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छत्तीसगढ़

“विकलांग नहीं, दिव्यांगजन कहें” :मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की अपील, रायपुर में दिव्यांग परिचय सम्मेलन से दिया सामाजिक संदेश

रायपुर: महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दिव्यांगजनों को लेकर समाज की सोच बदलने की अपील की है. रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय दिव्यांग युवक–युवती परिचय सम्मेलन में मंत्री राजवाड़े ने स्पष्ट कहा कि सम्मानजनक भाषा ही समानता की पहली सीढ़ी है, इसलिए “विकलांग” नहीं बल्कि “दिव्यांगजन” शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए.

दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा का अभिन्न हिस्सा: राजवाड़े

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा, दिव्यांगजन किसी भी तरह से कमजोर नहीं हैं, बल्कि वे समाज की मुख्यधारा का अभिन्न अंग हैं. मंत्री राजवाड़े ने कहा कि उनके प्रति संवेदनशील सोच और सम्मानजनक व्यवहार अपनाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. राजवाड़े ने कहा कि ऐसे आयोजन आत्मविश्वास बढ़ाने और सामाजिक स्वीकार्यता को मजबूत करने का कार्य करते हैं.

”परिचय सम्मेलन नहीं, गरिमापूर्ण वैवाहिक जीवन की पहल”

अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद (छत्तीसगढ़ प्रांत) द्वारा आयोजित 16वें राज्य स्तरीय विवाह योग्य युवक–युवती परिचय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री राजवाड़े ने कहा, कार्यक्रम केवल परिचय तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांग युवक–युवतियों को सम्मान और गरिमा के साथ वैवाहिक जीवन की ओर अग्रसर करने का प्रयास है.

2026 में होगा सामूहिक विवाह, सहमति से बने जोड़ों को मिलेगा नया जीवन

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि सम्मेलन में सहमति से बनने वाले जोड़ों का सामूहिक विवाह 28 फरवरी 2026 और 1 मार्च 2026 को आयोजित किया जाएगा. राजवाड़े ने कहा कि यह पहल दिव्यांगजनों के सामाजिक पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा कदम है. सम्मेलन की विशेष उपलब्धि बताते हुए मंत्री ने कहा कि इस बार सामान्य युवक–युवतियां भी दिव्यांगजनों से विवाह के लिए आगे आए हैं, जो समाज में बदलती सोच और समानता की भावना को दिखाता है. यह सामाजिक समरसता की दिशा में प्रेरणादायी पहल है.

मंत्री ने कहा शब्दों से बदलती है हमारी सोच

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सामाजिक अपील करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आग्रह के अनुरूप “दिव्यांगजन” शब्द का प्रयोग सम्मान और आत्मबल को सुदृढ़ करता है. राजवाड़े ने कहा कि शब्द केवल संबोधन नहीं होते, वे हमारी सोच और संवेदना को भी दर्शाते हैं. मंत्री राजवाड़े की इस अपील का समर्थन करते हुए कहा कि “विकलांग” के स्थान पर “दिव्यांग” शब्द का उपयोग समाज में सकारात्मक संदेश देगा. उन्होंने मांग की कि सरकारी और सामाजिक दस्तावेजों में भी यही शब्द अपनाया जाए.

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