरी बार 1 साल में सरकार ने संसद में कहा है कि एयर पॉल्यूशन का बीमारी और मृत्यदर पर कोई असर नहीं है, जबकि ये बिल्कुल झूठ है. हम सबूत पेश करने वाले थे उनके इस दावे के खिलाफ, इसलिए सरकार भाग गई.
  7. लोकसभा और राज्यसभा में नया अधिनियम हंगामे के बीच पारित हुआ, ये महात्मा गांधी NREGA को ये रिपील करता है. कांग्रेस के सीएम की बैठक गुवाहाटी में 2002 में हुई जब 15 CM मौजूद थे, अध्यक्षता सोनिया गांधी ने की और मनमोहन सिंह मौजूद थे. उस बैठक में लिखा गया कि केंद्र सरकार को रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट लाना चाहिए, उसके बाद 2004 चुनाव में घोषणा पत्र में हमने ये वादा किया था कि हम 100 दिन का कानून बनाएंगे.
  8. फिर कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बना. फिर जुलाई 2004 से अगस्त 2005 तक 13 महीनों तक इस विषय पर चर्चा हुई. फिर मसौदा तैयार हुआ फिर चर्चा हुई और विधेयक का मसौदा तैयार किया गया और पेश किया गया. फिर वो एक्ट स्थाई समिति को भेजा गया. उसकी अध्यक्षता कल्याण सिंह भाजपा सांसद थे, 7-8 महीने बहस हुई और फिर ये कानून बना.
  9. तब ये सर्वसम्मति से बना, सभी पार्टियों की अनुमति के बाद बना. स्थाई समिति के विचार विमर्श, विश्लेषण के बाद ही बना. अब ज़रा तुलना कीजिए कि VB G Ram G विधेयक लाया गया. 2 दिन पहले हमें जानकारी मिलती है. इसका पहला और सीधा असर हमारे समाज का कमजोर और गरीबों पर पड़ेगा. SC, ST, पिछड़े वर्ग, खेत मजदूर और महिलाओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा. इसलिए ही MNREGA को एम्प्लॉयमेंट ऑफ लास्ट रिजॉर्ट कहा जाता था. दूसरा असर सीधे तौर पर राज्यों पर पड़ेगा, राज्यों का योगदान पहले मात्र 10% होता था, अब ये 60:40 अनुपात में लागू किया जीएगा, राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा. राज्यों की वित्तीय स्थिति और भी कमजोर होगी.
  10. ये एक बड़ी साजिश है. पहले RTI को खत्म किया कल Mgnrega को खत्म किया और अब तीसरा निशाना वन अधिकार अधिनियम होगा और चौथा निशाना भूमि अधिग्रहण कानून होगा. एक दिन आयेगा कि खाद्य सुरक्षा कानून पर भी कई सवाल खड़े किए जाएंगे. संसद में उन्होंने बुलडोजर चलाया है, पहले लोकसभा फिर राज्यसभा में इन्होंने बुलडोजर चलाया है. मैने कई मंत्रियों और भाजपा सांसदों से पूछा है कि आपने बुलडोजर क्यों चलाया है, सभी का जवाब सिर्फ ऊपर की तरफ देखकर उंगली उठाना था, बोले कुछ नहीं.
  11. सभी के पास जल्दबाजी को लेकर कोई जवाब नहीं था. मैंने ग्रामीण विकास मंत्री रहते जो भी सांसदों, संस्थाओं को छोड़िए अपने किस मुख्यमंत्री से बात की? UP, बिहार या चंद्रबाबू नायडू किसके मुख्यमत्री से अपने बात की? सिर्फ एक व्यक्ति ने तय किया कि बिल आएगा और वो पारित होगा. ये कहानी थी इस प्रदूषणकालीन सत्र की कहानी.
  12. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, शीतकालीन बहुत प्रोडक्टिव रहा है. इस सत्र में जो बिल पास किए गए है वो विकसित भारत बनाने में काम आने वाला है. बहुत लोगों ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाया था लेकिन सदन में चर्चा के बाद दूध का दूध पानी का पानी हो गया है. इलेक्शन रिफॉर्म को लेकर पहली बार चर्चा हुई. मनरेगा में लूट खसोट का जरिए बन गया था. अब जी राम जी में भ्रष्टाचार रोकने का पूरा प्रावधान है, ये क्रांतिकारी बिल है. दो बिल समिति को भेए गए हैं.
  13. उन्होंने कहा, विपक्ष को भी धन्यवाद देता हूं कि चर्चा में हिस्सा लिया. प्रदूषण पर हंगामे की वजह से चर्चा नहीं हो पाई. रिफॉर्म एक्सप्रेस चल चुकी है अब रुकने वाली नहीं है. कांग्रेस के लोगों ने ही प्रदूषण पर चर्चा करने से मना कर दिया. कांग्रेस ने दूसरे दलों को भी भड़काया दिया. हम चर्चा की तैयारी कर चुके थे. प्रोटेस्ट करने का तरीका विपक्ष का ठीक नहीं था टेबल पर चढ़बकर नाचना विरोध नहीं है.
  14. रिजिजू ने कहा, कांग्रेस ने धोखा किया. कांग्रेस ने पहले बात करके टाइम ज्यादा लिया फिर जब टाइम मंत्री के बोलने का आया तो हंगामा कर दिया. विपक्ष ने मांग की थी कि तीन बिल समिति को भेजे जाएं, हमने 2 भेजे हैं. सदन के अंदर ई सिगरेट पीने के मामले की जांच फोरेंसिक लैब को दी गई है.

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